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अमेरिका, यूरोपीय संघ, यूके मिलकर यूक्रेन में रूस से भयानक युद्ध लड़ रहे हैं : रूस और पश्चिम के बीच शुरू हो सकता है सीधा टकराव : रिपोर्ट

रूस और पश्चिम के बीच सीधा टकराव शुरू हो सकता है

रूस के राष्ट्रपति ने यूक्रेन से अलग होने वाले चार इलाक़ों को हमेशा के लिए रूस का हिस्सा बना लेने संबंधी फ़रमान पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतीन ने बुधवार को यूक्रेन के लगभग 18 प्रतिशत भाग को रूस में शामिल करने संबंधी औपचारिक फ़रमान पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

चारों इलाक़ों में पहले ही जनमत संग्रह हो चुका है और रूस के अनुसार 98 प्रतिशत लोगों ने रूस में विलय का समर्थन किया है।

क्रेमलिन हाउस ने कहा कि जिन इलाक़ों के रूस में विलय पर रूसी राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर किए हैं वे हमेशा के लिए रूस का भाग बन गए हैं।

इस बीच रूस और यूक्रेन की सेनाएं अलग अलग मोर्चों पर अपनी अपनी प्रगति के दावे कर रही हैं।

रूस का कहना है कि अमरीका और नैटो की कोशिश है कि यूक्रेन में होने वाली लड़ाई रूस की सीमा के भीतर पहुंच जाए।

दूसरी ओर अमरीका में रूस के राजदूत एनातोली आंतोनोफ़ ने कहा कि यूक्रेन के लिए वाशिंग्टन का सामरिक सहायता भेजना रूस के हितों के लिए ख़तरा पैदा करने के समान है और इस बात की आशंका है कि रूस और पश्चिम के बीच सीधा टकराव भी शुरू हो सकता है।

ज़ेलेंस्की क्यों कर रहे हैं सऊदी अरब के प्रिंस सलमान का शुक्रिया

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के यूक्रेन के कुछ राज्यों में जनमत संग्रह करा कर रूस में मिलाए जाने के दावे को भद्दा पीआर स्टंट क़रार दिया है.

ज़ेलेंस्की ने अरब न्यूज़ को कीएव से दिए गए एक्सक्लूसिव जूम इंटरव्यू में कहा, “मुझे नहीं मालूम है कि वे किस तरह के जनमत संग्रह की बात कर रहे हैं. यूक्रेन में इस तरह के जनमत संग्रह की व्यवस्था नहीं है. इसे कराने संबंधी कोई क़ानून भी नहीं है.”

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बीते शुक्रवार को एक हस्ताक्षर समारोह के दौरान औपचारिक रूप से यूक्रेन के चार इलाकों का अपने देश में विलय करने का एलान किया था. रूस का दावा है कि यह फ़ैसला इन चार इलाकों में रूस के अपनी तरह के जनमत संग्रह के नतीजों के बाद लिया है.

यूक्रेन के पूर्व के लुहांस्क, दोनेत्स्क और दक्षिण के ज़ापोरिज़्ज़िया, खेरसोन में जनमत संग्रह कराए जाने का रूस ने दावा किया है. रूस समर्थित अधिकारियों ने दावा किया था कि पांच दिनों तक चले इस जनमत संग्रह को लोगों का बड़ा समर्थन मिला है.

हालांकि यूक्रेन समेत पश्चिम के देश इस ‘जनमत संग्रह को दिखावा’ बताते हुए इसे यूक्रेन की ज़मीन हड़पने का एक बहाना बता रहे हैं.

ज़ेलेंस्की ने दावों पर उठाए सवाल

जेलेंस्की ने रूसी दावे पर सवाल उठाते हुए अरब न्यूज़ से कहा है, “वे जिस बात की घोषणा कर रहे हैं, वह जो वे कर रहे हैं, उससे अलग है. वे कहते हैं कि उन्होंने हमारे देश, हमारे इलाक़े पर कब्ज़ा कर लिया है. लेकिन युद्ध के आठ महीने बीत चुके हैं और मैं आपसे कह सकता हूं कि हमने एक और शहर को वापस जीता है. कुछ ही दिन पहले दोनेत्स्क के लेयमन शहर को रूस ने पूरी तरह से अपने कब्ज़े में होने का दावा किया था.”

जेलेंस्की ने इस इंटरव्यू में कहा है, “मैं रूस और उसके नागरिकों को यह भरोसा दिलाना चाहता हूं कि हमारी दिलचस्पी उनके क्षेत्र में नहीं है. हमारी दिलचस्पी हमारे अपने क्षेत्र को लेकर है और यह क्षेत्र 1991 में अंतरराष्ट्रीय तौर पर मान्य हमारी सीमा है.”

यूक्रेन और रूस में युद्ध के बाद दुनिया भर में पेट्रोलियम ईंधन और गैस की क़ीमतें बढ़ी है और इसकी आपूर्ति भी बाधित हुई है. इस दौरान यूक्रेन से करीब 60 लाख लोग देश छोड़ने के लिए मज़बूर हुए हैं. लेकिन ज़ेलेंस्की इस युद्ध में अपने देश की जनता को विजयी मान रहे हैं.

उन्होंने अरब न्यूज़ से कहा, “मुझे लगता है कि यह दुनिया के किसी भी देश के लिए बड़ी जीत है. लोग आपसी कलह और पुरानी कड़वाहट को पीछे छोड़कर एकजुट हों, यह महत्वपूर्ण है. इतना ही नहीं हमलोग दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना का मुक़ाबला कर रहे हैं. हमने दिखाया है कि एकता में शक्ति है. तीसरी अहम बात यह है कि हम यूरोप और पूरी दुनिया को एकजुट करने में कायमाब रहे हैं.”

अरब न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में ज़ेलेंस्की ने एक बार फिर से दोहराया है कि वे व्लादिमीर पुतिन से कोई बातचीत नहीं करेंगे. हालांकि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बीच मध्यस्थता की पहल भी हो रही है.

पिछले ही महीने रूस और यूक्रेन के बीच कैदियों की अदला बदली कराने में सऊदी अरब की उल्लेखनीय राजनयिक भूमिका रही है. सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने रूस के साथ बातचीत करके करीब 300 कैदियों को रिहा कराया है.

ज़ेलेस्की ने प्रिंस सलमान को शुक्रिया कहा

समाचार एजेंसी रायटर्स के मुताबिक रूस ने यूक्रेन के 215 लोगों को रिहा किया जबकि यूक्रेन ने 55 रूसी लोगों को रिहा किया. इसके अलावा रूस की जेल से 10 दूसरे देशों के लोग भी रिहा हुए. इनमें पांच ब्रिटिश और दो अमेरिकी नागरिक शामिल हैं. इनके अलावा क्रोएशिया, स्वीडन और मोरक्को के एक-एक नागरिक थे.

व्लादिमिर ज़ेलेंस्की ने इसके लिए सऊदी अरब का आभार जताया है. उन्होंने अरब न्यूज़ से कहा, “मैं सऊदी अरब को शुक्रिया कहना चाहूंगा. प्रिंस के रूस के साथ जैसे रिश्ते हैं, उसे देखते हुए कामयाबी मिलने की संभावना थी और मैं इस नतीजे के लिए उनका बहुत आभारी हूं. “

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि कैदियों की रिहाई उस मुहिम का ही हिस्सा है जो रूस और यूक्रेन के संकट को देखते हुए प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने शुरू की थी.

जेलेंस्की ने अरब न्यूज़ से यह भी कहा कि वे किसी भी प्रस्ताव के लिए तैयार हैं, लेकिन वह प्रस्ताव परिणाम देने वाला हो. जेलेंस्की यह भी मानते हैं कि युद्ध से हुए नुकसान के बाद यूक्रेन में नए सिरे से आधारभूत ढांचों को खड़ा करना होगा, यह एक तरह से खाड़ी देशों की कंपनियों के लिए भी अवसर जैसा होगा.

रूस-यूक्रेन युद्ध: अमेरिकी प्रतिबंधों से रूस की अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान हो रहा है?

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेन्स्की ने कहा है कि लाइमन से रूसी सैनिक अब पूरी तरह बाहर जा चुके हैं. उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सेना रूसी कब्ज़े में मौजूद यूक्रेन के इलाक़ों को पूरी तरह छुड़ा लेगी.

लाइमन शहर पर यूक्रेनी सेना के दोबरा कब्ज़े को अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉएड ऑस्टिन ने महत्वपूर्ण बताया है और कहा है कि यूक्रेनी सेना ‘बढ़िया काम’ कर रही है.

इस शहर का इस्तेमाल रूसी सेना ट्रांसपोर्ट केंद्र और संचालन के लिए कर रही थी. लेकिन इसी सप्ताह शनिवार को रूसी सेना को यहां से बाहर जाना पड़ा है.

लाइमन दोनोत्स्क में है और दोनेत्स्क उन चार इलाक़ों में से एक है जिन्हें शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आधिकारिक तौर पर रूस में शामिल कर लिया है.

इन दो के अलावा खेरसोन और ज़ापोरिज़िया के इलाक़ों को भी आधिकारिक तौर पर पुतिन ने रूस में शामिल कर लिया है. उन्होंने कहा है कि ये लोगों की राय है जिसका सम्मान किया जाना चाहिए. रूस ने कुछ दिनों पहले इन इलाक़ों में जनमत संग्रह कराए थे जिसकी यूक्रेन और पश्चिमी मुल्कों ने आलोचना की थी.

यूक्रेन के चार इलाक़ों को रूस में शामिल करने को लेकर पुतिन के समझौतों पर हस्ताक्षर करने के बाद अमेरिका ने एक बार फिर रूस पर कड़े प्रतिबंधों की घोषणा की है.

वहीं रूस युद्ध के लिए ज़रूरी धन की व्यवस्था न कर सके, इस इरादे से यूरोपीय संघ भी रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है.

क्या होते हैं प्रतिबंध?

आक्रामक रवैया अपनाने पर या फिर उसके अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन करने या करने से रोकने के लिए एक मुल्क दूसरे मुल्क पर दंडस्वरूप प्रतिबंध लगाते हैं. ये प्रतिबंध आर्थिक या फिर व्यापार से जुड़े हो सकते हैं.

ये वो कड़े कदम हैं जो कोई देश उठा सकता है, ये एक तरह से जंग लड़ने जैसा ही है.

अमेरिका और यूरोपीय संघ के ताज़ा कदम क्या हैं?

यूक्रेन के चार इलाक़ों में जनमत संग्रह कराने के लिए अमेरिका रूसी संसद के 278 सदस्यों पर प्रतिबंध लगाए हैं. वो रूस की डिफेन्स इंडस्ट्री से जुड़े 14 लोगों के ख़िलाफ़ भी प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है.

अमेरिका का कहना है कि वो रूस के बाहर ऐसे संगठनों को भी निशाना बनाएगा जो उसे सैन्य मदद दे रहे हैं या यूक्रेनी हिस्सों पर कब्ज़ा करने में उसकी मदद कर रहे हैं.

यूरोपीय कमिशन ने भी नए प्रतिबंधों की घोषणा की है और रूस से होने वाले आयात पर और प्रतिबंधों का प्रस्ताव दिया है. कमिशन हाई-टेक उत्पादों के निर्यात पर भी रोक लगाने की योजना बना रहा है.

अब तक रूस पर क्या-क्या प्रतिबंध लगाए गए हैं?

पश्चिमी मुल्क रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उस पर दबाव बना रहे हैं.

अमेरिका ने रूस को अमेरिकी बैंकों में रखे विदेशी मुद्रा से कर्ज़ का भुगतान करने से रोक दिया है.

जाने-माने रूसी बैंकों को दुनियाभर में पैसों के लेनदेन के लिए इस्तेमाल होने वाली इंटरनेशनल फ़ाइनेन्शियल मेसेजिंग सिस्टम स्विफ्ट व्यवस्था से हटा दिया गया है. इस कारण रूस को दूसरे देशों से तेल और गैस के निर्यात से मिलने वाले भुगतान मिलने में देरी हो रही है.

ब्रिटेन ने बड़े रूसी बैंकों को यूके की आर्थिक व्यवस्था से बाहर कर दिया है. उसने रूसी बैंकों की संपत्ति फ्रीज़ कर दी है, रूसी कंपनियों के कर्ज़ लेने पर पाबंदी लगाई है और यूके की बैकों में रूसी नागरिकों के पैसा जमा करने को लेकर भी पाबंदी लगाई है.

तेल और गैस पर प्रतिबंध

इस साल दिसंबर से यूरोपीय संघ समंदर के रास्ते होने वाले रूसी तेल के आयात पर रोक लगाएगा.

फरवरी 2023 तक रूस से होने वाले रीफाइन्ड तेल उत्पादों पर यूरोपीय संघ रोक लगाएगा. यूरोपीय संघ ने रूसी कोयले का आयात रोक दिया है.

अमेरिका ने रूस से होने वाले सभी तेल और गैस के आयात पर रोक लगा दी है.

साल 2022 के अंत तक यूके रूसी तेल का इस्तेमाल बंद करेगा. यूके ने रूस से होने वाले गैस के आयात को रोक दिया है.

जर्मनी ने रूस से गैस के आयात के लिए बनी नॉर्डस्ट्रीम पाइपलाइन को खोलने की योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है.

इस साल दिसंबर से यूरोपीय संघ और जी7 रूस से तेल खरीदने वालों के लिए तेल की कीमत को भी सीमित करना चाहते हैं.

वो रूस से कच्चा तेल आयात करने वालों से कह रहे हैं कि अगर तय कीमत से अधिक का भुगतान किया गया तो पश्चिमी इन्श्योरेंस कंपनी तेल शिपमेन्ट को कवर नहीं करेंगे.

यूरोपी संघ ने अब तक रूस से आयात होने वाले गैस पर प्रतिबंध नहीं लगाए हैं क्योंकि इस मामले में यूरोपीय देश अपनी ज़रूरत के 40 फीसदी की आपूर्ति के लिए रूस पर निर्भर हैं.

रूसी नागरिकों पर प्रतिबंध

अमेरिका, यूरोपीय संघ, यूके और दूसरे कई मुल्कों ने क़रीब एक हज़ार रूसी नागरिकों और व्यवसायों पर प्रतिबंध लगाए हैं, इसमें रूस के तथाकथित धनी लोग यानी ओलिगार्क भी शामिल हैं.

माना जाता है कि ये वो धनी व्यवसायी हैं जो रूसी राष्ट्रपति के क़रीब हैं, जैसे कि चेल्सी फ़ुटबॉल टीम के पूर्व मालिक रोमन अब्रामोविच का नाम शामिल है.

अमेरिका, यूरोपीय संघ, यूके और कनाडा ने देश में मौजूद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और विदेश मंत्री सर्गेई लैवरोव की संपत्ति फ्रीज़ कर दी है.

जिन रूसी नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं उनसे जुड़े सुपरयॉट्स को भी ज़ब्त कर लिया गया है.

न्यूयॉर्क में एल्युमिनियम व्यापार से जुड़े जानेमाने रूसी कारोबारी ओलेग दरीपास्का पर अमेरिकी प्रतिबंधों पर उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है.

प्रतिबंधों के तहत यूके ने ‘गोल्डन वीज़ा’ जारी करना बंद कर दिया है. इस व्यवस्था के तहत धनी रूसी नागरिकों को ब्रिटेन में रहने के अधिकार आसानी से मिल जाते थे.

और क्या-क्या प्रतिबंध लगाए गए हैं?

यूके, अमेरिका और यूरोपीय संघ ने ऐसे सामानों के निर्यात पर रोक लगाई है जिनका आम लोग और सेना दोनों ही इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे गाड़ियों के पुर्ज़े.

यूके, अमेरिका, यूरोपीय संघ और कनाडा के हावईक्षेत्र से सभी रूसी उड़ानों पर पूरी तरह रोक लगाई गई है.

रूस से होने वाले सोने के आयात पर रोक लगाई गई है. रूस को होने वाले लग्ज़री सामान के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है.

यूके ने वोद्का (एक तरह की शराब) जैसे कुछ सामान के आयात पर 35 फीसदी का आयात कर लगाया है.

कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने या तो रूस के साथ व्यापार बंद कर दिया है या फिर पूरी तरह से रूसी बाज़ार से बाहर निकल गए हैं.

क्या रूस पर पड़ रहा प्रतिबंधों का असर?

तेल और गैस की बढ़ती दरों के कारण युद्ध के लिए पैसों की व्यवस्था करने में रूस को मदद मिल रही है.

रिसर्च संस्था आर्गुस मीडिया में प्रमुख अर्थशास्त्री डेविड फ़ेयफ़ कहते हैं कि बीते एक साल में रूस को कच्चे तेल से होने वाली आय में 41 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी.

वो कहते हैं, “रूस से होने वाले निर्यात का 40 फीसदी तेल है और इस कारण युद्ध के लिए पैसों की व्यवस्था करने में ये अहम है.”

हालांकि डेविड फ़ेयफ़ कहते हैं कि प्रतिबंधों का असर अलग तरीके से रूस पर पड़ रहा है. वो कहते हैं, “हाई-टेक उपकरणों तक रूस की पहुंच रोकने से रूस कमज़ोर हो रहा है, ख़ासकर ऐसे उपकरण जिसकी मदद सेना को हो सकती है.”

क्या है रूस की प्रतिक्रिया?

रूस ने देश से होने वाले 200 उत्पादों के निर्यात पर रोक लगाई है. इसमें टेलिकॉम, मेडिकल, गाड़ियां, खेती का सामान, बिजली के उपकरण और लकड़ी के उत्पाद शामिल हैं.

रूस ने सरकारी बॉन्ड्स रखने वाले विदेशी धारकों को ब्याज का भुगतान रोक दिया है, साथ ही रूसी कंपनियों के विदेश में मौजूद शेयरहोल्डरों को भुगतान करने पर भी रोक लगाई है.

उसने उन विदेशी निवेशकों पर रोक लगा दी है जिनके पास अरबों डॉलर मूल्य का रूसी निवेश है ताकि वो उन्हें बेच न सकें.