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अमेरिका और सऊदी अरब का तनाव बढ़ता जा रहा है, अमेरिकी सांसदों ने सऊदी अरब और UAE से अपने सैनिकों को वापस बुलाने की मांग की!

इस फैसले में तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक के एक महत्वपूर्ण सदस्य सऊदी अरब ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अमेरिका यह चाहता था कि तेल अधिक निकाला जाये ताकि यूरोप और पश्चिमी देशों में इस समय जो ऊर्जा संकट उत्पन्न हो गया उससे आसानी से निपटा जा सके परंतु सऊदी अरब ने अमेरिका की इस मांग की अनदेखी कर दी।

ओपेक प्लस देशों के इस फैसले का नतीजा यह हुआ कि तेल की कीमतों में और वृद्धि हो गयी। दूसरे शब्दों में पश्चिमी और यूरोपीय देशों में ऊर्जा संकट और विषम रूप धारण कर गया। ओपेक प्लस देशों के इस फैसले से रूस को फायदा होगा विशेषकर इसलिए कि उसने यूरोप और पश्चिम के जवाब में यूरोप को गैस देना बंद कर दिया है और जाड़ा आने वाला है और गैस की भारी कमी के साथ जाड़ा गुज़रना बहुत सख्त है।

यूरोप और पश्चिमी देशों में जो इस समय ऊर्जा संकट उत्पन्न हो गया है उसे लेकर इन देशों में मतभेद आरंभ हो गये हैं और बहुत से लोग रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग करने लगे हैं।

बहुत से जानकार हल्कों का मानना है कि यूरोपीय देशों ने अमेरिका की हां में हां मिलाने के कारण रूस पर प्रतिबंध लगाने में उसका साथ दिया और अब उसकी कीमत यूरोपीय देशों के लोग अदा कर रहे हैं।

उधर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले संकट को लेकर अमेरिका और सऊदी अरब के संबंधों में तनाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी सांसदों व सिनेटरों के एक गुट ने ओपेक प्लस देशों के हालिया फैसले के बाद सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात से अपने सैनिकों को वापस बुलाने की मांग की है। इसी प्रकार इन अमेरिकी सांसदों व सिनेटरों ने एक विज्ञप्ति जारी करके एलान किया है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात की ओर से एसी स्थिति में तेल कम निकालने का फैसला किया गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने हालिया महीनों में इन दोनों देशों को तेल कम न करने का प्रस्ताव दिया था और इन दोनों देशों का अमल इस बात का सूचक है कि उन्होंने अमेरिका के विरोध में और रूस के पक्ष में फैसला लिया है।

अमेरिकी सांसदों और सिनेटरों का यह कदम इस बात का सूचक है कि वाशिंग्टन रियाज़ से काफी नाराज़ है।

यहां एक अन्य बिन्दु पर ध्यान देना ज़रूरी है और वह यह है कि नवंबर में अमेरिकी कांग्रेस के मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं और निश्चित रूप से ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि के मामले का असर अमेरिकी डेमोक्रेटों और जो बाइडेन की राजनीतिक छवि पर पड़ेगा और हो सकता है कि अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेटों की अकसरियत खत्म हो जायेगी। अमेरिकी सिनेटर बर्नी सेन्डर्ज़ ने पहली बार कहा है कि सऊदी अरब विश्व में मानवाधिकार का सबसे बड़ा हननकर्ता है और साथ ही उन्होंने सऊदी अरब से समस्त अमेरिकी सैनिकों को निकाले जाने और सऊदी अरब को सैन्य हथियारों की बिक्री को रोके जाने की मांग की है।

बहरहाल जिस सऊदी अरब ने अमेरिकी आर्शीवाद से यमन पर हमला किया और उसके समर्थन से बहुत से अपराधों को अंजाम दिया अब वही सऊदी अरब वाशिंग्टन की इच्छा के खिलाफ फैसला ले रहा है यह क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव के कम होने का सूचक है