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अलक़स्सा ब्रिगेड ने वह कर दिखाया जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता : तेलअवीव में मचा हाहाकार, एक साथ 60 आतंकी इस्राईली सैनिक हुए ढेर : रिपोर्ट

फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास की सैन्य शाखा अलक़स्सा ब्रिगेड के जियालों ने वह कर दिखाया है कि जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था। हज़ारों बेगुनाह फ़िलिस्तीनी विशेषकर मासूम बच्चों के हत्यारे आतंकी इस्राईली सैनिकों को ऐसी मार मारी है कि जिसके दर्द की चीख़ न केवल तेलअवीव बल्कि व्हाइट हाउस में बैठे उसके आक़ाओं के भी मुंह से निकल आई है।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास की सैन्य शाखा अलकस़्साम ब्रिगेड ने कम से कम 60 आतंकी इस्राईली सैनिकों को ढेर कर दिया है। क़स्साम ब्रेगेड ने यह घोषणा की है कि आज रविवार सुबह तड़के में प्रतिरोध के जियालों ने ग़ज़्ज़ा के पूर्व में स्थित “जोहरुद्दीक” क्षेत्र में मौजूद आतंकी इस्राईली सैनिकों की एक टुकड़ी पर घात लगाकर ऐसा हमला किया कि जिसके बाद ज़ायोनी सैनिकों के केवल चारों ओर बिखरे हुए शव ही दिखाई दे रहे थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जोहरुद्दीक इलाक़े में एकत्रित आतंकी इस्राईली सैनिक ग़ज़्ज़ा के अवासीय इलाक़ों पर एक बड़े हमले की तैयारी कर रहे थे, जिसकी जानकारी अलक़स्साम ब्रिगेड के जियालों के हाथ लग गई और उन्होंने ज़ायोनी सैनिकों को ऐसा सबक़ सिखाया कि तेलअवीव से लेकर वॉशिंग्टन तक हाहाकार मच गया है।

अलक़स्साम ब्रिगेड ने अपने बयान में कहा है कि आतंकी इस्राईली सैनिकों के ख़िलाफ़ किए गए इस कामयाब ऑप्रेशन को केवल एक ही जियाले ने अंजाम दिया और वह पूरी तरह सुरक्षित वापस भी लौट आया। सामने आई जानकारी में जो बात सामने आई है उसके मुताबिक़, जिस स्थान पर आतंकी इस्राईली सैनिक एकत्रित थे, वहां प्रतिरोध के एक जियाले ने बड़ी ही सूझबूझ के साथ चारों ओर विस्फोटक पदार्थ लगा दिया और उसके वापस आते ही उस स्थान पर ऐसा धमाका हुआ कि दर्जनों आतंकी इस्राईली सैनिक हवा में उड़ते हुए दिखाई दिए। ग़ौरतलब है कि ग़ज़्ज़ा पर अवैध आतंकी ज़ायोनी शासन के बर्बर हमलों के जवाब में फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध बल इस शासन के सैन्य ठिकानों को लगातार निशाना बनाने में सफलता प्राप्त कर रहा है।

Clash Report
@clashreport

Israeli internal intelligence Shin Bet head Ronen Bar:

We will eliminate senior Hamas officials in Qatar and Türkiye as well. This is the Munich of our generation.

ग़ज़्ज़ा में इस्राईल की क्रूरता हावी है या फ़िलिस्तीनियों के हौसले बुलंद हैं?

 

फ़िलिस्तीन से जुड़ी ताज़ा ख़बरों में ग़ज़्ज़ा पट्टी में फॉस्फोरस बमों से जेबालिया शिविर पर बमबारी और अमेरिका की ओर से ज़ायोनी शासन को नए बम भेजने के मुद्दे शामिल हैं।

यद्यपि येदियेत अहारनोत समाचारपत्र के सैन्य विश्लेषक ने दावा किया है कि ज़ायोनी शासन ने अमेरिका के अनुरोध पर बड़े पैमाने पर हवाई हमलों को विशेष सैन्य अभियानों से बदल दिया है लेकिन अस्थायी युद्धविराम की समाप्ति के शुरुआती घंटों से ही ज़ायोनी शासन के ग़ज़्ज़ा पट्टी के विभिन्न हिस्सों पर, जो पहले से ही खंडहरों में तब्दील हो चुके हैं, हवाई, ज़मीनी और समुद्री हमलों तेज़ हमलों का निशाना बनाया जा रहा है।

शुक्रवार पहली दिसम्बर के बाद से, जब ज़ायोनी शासन के उल्लंघनों की वजह से अस्थायी युद्धविराम समाप्त हो गया, ग़ज़्ज़ा पट्टी के विभिन्न क्षेत्रों पर इस शासन द्वारा व्यापक ज़मीनी, समुद्री और हवाई हमले किए गए जिसके परिणामस्वरूप दर्जनों लोग हताहत और घायल हो गये।

रविवार सुबह ही ज़ायोनी शासन ने ग़ज़्ज़ा पट्टी के केंद्र में स्थित नुसैरात शिविर में लोगों के घरों पर बमबारी की, जिसमें बड़ी संख्या में लोग मारे गए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ने ग़ज़्ज़ा पट्टी की ख़राब स्थिति और ज़ायोनी शासन द्वारा ग़ज़्ज़ा पर जारी लगातार बमबारी के दृष्टिगत इस क्षेत्र में तत्काल युद्धविराम का आह्वान किया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम ग्रेब्रेसस ने बताया कि इस्राईल की निरंतर बर्बर बमबारी ने ग़ज़्ज़ा को गंभीर स्वास्थ्य और चिकित्सा संकट में डाल दिया है। उनका कहना था कि संकटग्रस्त ग़ज़्ज़ा पर इस्राईल की भारी बमबारी जारी रहने की रिपोर्टें हासिल हो रही हैं।

दूसरी ओर प्रतिरोधकर्ताओं ने भी जवाबी कार्रवाईयां की हैं और फ़्रंट मोर्चों को बाधित करते हुए अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं।

अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों पर हमला करने वाले प्रतिरोध के रॉकेट और आयरन डोम की मिसाइलों को रोकने में असमर्थता ने ज़ायोनी अधिकारियों को भ्रमित कर दिया है।

पिछली रात ज़ायोनी सेना ने आयरन डोम की संभावित विफलता और मिसाइलों को रोकने में आयरन डोम की तकनीकी ख़राबी के कारण अवैध अधिकृत क्षेत्रों में एक मिसाइल के दुर्घटनाग्रस्त होने की जांच शुरू करने की बात कही है।

इस्राईल के ख़िलाफ़ प्रतिरोध की जवाबी कार्रवाइयों की वजह से इस शासन को भारी नुक़सान पहुंचा है और उसने अपने सैनिकों के मारे जाने की सूचना पर सख़्त सेंसरशिप लगा रखा है।