#MeToo_मोदी महिला उत्पीड़न के आरोपी मंत्री को बचा रहे हैं, यह आरोप किसी विपक्षी नेता पर लगे होते तो बीजेपी बवाल मचा देती

Posted by


सत्ता, राजनीती, पद, पैसा कई ऐसी चीज़ें हैं जो इंसान को ‘बेशर्म'[ बना देती हैं, और यह ऐसी बेशर्मी होती है जिसकी कोई हदें नहीं होती हैं, मोदी के मंत्री एमजे अकबर पर कथित रूप से लगे आरोपों के बाद सरकार को उन्हें तुरंत बर्खाश्त कर देना चाहिए था, और खुद मंत्री को भी सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए था, लेकिन नेताओं की बातें कोरे ‘जुमले’ होती हैं, जो मोदी महिला बचाओ की बात करते हैं वह महिला यौनि उत्पीड़न के आरोपी मंत्री को बचा रहे हैं| राजनीती इसी को कहते हैं, बकते जाओ जनता का क्या है भूल जाएगी और अगर न भूले तो चार लाठी मार कर आवाज़ बंद करवा दी जाएगी|

विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर पर कथित रूप से लगे आरोपों को लेकर मीडिया में खासकर हिन्दी के अखबारों में कैसी रिपोर्टिंग हो रही है, यह देखना दिलचस्प होगा. कहीं पर भी आरोप लगाने वाली महिलाओं की बातें विस्तार से नहीं हैं. जहां प्रमुखता से छपी हैं वहां भी और कई जगह तो खबर ऐसे छपी है जैसे यूं ही किसी ने राह चलते आरोप लगा दी हो. आप हैरान हो जाएंगे कि कुछ हिन्दी अखबारों में दस बीस लाइन की खबर भी ठीक से नहीं छपी है. विदेश राज्य मंत्री पर 9 महिला पत्रकारों ने आरोप लगाए हों, पूरी सरकार चुप हो गई हो और हिन्दी अखबारों से इस खबर को करीब करीब गायब कर दिया जाए यह कितना दुखद है. एक अखबार के कई संस्करण होते हैं. हार्ड कापी होती है, ई संस्करण होते हैं, वेबसाइट होती है. भोपाल से अनुराग द्वारी ने बताया कि 10 अक्तूबर को हिन्दी के दो बड़े अखबारों की हार्ड कापी में अकबर की खबर नहीं है. इनके लाखों पाठकों को पता ही नहीं चला होगा, जबकि यह ख़बर पत्रिका और भास्कर में है.
रविश कुमार – NDTV india


#MeTooIndia_बढ़ीं मोदी के मंत्री एम.जे.अकबर की मुश्किलें, कांग्रेस समेत विपक्ष ने माँगा इस्तीफ़ा

यौन शोषण के खिलाफ एक साल पहले अमेरिका में शुरू हुए #MeToo अभियान ने भारतीय राजनीति को भी अपने चपेट में ले लिया है. इसका सबसे पहला शिकार विदेश राज्यमंत्री एम जे अकबर हुए हैं. तीन वरिष्ठ महिला पत्रकारों के आरोप के बाद अब पत्रकार गजला वहाब ने अकबर पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं. अकबर पर लगातार लग रहे आरोपों के बीच कांग्रेस ने मोदी सरकार से उनके इस्तीफे की मांग की है.

गजला वहाब ने एम जे अकबर द्वारा यौन शोषण की उस समय की कहानी बयां की है, जब वो 1994 में अंग्रेजी अखबार ‘द एशियन एज’ में कार्य करती थीं और अकबर इस अखबार के संपादक थे. गजला ने बताया है कि किस तरह वे अकबर की लेखनी से प्रभावित थीं और पत्रकार बनना चाहती थीं. लेकिन पत्रकार के तौर सीखने से पहले उनके भ्रम को टूटना था. गजला ने 1997 के उन 6 महीनों का जिक्र किया है जब अकबर ने उन्हें अपने केबिन में बुलाकर उनके साथ अश्लील हरकतें की.

गौरतलब है कि जिस वक्त #MeToo अभियान के तहत बॉलीवुड में यौन शोषण के गुनहगारों को सार्वजनिक किया जा रहा था. उस वक्त 6 अक्टूबर को गजला ने ट्वीट कर लिखा था कि उन्हें आश्चर्य है कब एम जे अकबर के बारे में #MeToo अभियान के तहत जलद्वार खुलेगा. गजला के इस ट्वीट के बाद विदेश राज्यमंत्री के खिलाफ लगातार तीन महिला पत्रकारों ने सिलसिलेवार आरोप लगाए. वरिष्ठ पत्रकार प्रिया रमानी, शूमा राहा और लेखिका प्रेरणा सिंह बिंद्रा ने अकबर पर आरोप लगाए हैं.

kaur

अंबानी 45000 करोड़ ₹ कर्जे मे है 10 दिन पहले कंपनी खोली,PM ने 30,000 करोड़ ₹ देश की जनता का और एयरफोर्स का पैसा अनिल अंबानी की जेब में डाला है !
पहले ओलांद ने अब राफेल के सीनियर एक्जीक्यूटिव ने और साफ कर दिया, राफेल सौदे के बदले दसॉल्ट को रिलायंस से डील करने को कहा गया था !

Dilip Mandal

@dilipmandal
आज से ठीक 366 दिन पहले ओबीसी बंटवारे के लिए मोदी सरकार द्वारा गठित रोहिणी कमीशन ने काम शुरू किया. इसे 12 हफ्ते में रिपोर्ट देनी थी. रिपोर्ट का कहीं नामो निशां नहीं. अति पिछड़ों को न्याय दिलाने से क्यों हिचक गए नरेंद्र मोदी.

santosh gupta

@BhootSantosh
.
लोकतंत्र में सरकारें बदलती रहती हैं,, पर बाजार (सेठ/उद्योगपति) नहीं बदलते.!
“बाजार”.. सत्ता को भी चंदा देता है,, और विपक्ष को भी.! ताकि दोनों लड़ते रहें,, और बाजार चलता रहे.!

सरकारें.. बाजार की “कठपुतली” होती है.! नाचेगी नहीं,, तो चंदा कैसे मिलेगा ☹️