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अमेरिका ने एक बार फिर यूरोप को अकेला छोड़ दिया है : रिपोर्ट

ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने कहा है कि प्रतिबंधों को हटाए जाने के लिए बातचीत के बारे में संदेशों का आदान-प्रदान जारी है। उन्होंने कहा कि समझौते के रास्ते में, हमने उन क़दमों को परिभाषित किया जो मुझे लगता है कि निकट भविष्य में इनमें से एक लागू किया जाएगा।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, वियना में महीनों की बातचीत के अनुभव ने यह साबित कर दिया है कि आंतरिक समस्याओं और अवैध ज़ायोनी शासन के दबाव के कारण व्हाइट हाउस के पास परमाणु समझौते में लौटने की शक्ति नहीं है। इस दृष्टिकोण से, उसने ईरान के ख़िलाफ़ आरोप लगाने और दिखावटी समय सीमा तय करने की रणनीति का सहारा लिया है। वहीं वार्ता में भाग लेने वाले अधिकांश देश बातचीत का तेज़ी से समापन चाहते हैं, लेकिन अंतिम समझौते पर पहुंचना, साथ ही कुछ शेष महत्वपूर्ण और प्रमुख मुद्दों के बारे में अमेरिका के राजनीतिक निर्णयों के लिए लंबित है। इस्लामी गणतंत्र ईरान इस बात पर हमेशा ज़ोर देता आया है कि यदि अमेरिकी पक्ष वास्तविक रूप से कार्य करता है, तो ऐसी स्थिति में वियना में एक समझौते पर पहुंचना संभव है। ईरान जिस समझौते पर विचार कर रहा है वह एक ऐसा दस्तावेज़ है जो प्रतिबंधों को जितना संभव हो उतना उठाएगा और इसके कार्यान्वयन से क्षेत्र को लाभ होगा।


समाचार एजेंसी इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार की रात को एक टीवी चैनल के साथ बातचीत करते हुए इस्लामी गणराज्य ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने कहा है कि यदि दूसरी तरफ दृढ़ इच्छाशक्ति और मज़बूत इरादा हो और साथ ही हमारे हित सुरक्षित रहें, तो ऐसी स्थिति में समझौता का होना संभव है। विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिकियों ने तीन यूरोपीय देशों की तुलना में बहुत पहले समझ लिया था कि ईरान में उपद्रव के पीछे कोई ख़बर नहीं है और कुछ भी होगा भी नहीं। इसीलिए उन्होंने सबसे पहले एक संदेश भेजा कि वे जेसीपीओए में लौटना चाहता है। उन्होंने बल दिया कि जहां भी हमें लगता है कि राष्ट्र के हित उस बिंदु पर हैं जहां उन्हें प्रदान किया जाता है, हम निर्णय लेते हैं और उस ढांचे के भीतर कार्य करते हैं। अमीर अब्दुल्लाहियान ने ईरान और आईआरजीसी के ख़िलाफ़ कुछ यूरोपीय देशों की कार्यवाही की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि आज यूरोप में तर्कशक्ति पर भावनाएं हावी हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले, हमने यूरोपीय देशों को यह बता चुके हैं कि ईरान के ख़िलाफ़ कोई भी कार्यवाही और आईआरजीसी को आतंकवादी समूहों की सूची में डालने से संबंधों में नकारात्मक माहौल पैदा हो सकता है।