सुल्तान-ए-औलिया गौस-ए-आज़म हज़रत अब्दुल क़ादिर जिलानी इरशाद फ़रमाते है…”’

*हुजूर गौस ए आज़म राह्मतुल्लाही अलैय की जब पैदाइश हुई तो आपके साथ जितने भी बच्चे पैदा हुए आपके करम से और निस्बत से सब कामिल वाली गुजरे..।

*आप एक बार घर के बाहर खड़े थे उस वक़्त वहा से एक बुजुर्ग का गुज़र हुआ तो उन बुजुर्ग हजरत ने सुन्नत अदा करते हुए आपसे पहले सलाम किया तो हुजूर गौस ए आज़म शहंशाह ए विलायत शैख़ मुहियुद्दीन अब्दुल क़ादिर जिलानी सलाम सुन कर जवाब कुछ इस तरह देते है ….*
*वालैकुम अस्सलाम वरहमतुल्लाही वबरकतुहु*
*वालैकुम अस्सलाम वरहमतुल्लाही वबरकतुहु* tj hqdefault Gause Azam d43714a9f784485c98287d8a814c42b4 84369654 shrine_abdul_qadir_jilani0
*तो बुजुर्ग शख्शियत हैरानी के साथ पूछते है ए बेटे अब्दुल क़ादिर मैंने तो एक बार सलाम किया तो अपने दो बार जवाब क्यों दिया…….।
*तो गौस ए आज़म अब्दुल क़ादिर जिलानी इरशाद फरमाते है :~*
*मैंने दो बार जवाब इसलिए दिया क्योकि*
*एक बार अभी अपने सलाम किया ……।
*और याद कीजिए जब मैं अपनी माँ के पेट में था तब आप आए थे और अपने सलाम किया था ।
*तो बुजुर्ग हैरानी के साथ अर्ज करते है :~*
*तो अपने उस वक़्त सलाम का जवाब क्यों नहीं दिया ।
*तो हुजूर गौस ए आज़म इरशाद फरमाते है :~ उस वक़्त मै अपनी माँ के पेट में था अगर उस वक़्त जवाब देता तो मेरी अम्मी जान घबरा जाती तो मैंने आज ये वाजिब अदा किया ।
*एक बार आप बाहर खेल रहे थे तो अपनी माँ से अर्ज करते है, ‘अम्मीजान आपको याद है जब मै आपके पेट में था तब आप अंगूर के बागीचे में अंगूर तोड़ रही थी तो आपके पेट में जोर से दर्द होना शुरू हो गया ..।
*फिर दर्द रुक गया और फिर अंगूर तोड़ने लगी तो फिर दर्द होने लगा तो आपने अंगूर तोडना छोड़ कर आप घर आ गए…..।
*तो आपकी वालिदा मोहतरमा बड़ी हैरानी के साथ अर्ज करती है :~*
*हाँ बेटे पर तुम्हे कैसे पता ।
*तो हुजूर गौस ए आज़म मुस्कुराकर इरशाद फरमाते है :~ अम्मीजान वो दर्द मैंने ही जब बूझकर आपके पेट में हरकत कर के पैदा किया था ।
*तो आपकी अम्मीजान कहती है :~ बेटे आपको पता है माँ को तकलीफ पहुचाना कितना बड़ा गुनाह है……।
*तो आप हुजूर गौस ए आज़म इरशाद फरमाते है :~*
*अम्मीजान* *आपको उस वक़्त अंगूर नज़र आ रहे थे पर अंगूर के गुच्छे के अंदर छुपा काला स्याह बिच्छू नज़र नहीं आया …….*
*वो बिच्छू मैंने देख लिया था तो मैंने पेट में हरकत की ताकि आपको दर्द हो जिससे आप अंगूर को न तोड़े और आपको वो काला बिच्छू ना काटे…….।
*सुब्हानअल्लाह …..*
*जब हुजूर गौस ए आज़म माँ के पेट के 7 पर्दो में से बिच्छू को देख सकते है तो………*मिट्टी के एक परदे मे से हम क्यूँ नहीं देख सकते !
*अल्लाह हम पर गौस ए आज़म का साया बनाए रखे और हमें इस काबिल बनाए कि आपका कदर-ए-मुबारक हम गुलामो के ऊपर रह सके…..।
Aameen.

Share

Leave a Reply

%d bloggers like this: