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अरब डायरी : पाप का घड़ा फुटता ज़रूर है : गृहयुद्ध से भयभीत हैं अधिकतर इस्राईली : इस्राईल के हमले में कई फ़िलिस्तीनी कमान्डर शहीद!

गृहयुद्ध से भयभीत हैं अधिकतर ज़ायोनी

ज़ायोनी शासन में जारी संकट के दृष्टिगत वहां किे अधिकार लोग अब गृहयुद्ध को लेकर बहुत चिंतित हैं।

एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि अधिकांश इस्राईली यह मानते हैं कि वहां की वर्तमान स्थति के दृष्टिगत अब केवल गृहयुद्ध का विकल्प ही उनके पास बाक़ी बचा है।

अलमयादीन की रिपोर्ट के अनुसार ज़ायोनी शासन के चैनेल-11 की ओर से कराए गए सर्वेक्षण बताते हैं कि वहां के 58 प्रतिशत से अधिक लोग यह मान रहे हैं कि कभी भी गृहयुद्ध आरंभ हो सकता है या फिर हिंसक झड़पों का क्रम भी शुरू हो सकता है।

यह सर्वेक्षण हालिया दिनों में इस्राईल में नेतनयाहू विरोधी प्रदर्शनों में तेज़ी आने के बाद कराए गए हैं। वहां पर नेतनयाहू के मंत्रीमण्डल को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं जिसमें बहुत बड़ी संख्या में लोग विभिन्न नगरो। में प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बीच बहुत से राजनैतिक टीकाकार इस बात पर सहमत दिखाई दे रहे हैं कि इस्राईल आज एक बहुत ही गंभीर राजनीतिक गतिरोध का शिकार है।

इस बारे में ज़ायोनी शासन के प्रमुख इस्हाक़ हर्त्सविग का कहना है कि इस समय इस्राईल बहुत ही बुरे हालात से गुज़र रहा है। उन्होंने कहा कि अशांति या उपद्रव हमें तोड़कर रख देगा। याद रहे कि नेतनयाहू के मंत्रीमण्डल की ओर से न्यायिक प्रणाली में सुधार को लेकर लोग उनका खुलकर विरोध कर रहे हैं। कुछ लोगो का तो यह भी मानना है कि न्याय प्रणाली में सुधार करके नेतनयाहू स्वयं को भ्रष्टाचार, रिश्वत और अन्य आरोपों से बचाना चाहते हैं जो उनके सत्ताकाल में उनपर लग चुके हैं।

इस्राईल का फ़िलिस्तीनियों पर बड़ा हमला, कई कमान्डर शहीद

इस्राईली सैनिकों से झड़पों में शहीद होने वाले फ़िलिस्तीनियों में 1 क़स्साम ब्रिगेड और जेहादे इस्लामी के एक कमान्डर भी शामिल हैं।

फ़िलिस्तीनी मीडिया सूत्रों की रिपोर्ट के अनुसार अवैध ज़ायोनी शासन के अवैध अधिकृत जेनीन क्षेत्र पर ताज़ा हमलों और फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधकर्ता गुटों की ओर से सशस्त्र कार्रवाइयों में कम से कम 4 फ़िलिस्तीनी शहीद और 20 अन्य के घायल होने की सूचना है।

शहीद होने वाले संघर्षकर्ताओं के नाम यूसुफ़ शरीम, नेज़ाल ख़ाज़िम, उमर अवादीन और लोई ज़ग़ीर बताए जा रहे हैं जिनमें से एक हमास की सैन्य शाख़ा क़स्साम ब्रिगेड और एक जेहादे इस्लामी के कमान्डर हैं।

फ़िलिस्तीनी स्थानीय सूत्रों के अनुसार इस्राईली सैनिक जेनीन में अपनी आतंकी कार्रवाइयों के दौरान फ़िलिस्तीनी संघर्षकर्ताओं के घेरे में आ गये और उन्हें एक दुकान के अंदर छुपना पड़ा और उन्हें वहां से निकालने के लिए इस्राईली सेना को बक्तरबंद गाड़ियों और दूसरे भारी सैन्य वाहनों का प्रयोग करना पड़ा।

इस्राईल ने फ़िलिस्तीनी संघर्षकर्ता गुटों की जवाबी कार्रवाई की डर से ग़ज़्ज़ा में आयरन डोम सिस्टम को सक्रिय कर दिया है

“इस्राईल मकड़ी के जाले से भी कमज़ोर” हसन नसरुल्लाह का दृष्टिकोण व्यवहारिक हो रहा हैः इस्राईली संचार माध्यम

जायोनी संचार माध्यमों ने स्वीकार किया कि इस्राईल के बारे में दक्षिणी लेबनान के इस्लामी आंदोलन हिज्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह का यह दृष्टिकोण व्यवहारिक हो रहा है कि इस्राईल अंदर से खोखला है।

समाचार एजेन्सी इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार जायोनी संचार माध्यमों ने रिपोर्ट दी है कि इस्राईल के अंदर जो कुछ हो रहा है उससे हसन नस्रुल्लाह बहुत आश्वस्त हैं क्योंकि “इस्राईल मकड़ी के जाले से भी कमज़ोर” दृष्टिकोण उनकी नज़रों के सामने व्यवहारिक हो रहा है।

ज्ञात रहे कि इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह ने 25 मई 2000 को अपने एक भाषण में कहा था कि इस्राईल मकड़ी के जाले से भी कमज़ोर है और उनकी यह बात उस समय से लेकर आज तक जायोनियों को अच्छी तरह याद है।

बहुत से जानकार हल्कों का मानना है कि इस्राईल के अंदर से ही हालत इस प्रकार के हो जायेंगे जिससे इस्राईल का अंत हो जायेगा और उसे तबाह करने के लिए किसी बाहरी शक्ति की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। ये हल्के दूसरे देशों व क्षेत्रों से इस्राईल लाकर फिलिस्तीनियों की मातृभूमि पर बसाये गये जायोनियों व यहूदियों को उल्टे पलायन को इसी परिप्रेक्ष्य में देख रहे हैं।

नोटः ये व्यक्तिगत विचार हैं। इससे तीसरी जंग हिंदी का सहमत होना ज़रूरी नहीं है।

अमरीका किसी भी हाल में दाइश का विनाश नहीं चाहताः अब्दुल हादी

इराक़ के अलफ़त्ह गठबंधन के एक नेता ने कहा है कि अमरीका नहीं चाहता है कि आतंकवादी गुट दाइश को पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाए।

उदै अब्दुलहादी ने सोमवार को कहा कि यह बात किसी से भी ठकी छिपी नहीं है कि दाइश और अलक़ाएदा जैसे अन्तर्राष्ट्रीय आतंकी गुटों के बनाने में अमरीका की गुप्तचर सेवाओं की भूमिका रही है। इस बात को कुछ अमरीकी नेताओं ने स्वीकार भी किया है।

उनका कहना था कि अमरीका की इच्छा नहीं है कि इराक़ से दाइश का सफाया हो जाए।इसीलिए वह सीरिया के अलहूल में मौजूद विभिन्न नागरिकता वाले आतंकी तत्वों का समर्थन करता है। यह काम इसलिए किया जा रहा है ताकि मौक़ा पड़ने पर अपने हितों को साधने और क्षेत्र को अशांत करने के लिए इन आतंकी तत्वों का प्रयोग किया जा सके।

अलफ़त्ह गठबंधन के नेता उदै अब्दुलहादी ने बताया कि अमरीका तीन प्रकार से दाइश का समर्थन करता है। एक तो यह कि छिपकर उसका आर्थिक समर्थन करता रहता है। दूसरे यह कि दाइश के आतंकियों के अधिकार में वह उनकी ज़रूरत की जानकारियां पहुंचवा देता है। अमरीका द्वारा आतंकवी गुट दाइश की सहायता करने का तीसरा रास्ता यह है कि वह इन आतंकियों को सीरिया से इराक़ स्थानांतरित करता रहता है।

उनका कहना था कि इन बातों से पता चलता है कि अमरीका कभी भी इराक़ में शांति एवं स्थिरता का इच्छुक नहीं है। इसी के साथ आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष का अमरीकी दावा पूरी तरह से निराधार है।

लगातार 11वें हफ़्ते इस्राईल के 100 से भी ज़्यादा शहरों में विरोध प्रदर्शन

ज़ायोनी प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतनयाहू के प्रस्तावित तथाकथित न्यायिक सुधारों की धज्जियां उड़ाने के लिए दसियों हज़ार लोगों ने लगातार 11वें हफ़्ते इस्राईल के 100 से भी ज़्यादा शहरों और क़स्बों में प्रदर्शन किए हैं।

इस्राईली मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, शनिवार को यह प्रदर्शन तेल-अवीव, बैतुल मुक़द्दस, अशदोद और बीरशेबा समेत अवैध अधिकृत इलाक़ों के दर्जनों शहरों में आयोजित हुए।

तेल-अवीव में प्रदर्शनकारी शहर के केन्द्र में डिज़ेंगॉफ़ स्क्वायर पर एकत्रित हुए और उन्होंने वहां सड़कों को जाम कर दिया।

तेल-अवीव से उत्तर में स्थित हेर्ज़लिया शहर में एक 57 वर्षीय व्यक्ति ने अपनी कार प्रदर्शनकारियों के एक समूह पर चढ़ाने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया।

कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों की भी ख़बर है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दाग़े और पानी की बोछार की।

ज़ायोनी शासन के विपक्षी नेताओं का सरकार पर आरोप है कि वह न्यायपालिका को कमज़ोर करने के लिए तथाकथित न्यायिक सुधारों के लिए बिल ला रही है।

पाप का घड़ा फुटता ज़रूर है

दुनिया में अनगिनत घटनायें हो चुकीं और इस समय भी हो रही हैं पर इन घटनाओं से कुछ ही लोग सीख ले पाते हैं।

इस समय पश्चिम एशिया या मध्यपूर्व का एक महत्वपूर्ण परिवर्तन इस्राईल में होने वाला परिवर्तन है। हालिया कई दिनों से जायोनी और यहूदी, नेतनयाहू के खिलाफ सड़कों पर उतर आये हैं जबकि बिनयामिन नेतनयाहू एक अतिवादी जायोनी हैं। इस समय इस्राईल के जो हालात हैं वे अपने अंदर बहुत सारे संदेश लिए हुए हैं। उसका एक संदेश यह है कि इस्राईल दिन- प्रतिदिन बड़ी तेज़ी से अपने अंत के निकट होता जा रहा है और यह वह बिन्दु है जिसकी ओर जानकार हल्के और खुद जायोनी संचार माध्यम संकेत कर रहे हैं।

जायोनी संचार माध्यमों ने अभी गत रात्रि ही स्वीकार किया है कि इस्राईल के बारे में दक्षिणी लेबनान के इस्लामी आंदोलन हिज्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह का यह दृष्टिकोण व्यवहारिक हो रहा है कि इस्राईल अंदर से खोखला और वह मकड़ी के जाले से भी कमज़ोर है। जिस वक्त सैयद हसन नसरुल्लाह ने यह बात कही थी उस समय बहुत कम लोगों इस बात पर विशेषरूप से ध्यान दिया होगा पर आज जायोनी हल्के और संचार माध्यम खुद ही उनकी बात को याद दिला रहे हैं।

पूरा इतिहास गवाह है कि जायोनियों व यहूदियों की कोई भी सरकार 80 साल से अधिक न चल पायी। इस बात को दृष्टि में रखते हुए बहुत से जायोनियों और यहूदियों का विश्वास है कि इस्राईल की उम्र भी 80 साल से अधिक नहीं होगी। बहुत से जानकार हल्कों का मानना है कि इस्राईल के अंदर से ही हालत इस प्रकार के हो जायेंगे जिससे इस्राईल का अंत हो जायेगा और उसे तबाह करने के लिए किसी बाहरी शक्ति की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। ये हल्के दूसरे देशों व क्षेत्रों से इस्राईल लाकर फिलिस्तीनियों की मातृभूमि पर बसा दिये गये जायोनियों व यहूदियों को उल्टे पलायन को इसी परिप्रेक्ष्य में देख रहे हैं।

सवाल यह पैदा होता है कि इस्राईल इतनी तेज़ी से अपने अंत से निकट क्यों हो रहा है?जानकार हल्कों का मानना है कि इसके बहुत से कारण हैं उनमें सबसे महत्वपूर्ण कारण इस्राईल का घोर अत्याचार है। 76 साल पहले अवैध जायोनी शासन की बुनियाद मज़लूम फिलिस्तीनियो के खून पर रखी गयी तब से लेकर आज तक इस अवैध शासन के अत्याचार अनवरत जारी हैं और इन वर्षों में एक लाख से अधिक फिलिस्तीनी शहीद और कई लाख घायल व बेघर हो गये। चालिस लाख से अधिक फिलिस्तीनियों को इस्राईल ने ताकत के बल उन्हें उनकी मातृभूमि से निष्कासित कर रखा है और उन्हें स्वदेश वापसी की अनुमति भी नहीं दे रहा है।

रोचक बात यह है कि इस्राईल के समस्त अपराधों पर मानवाधिकार की रक्षा का दम भरने वाले अर्थपूर्ण चुप्पी साधे रहते हैं और मानवाधिकार की रक्षा का राग अलापने वाले देश व संगठन कभी भी नहीं कहते हैं कि चालिस लाख से अधिक निर्दोष फिलिस्तीनियों को स्वदेश आने की अनुमती देनी चाहिये और अगर एसा नहीं किया जाता है तो चालिस लाख से लोगों के अधिकारों की अनदेखी व हनन है।

जब से जायोनी शासन की अवैध बुनियाद रखी गयी है तब से उसने जहां एक लाख से अधिक फिलिस्तीनियों को शहीद किया है उनमें बहुत सी महिलायें और बच्चे भी हैं। इसी प्रकार इन वर्षों में इस्राईल ने फिलिस्तीनियों के हज़ारों मकानों को ध्वस्त कर दिया, उनके खेतों और बागों को तबाह कर दिया और उनके बहुत से पेड़ों को काट दिया। उनकी ज़मीनों और मकानों पर कब्ज़ा कर लिया।

सारांश है कि इस्राईल फिलिस्तीनियों पर जो भी अत्याचार कर सकता था किया और इसमें उसने किसी प्रकार के संकोच से काम नहीं लिया और उसका नतीजा यह निकला कि पाप का घड़ा भर गया है और जायोनी, दुनिया से अत्याचार और सरकारी आतंकवाद पर आधारित शासन के अंत की प्रतीक्षा कर रहे हैं।