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अमेरिका में गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साज़िश के आरोपों पर पहली बार प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी प्रतिक्रिया दी

अमेरिका में सिख अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साज़िश के आरोपों पर पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.

फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कहा कि वो सबूतों को देखेंगे लेकिन कुछ वाकयों से भारत और अमेरिका के संबंधों पर असर नहीं होगा.

कुछ वक़्त पहले अमेरिका ने ये दावा किया था कि भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने न्यूयॉर्क में पन्नू की हत्या के लिए एक शख़्स को क़रीब 83 लाख रुपये की सुपारी दी थी.

अमेरिकी कोर्ट में पेश दस्तावेज़ों में दावा किया गया, “निखिल गुप्ता को भारत सरकार के एक कर्मचारी से निर्देश मिले थे.”

इस मामले में भारत ने उच्च स्तरीय कमेटी बनाकर जांच शुरू की थी. अमेरिका ने भारत के इस कदम का स्वागत किया था.

पीएम मोदी ने क्या कहा?
अब पीएम मोदी ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा, ”अगर कोई हमें किसी तरह की जानकारी देगा तो हम ज़रूर इस पर गौर करेंगे. अगर हमारे किसी नागरिक ने कुछ अच्छा या बुरा किया है तो हम इसे देखने के लिए तैयार हैं. हमारी प्रतिबद्धता क़ानून के प्रति है.”

गुरपतवंत सिंह पन्नू सिख फोर जस्टिस के प्रमुख हैं. भारत इस संगठन को ‘आतंकवादी’ संगठन घोषित कर चुका है.

पीएम मोदी ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत से बाहरअलगाववादी संगठनों की गतिविधियों पर वो बेहद चिंतित हैं.

वो बोले, ”ये अलगाववादी तत्व अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर धमकियां देते हैं और हिंसा के लिए उकसाते हैं.”

पीएम मोदी ने अमेरिका और भारत के संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग हमारी साझेदारी के अहम पहलू हैं.

वो कहते हैं- “मुझे नहीं लगता कि कुछ वाकयों को दो देशों के राजनयिक संबंधों से जोड़कर देखा जाना चाहिए.”

कनाडा, अमेरिका और भारत

पीएम मोदी ने जिन राजनयिक संबंधों का ज़िक्र किया, उसे लेकर बीते कुछ महीनों में भारत पर सवाल उठे हैं.

इस साल सितंबर में कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने देश की संसद में भारत पर गंभीर आरोप लगाए थे. जी-20 सम्मेलन के दौरान भी पीएम मोदी और ट्रूडो के बीच की दूरियां तस्वीरों में देखने को मिली थीं.

ऐसे में सम्मेलन से कनाडा लौटने के बाद ट्रूडो ने सिख नेता हरदीप सिंह निज्जर की हुई हत्या के पीछे भारतीय एजेंटों के होने की बात की थी.

दोनों देशों ने बारी-बारी से एक-दूसरे के राजनयिकों को भी निष्कासित किया था. भारत ने कनाडा के आरोपों को ख़ारिज किया था.

कनाडा सरकार की ओर से ये भी बताया गया था कि ट्रूडो ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के सामने भी ये मुद्दा उठाया था. ऐसे में जब अमेरिका में पन्नू की हत्या की साज़िश मामले में जब भारत का नाम आया तो ये भारत सरकार के लिए मुश्किल स्थिति हो गई.

भारत ने अमेरिका की ओर से पन्नू का मामला उठाने पर एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई थी.

कनाडा और अमेरिका के मामले में भारत की प्रतिक्रिया अलग-अलग रही. इस बारे में जब हाल ही में जयशंकर से पूछा गया तो वो बोले थे- ज़रूरी नहीं है कि दोनों मुद्दे एक जैसे हों.

जयशंकर ने कहा था, ”कनाडा और अमेरिका के मामले अलग-अलग हैं. अमेरिका ने हमें सबूत मुहैया करवाए हैं.”

वहीं नवंबर में कनाडा की वाणिज्य मंत्री मेरी एनजी ने कहा था कि जब तक भारत की मोदी सरकार हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले की जांच में सहयोग नहीं करेगी, तब तक व्यापार को लेकर बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी.

जयशंकर कई मौक़ों पर कनाडा से सबूत साझा करने के लिए कह चुके हैं.

18 जून को कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में हरदीप सिंह निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.


पन्नू का पूरा मामला क्या है?
वहीं निज्जर से इतर अमेरिका में पन्नू की हत्या के मामले में निखिल गुप्ता का नाम सामने आया था.

अमेरिकी कोर्ट में पेश दस्तावेजों के मुताबिक़, निखिल गुप्ता को भारत सरकार के एक कर्मचारी से निर्देश मिले थे. मीडिया रिपोर्ट्स में निखिल गुप्ता की उम्र 52 साल बताई जा रही है.

कथित साज़िश में किस अलगाववादी नेता की हत्या की जानी थी, उसकी जानकारी अभियोजन पक्ष ने नहीं दी है, लेकिन भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, निशाने पर वकील और सिख अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू थे.

नवंबर के अंत में भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वो मामले को गंभीरता से ले रहा है और इस अभियोग में किसी भारतीय अधिकारी का नाम नहीं है.

भारत के विदेश मंत्रालय प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था, “हम पहले ही बता चुके हैं कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग पर वार्ता के दौरान, अमेरिकी पक्ष ने कुछ इनपुट साझा किए थे जो संगठित अपराधियों, आतंकवादियों, हथियारों के कारोबारियों और अन्य के नेक्सस के बारे में थे. भारत ने इसकी जांच के लिए विशेष जांच समिति गठित की है.”

अमेरिका ने जिन निखिल गुप्ता को अभियुक्त बनाया, उन्होंने कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी.

निखिल गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह भारत सरकार से इस मामले में दखल देने को कहे.

निखिल गुप्ता जून महीने से ही चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में हिरासत में हैं.

गुरपतवंत सिंह पन्नू कौन हैं?
अमेरिका में रहने वाले गुरपतवंत सिंह पन्नू ‘सिख फ़ॉर जस्टिस’ के संस्थापक और वकील हैं.

पंजाब को ‘आज़ाद’ कराने और खालिस्तान के बैनर तले पंजाबियों को आत्मनिर्णय का अधिकार दिलाने के लिए पन्नू ने ‘सिख फ़ॉर जस्टिस’ ने ‘रेफ़रेंडम-2020’ अभियान शुरू किया था.

इसके तहत पंजाब और दुनियाभर में रहने वाले सिखों को ऑनलाइन वोट करने के लिए कहा गया था, लेकिन वोटिंग से पहले ही भारत सरकार ने 40 वेबसाइटों को सिख फ़ॉर जस्टिस और खालिस्तान समर्थक बताकर बैन कर दिया था.

यह संगठन ख़ुद को मानवाधिकार संगठन बताता है, लेकिन भारत इसे ‘आतंकवादी’ संगठन घोषित कर चुका है.

पन्नू की ओर से आए धमकी वाले वीडियो और फ़ोन कॉल्स को लेकर भारत की अलग-अलग क़ानूनी एजेंसियों के पास मामले दर्ज हैं. उन्हें जुलाई 2020 में भारत ने आतंकवादी घोषित किया था.

बीबीसी एशियन नेटवर्क से गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कहा, “खालिस्तान रेफ़रेंडम कराने की नियति अगर मौत है, तो वे इसके लिए तैयार हैं.”

भारत और अमेरिका की बढ़ती क़रीबियां
बीते कुछ सालों में अमेरिका और भारत के बीच क़रीबियां बढ़ी हैं.

जून महीने में पीएम मोदी अमेरिका के औपचारिक दौरे पर गए थे. तब व्हाइट हाउस में बाइडन ने पीएम मोदी के लिए डिनर भी आयोजित किया था.

इसके बाद जी-20 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जब बाइडन भारत आए थे, तब दोनों नेताओं ने सम्मेलन से इतर भी मुलाक़ात की थी.

अमेरिका भारत को चीन से मुकाबला करने वाले देश के तौर पर देखता है. अमेरिका और भारत दोनों ही देशों की चीन से दूरियां जगजाहिर हैं.

वहीं अमेरिका और भारत के बीच बीते सालों में व्यापार भी काफी तेज़ी से बढ़ी है.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने जून 2023 में कहा था- पिछले एक दशक में दोनों देशों के बीच व्यापार दोगुना होकर 191 अरब डॉलर से ज़्यादा हो गया है.

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है.