देश

अति. पुलिस अधिक्षक नेमसिंह चौहान के सफ़र की सिफ़र से शिखर तक की दास्तान : बांसवाड़ा राजस्थान से धर्मेन्द्र सोनी की स्पेशल स्टोरी!

कुशलगढ़ जिला बांसवाड़ा राजस्थान रिपोर्टर धर्मेन्द्र सोनी,

सांभार केसरपुरा के ज्वार बाजरे के खेतों में अंकुरित “केसर के फूल” की महक से गुलफाम फ़िज़ा
कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं होता यारो एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो,ढुंढ सको तो ईस माटी में सोना है, हिम्मत का हथियार नहीं हमें खोना है, जैसी पंक्तियों को चरितार्थ करने वाली शिफर से शिखर तक की दास्तान स्पेशल स्टोरी

अति. पुलिस अधिक्षक नेमसिंह चौहान के सफ़र की शिफर से शिखर तक की दास्तान

ब्यावर के समीप सेन्दडा के एक छोटे से गाँव केसपुरा मै एक किसान के कच्चे घर मे 1965 में पुत्र जन्म पर “कांसी की थाली” बजाई गई तब यह तय था जन्म लेने वाले शिशु का शिखर खेत खलिहान ओर गाय ढांडे पर जाकर इतिश्री की खडीपाई का ही मुक़ाम अन्तिम है. अमुमन उस जमाने मे शिक्षा के अभाव में दूरदराज़ के ग्रामीण अंचलों के बच्चों की कुंडली मे खेत जोतने से ज़्यादा ओर कुछ हिस्से में नहीं आता था . लेकिन अरावली की सघन पहाड़ियों की गोद में ग्रामीण परिवेश की धरोहर केसरपुरा ग्राम के खेतों में ज्वार बाजरों की फसल के बीच एक नन्हा सा पौधा “केसर” का अंकुरित हुआ जिसने यह सिद्ध किया कि बंजर खेत में जुनूनी पसीने से सींचा जाये ओर श्रम ओर संघर्ष की उर्वरा का हल चलाया जाये तो असम्भव को भी सम्भव करके बाजरे के खेतों में भी केसर का फूल खिल सकता है, इसी केसर के फूल की रूहानी ख़ुशबू का नाम है नेमसिंह चौहान !! अभी भारत के गृह मंत्रालय द्वारा उत्कृष्ट सेवा सम्मान के लिए चयनित श्री चौहान वर्तमान में

अजमेर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद पर कार्यरत है . इस सम्मान के लिए सोशल मिडिया में प्रशंसनीय चर्चाओं में आये इस “गुदड़ी के लाल” को. भारत सरकार के गृह मंत्रालय विभागीय स्तर पर राजकीय सेवा में अतुलनीय योगदान के लिए यह सम्मान दिया जाता है. अपने राजकीय कार्यकाल में यह सम्मान काफ़ी महत्वपूर्ण होने के साथ पुलिस विभाग में मायने भी रखता है. अमुमन पुलिस विभाग की नकारात्मक छवि हमारे ज़ेहन मे छायी हुई है ऐसे ईमानदार पुलिस अफ़सर की निष्कलंक छवि से विभाग भी गौरवान्वित होता है तथा जनता में भी पुलिस के प्रति लोगों का विश्वास भी बढ़ता है. श्री चौहान की शिक्षा दिक्षा ब्यावर में ही हुई. साथ ही ब्यावर सीटी थाना मे थानाधिकारी रहे . अपने मधुर स्वभाव ओर ईमानदार छवि के कारण ब्यावर मे श्री चौहान के प्रशंसकों की काफ़ी लम्बी चौड़ी तादाद है. पुलिस सेवा के दौरान श्री चौहान ने कई मामलो में सजगता के साथ अनुसंधान कर अपराधियों को गिरफ़्तार कर सनसनी खेज़ मामलो को उजागर किया. ब्यावर के बहुचर्चित टेक्सी चालक हत्याकांड में बिहार के दुर्दान्त बीहड़ गाँव सीतामढ़ी से हत्यारो को धरधबोच कर राजस्थान लाने में श्री चौहान की खूब तारीफ़ हुई थी . इसके अलावा भी कई सनसनीख़ेज़ खुलासे ओर अपराधियों की गर्दन नापने के लिए विभाग में श्री चौहान की ख़ासी पैठ है 

पुलिस जैसे राजकीय सेवा में सख़्त ओर रोबीले तेवर के कारण चर्चित श्री चौहान मन का ज़ेवर बहुत ही संवेदनशील है. प्रकृति के प्रति ज़बरदस्त आसक्ति रखने वाले यह अधिकारी आज भी अपनी ग्रामीण परिवेश ओर संस्कृति से लगाव है अपने गाँव के नैसर्गिक प्राकृतिक सौन्दर्य को केमरे में क़ैद करना इनका शौक़ है. साथ ही कई भावात्मक विषयों को लेखन रूचि की कूँची से काग़ज़ों में उकरेना इनकी भाव अभिव्यक्ति दर्शाता है. अभाव से प्रभाव की यात्रा के अतीत की बात करें तो श्री चौहान मात्र 8 साल के थे तब सिर से इनके पिता का साया उठ चुका था. असाक्षर माँ ने इस विकट समय में भी हार नहीं मानी ओर अपनी संतानों को अहसास नहीं होने दिया कि उनकी परवरिश का पालक इस जग में नहीं रहा. श्री चौहान के परिवार में कभी कोई स्कुल गया ही नहीं था इनके बड़े भाई ने ही केवल चौथी क्लास पढ़ी थी. श्री चौहान एक मात्र अपने परिवार में पहले ऐसे सदस्य थे जिन्होंने पाँचवीं क्लास उत्तीर्ण की तो पूरे परिवार मे ख़ुशीयो का मेला लग गया. संयोग से इनके बड़े भाई की नौकरी रेलवे में लग गई. श्री चौहान बड़े आदरपूर्वक बताते हैं मेरे बड़े भाई ने मेरे पिता के वो सभी दायित्वों का निर्वहन किया कि मुझे कभी अहसास ही नहीं होने दिया कि मेरे ऊपर पिता का साया नहीं है. आज जो कुछ भी हूँ उसका सारा श्रेय मेरे बड़े भाई को जाता है. गाँव में पाँचवीं क्लास के बाद ब्यावर की पटेल स्कुल में दाख़िला लिया फिर ब्यावर की कालेज से ही ग्रेजुएट हुए ओर यहाँ से बी एड करने विद्या भवन उदयपुर चले गये . श्री चौहान बी एड करने के बाद अध्यापक बनना चाहते थे. लेकिन क़िस्मत में तो ओर ही कुछ लिखा था इसी मध्य में पुलिस में भर्ती निकली ओर श्री चौहान ने आवेदन किया ओर टेस्ट से लेकर इन्ट्रव्यू में सलेक्ट हो गये. सिफ़र से शिखर तक के संघर्षमय पथ मे जिन्होंने इस अबोध को सहारा दिया आज भी उन्है याद करते हुए श्री चौहान ने बताया मेरे प्रारंभिक शिक्षक रहे श्री डूंगरराम सिरवी, रामसिंह जी चौहान जिन्होंने मुझे जीवन मूल्य की नैतिकता का पाठ पढ़ाया. प्रो नरेन्द्र सिंह आनन्द जिन्होंने शिक्षा के साथ आदर्श ओर सिद्धांतों से अवगत कराया. ACP आमेर चन्द्र सिंह जी जिनका सानिध्य ओर साथ साये की तरह रहा. बचपन के मित्र अब्दुल हनीफ़ सुभाष मिश्रा से आज भी मित्रता क़ायम है. असाक्षर परिवार का शैक्षिक दीप श्री चौहान के परिवार मे अब शिक्षा की ज्योत देदीप्यमान है. इनके ज्येष्ठ पुत्र हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं इनके लघु पुत्र MBA के बाद एक चिकित्सालय में कार्यरत है ▪️