सेहत

अलर्ट होने की ज़रूरत, बहुत ख़तरनाक़ है ये बीमारी : रिपोर्ट

कार्डियोमायोपैथी हार्ट के बीमार होने की एक कंडीशन है. इसमें हार्ट की मशल्स बहुत अधिक कमजोर हो जाती हैं. एक तरह की कार्डियोमायोपैथी का नामकरण जापानी जाल के नाम पर भी किया गया है

Heart Attack Symptoms

वर्ष 2022 में सेलिब्रिटीज के लिए अच्छा नहीं रहा. कई बॉलीवुड स्टार की मौत हार्ट अटैक से हो गई. अभिनेताओं को हार्ट अटैक एक्सरसाइज करने के दौरान आया. मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव तो कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहे थे. बॉडी के अन्य आर्गन के काम बंद करने के कारण उनकी भी मौत हो गई. अभी मिस यूनीवर्स और बालीवुड अभिनेत्री सुष्मिता सेन ने सोशल मीडिया पर हार्ट अटैक आने की जानकारी साझा की है. डॉक्टरों ने कोरोनरी आर्टरी में स्टेंट डाला. हार्ट से जुड़ी प्रॉब्लम आजकल बेहद कॉमन हो गई हैं. ऐसे में इसके लक्षणों की जानकारी होना जरूरी है. यह भी बताएंगे कि एक तरह की कार्डियोमायोपैथी का नाम जापान के ऑक्टोपस पकड़ने वाले जाल पर पड़ा है.

हार्ट से जुड़ा रोग है कार्डियोमायोपैथी
कार्डियोमायोपैथी हार्ट की मशल्स के बीमार होने का इंडीकेशन देता है. इसमें हार्ट को शरीर के बाकी हिस्सों में ब्लड पंप करना बेहद मुश्किल होता है. इसमें हार्ट की मशल्स असामान्य रूप से मोटी हो जाती हैं. इससे हार्ट को ब्लड पंप करने में काफी दिक्कतें आनी लगती है. लेकिन यहां भी जरूरी होता है कि हार्ट मशल्स कमजोर हुई है या नहीं. इसके लक्षणों की पहचान भी समय रहते कर ली जाए.

क्या होता है कार्डियोमायोपैथी में?
कार्डियोमायोपैथी के मामले में, आपके हार्ट की मशल्स कमजोर हो जाती हैं. हार्ट के सामने ब्लड पंप करने में परेशानी होने लगती है. सांस फूलने लगती हैं. यदि कोई काम भी नहीं कर रहे हो तो ऐसे लगेगा कि सांस लेने में बहुत अधिक जोर लगाना पड़ रहा है. व्यक्ति को इस कंडीशन में अलर्ट होने की जरूरत है.

कितने तरह की होती है कार्डियोमायोपैथी
ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) के अनुसार, हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी, प्रतिबंधात्मक कार्डियोमायोपैथी, ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम या ताकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी समेत कई तरह की कार्डियोमायोपैथी हैं. इन सभी कार्डियोमायोपैथी मेें हार्ट की मशल्स बहुत अधिक कमजोर हो जाती हैं. इसमें व्यक्ति के सीने में दर्द, दबाव और अजीब सी बैचेनी महसूस होने लगती है. हार्ट ब्लड सप्लाई सही करने के लिए अधिक काम करता है. इससे सीने में तेज दर्द होने लगता है.

जापानी जाल पर पड़ा है इस रोग का नाम
कार्डियोपैथी तीन तरह की होती हैं. लेकिन इनमें से एक ताकोत्सुबो कािर्डयोमायोपैथी होती हैं. इसमें इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द ताकोत्सुबो शब्द जापानी है. अब सवाल है कि ये शब्द जापान से कहां लिया गया है. दरअसल, इस शब्द को जापान से लेने के लिए एक लॉजिक छिपा हुआ है. रिपोर्ट के अनुसाार, ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम में मांसपेशियां शिथिल पड़ने से हार्ट का जो साइज हो जाता है. वह जापान में मछुआरों के स्तर से ऑक्टोपस पकड़ने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले जाल जैसा लगता है. इसी जाल को ताकोत्सुबो कहा जाता है. इसी कारण ताकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी कहा जाता है.

क्या दिखते हैं लक्षण
इसमें मुख्य लक्षण में चक्कर आना शामिल होता है. इसमें व्यक्ति को लग सकता है कि उसके चारों ओर सब कुछ घूम रहा है. सिरदर्द ट्रिगर कर सकता है और बेहोशी भी आ सकती है. हार्ट मशल्स कमजोर होने के कारण हार्ट की गति कभी कम, कभी तेज हो सकती है.

आपके खाने की टेबल पर सबसे बड़े दुश्मन: खतरनाक भोजन

भोजन: तीन अक्षर और इसके पीछे है पूरी दुनिया। हमारी जिन्दगी हमारे खाने के ईर्द-गिर्द ही घूमती है, हमे क्या खाना पसंद है और क्याा नहीं बस यही सब। भोजन का एक सांस्कृतिक महत्व है, यही एक ऐसा पल होता है जब अपने परिवार, मित्रों या शुभचिंतकों के साथ एक टेबल पर बैठकर खाने के साथ अपने खास लम्हे बिता रहे होते हैं। लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है और वो ये है कि भोजन हमारा दुश्मन भी हो सकता है। हम सिर्फ ये बात नहीं कर रहे हैं कि क्या खाने चाहिए और क्या नहीं, बल्कि खाने की हर स्वादिष्ट प्लेट से हमें पता खुद पर कंट्रोल होना चाहिए।

हम अपने रोजमर्रा के भोजना में कुछ हानिकारक चीजों को छिपाते हैं, जिसे ज्यादातर लोग अनदेखा कर देते हैं।

हम आपके परोसी जा रही धीमी मौत के पहलुओं पर एक नज़र डालते हैं!

1/15 – कृत्रिम मक्खन

कृत्रिम मक्खन को इस सूची में इसलिए रखा गया है क्योंकि इसमें बहुत अधिक मात्रा में ट्रांस फैट होता है, जिससे अक्सर हृदय से संबंधित बीमारियां होती हैं। ह्रदय से संबंधित बीमारियों के अलावा, इसे स्तनपान से भी जोड़कर देखा जाता है, दरअसल कृत्रिम मक्खन में हाई ट्रांसफैट नुकसान देह होता है जिसकी वजह से मां के दूध की गुणवत्ता कम हो जाती है और नवजात शिशु को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है। इस प्रोडक्ट का छोटा भाग ही आपका इंसुलिन लेवल बढ़ा सकता है। हम जानते हैं कि ये मक्खन खाने में स्वादिष्ट होता है, लेकिन इसे खाने से पहले इसके स्वाद के साथ-साथ इसके नुकसान के बारे में भी सोच लें।

2/15 – सोड़ा

कार्बोनेटेड पानी, स्वाद और मिठास ये तीन ऐसे मुख्य तत्व हैं जो दुनियाभर में परोसे जाने वाली इस लोकप्रिय ड्रिंक में मौजूद हैं। इसके अलावा, कई अन्य योजक हैं जो सोडा को एक साधारण विकल्प से परिवर्तित करते हैं जो हमारे प्रमुख घातक खाद्य पदार्थों में से एक बन जाता है, जानते हैं क्यों? बहुत आसान है। शर्करा युक्त सोडा पेय से आपका मस्तिष्क संतुष्ट नहीं हो सकता है, इसलिए आप अपने स्वास्थ्य पर कोई सकारात्मक प्रभाव डाले बिना अपनी दिनचर्या में खाली कैलोरी जोड़ते रहेंगे। फ्रुक्टोज की तरह उच्च मात्रा में अनावश्यक शर्करा आपके लीवर द्वारा ग्लूकोज में परिवर्तित हो जाती है, और फिर आपका शरीर इसे वसा के रूप में एकत्रित कर लेता है। हाँ, हम जानते है आपको सोडा पेय पसंद हैं, डोपामिन को शुक्रिया क्योंकि निश्चित रूप से आप इसे सिर्फ इसलिए ही पसंद करते हैं।

3/15 – एनर्जी ड्रिक्स

आप थके हुए हैं और आपको शारीरिक या मानसिक तनाव का सामना करना है, इसलिए थकान में मदद करने में एनर्जी ड्रिंक से बेहतर साथी और कौन हो सकता है भला। एनर्जी ड्रिंक फायदेमंद होती हैं, यदि उन्हें पीने के जोखिमों के बारे में जागरूकता के साथ उपयोग किया जाता है। ज्यादातर में एनर्जी ब्लेंड जैसे कि कैफीन, टॉरिन, ग्वाराना, बी विटामिन और ग्लूकोरोनोलैक्टोन इतनी मात्रा में होते हैं जो कई-पेय मात्रा में सुरक्षित नहीं हो सकते हैं। यदि इन्हे बहुत अधिक मात्रा में लिया जाता है तो ये हानिकारक हो सकते हैं या यू कह सकते हैं कि ये अवैध ड्रग्स, धुम्रपान या शराब जितने ही हानिकारक हो सकते हैं।

4/15 – फलों का जूस

जब किसी जूस के पैकेट के खरीदते हैं तो उसी 100 % फलों का इस्तेमाल करके बनाया गया जूस लिखा होता है, लेकिन ये हेल्थ के लिए अच्छा नहीं है, ये सिर्फ विज्ञापन का एक तरीका है। इस जूस को तैयार करने के लिए फलों को निचोड़कर उनसे जूस निकाल लिया जाता है और इसे आमतौर पर एक साल तक रस से भरे ऑक्सीजन टपकने वाले टैंको में स्टोर करके रखा जाता है। इससे जूस लगभग फ्लेवर मुक्त हो जाता है। तो फिर हमारी इस नैचुरल एनर्जी ड्रिंक में स्वाद और फ्लेवर कहां से आता है? इसके लिए अपने बाद में फ्लेवर पैक मिलाए जाते हैं और ये पूरी प्रक्रिया का दूसरा चरण होता है और इसी टेस्ट का हम आनंद ले रहे होते हैं।

5/15 – सफेद ब्रेड

सफेद ब्रेड अन्य ब्रेड विकल्पों की तुलना में फाइबर और प्रोटीन के मामले में बहुत खराब होता है( पूरी तरह से गेहूं से बना, राई ब्रेड अभी दो उद्हारण है, हालांकि उदाहरण तो बहुत सारे दिए जा सकते हैं)। फाइबर हमारे शरीर को यह समझने में मदद करता है कि उसने कितना खा लिया है। यदि हम कैलोरी की अतिरिक्त खपत नहीं करना चाहते हैं तो परिपूर्णता की अनुभूति महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, एक इंसुलिन स्पाइक जोखिम अपने रास्ते पर है! प्रणाली में इंसुलिन की अतिरिक्त मात्रा हार्मोन रिलीज करके करके शरीर द्वारा काउंटर किया जाता है, जिसे स्वस्थ व्यक्ति में लगातार सक्रिय नहीं होना चाहिए।

6/15 – कच्चा हनी

कच्चा शहद पाश्चुरीकरण प्रक्रिया से नहीं गुजरता है जिसमें हानिकारक विषाक्त पदार्थों को मार दिया जाता है। नतीजतन, इस “रेडी-टू-ईट” उत्पाद में अक्सर ग्रेअनोटॉक्सिन होता है, जो अगले 24 घंटों के लिए चक्कर आना, कमजोरी, अत्यधिक पसीना और मतली का कारण बन सकता है।

7/15 – ट्यूना
ट्यूना (ट्यूना मछली) खाने से वैसे हमेशा से कोई समस्या नहीं रही है, लेकिन महासागरो में बढ़ते प्रदूषण के कारण अब ऐसा हुआ है। ट्यूना बहुत बड़ी मात्रा में पारा अवशोषित करती हैं, एक बार हमारे शरीर में प्रवेश करने पर किडनी से गुजरते हुए हमारे दिमाग व अन्य नरम टि्शूज तक ट्रेवल करती हैं। इसलिए हमें अपनी डाइट पर नियंतत्रण रखना चाहिए जिसमें हम ट्यूना का हफ्ते में ज्यादा सेवन करते हैं, अगर आपको यह खाना ज्यादा अच्छा लगता है तो इसके दूसरे विकल्प देख सकते हैं जिसमें पारे का एक्सपोजर कम हो।

8/15 – संसाधित मांस

प्रोसेस्ड मीट क्या हैं? वे विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ हैं, जैसे कि हॉट डॉग, बेकन, सॉसेज, हैम या सलामी, कॉर्न बीफ, स्मोक्ड मीट, झटकेदार बीफ और बाकी वे सारे मीट जिन्हे नमक, क्यूरिंग, कैनिंग, ड्राईिंग या स्मोकिंग के द्वारा संसाधिथ किया जाता है। संसाधित मीट आमतौर पर हाई-ब्लड प्रेशर और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनते हैं। उनके खाने के नकारात्मक परिणाम इस मीट को संसाधित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले उच्च तापमान से प्राप्त होते हैं जो नाइट्रोसामाइन बनाते हैं जो कार्सिनोजेनिक होते हैं।

9/15 – नाश्ते में उपयोग होने वाले अनाज

नाश्ता की चीजों से हर सुपरमार्केट के अलमारिया भरी होती हैं। ये सभी हमारे दिन के पहले खाने की शुरूआत के लिए सबसे अच्छे माने जाते हैं और लोग इन्हे पसंद भी करते हैं, क्योंकि ये खाने में बहुत स्वादिष्ट होते है जो हर किसी को मन को भाते हैं। लेकिन लोगों को असल में पता नहीं होता है कि इन्हे कैसे बनाया जाता है और इनके क्या नुकसान हो सकते हैं। लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि ये उत्पाद आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों से भरे हुए हैं जो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करते हैं। यदि आप सच में अपने आप को इस नाश्ते से दूर नहीं रख सकते हैं तो हम इसके अन्य विकल्प तलाश सकते हैं जो स्वास्थ्य के लिए बेहतर हो और हमारे जायके के लिए भी अच्छे हों।

10/15 – पनीर

भले ही पनीर कैल्शियम का एक अच्छा स्रोत है – जो हमारी हड्डियों को मजबूत करता है -, इसमें प्रोटीन, फास्फोरस, राइबोफ्लेविन, जस्ता और कुछ अन्य विटामिन (यानी, विटामिन ए, बी 12) आदि हैं। लेकिन हमें खुद को ये भी याद दिलाना होगा कि पनीर एक उच्च कैलोरी वाला भोजन है। सभी सकारात्मक पोषण जो पनीर में होते हैं, वो सब एक पल में नष्ट हो सकते हैं, अगर हमने इस गलत चीज के साथ खा लेते हैं या बिना सोचे समझे इसके साथ किसी भी फूड का सेवन कर लेते हैं। इसलिए अपने भोजन में इस्तेमाल करने से पहले एक बार जरूर सोचें, क्योंकि ये पनीर है, और हेल्थ के अच्छा होना चाहिए।

11/15 – वसा मुक्त भोजन

हालांकि पहली नज़र में, वसा मुक्त खाद्य पदार्थ पूरी तरह से संतुलित और संतोषजनक आहार के लिए गोल्ड माइन की तरह लग सकते हैं, मगर सच्चाई बिल्कुल अलग है। वसा शरीर के कई कार्यों के लिए और इसके स्वस्थ विकास के लिए आवश्यक है। वसा में कटौती उचित नहीं है, खासकर जब आपके नियमित रूप से वर्कआइट करते हैं। इसके अलावा, वसा मुक्त खाद्य पदार्थ संसाधित शुगर में उच्च होते हैं। हम अक्सर यह सोचते हैं कि वसा मुक्त का मतलब है कैलोरी मुक्त, जबकि ये पूरी तरह से सच नहीं है।

12/15 – फ्रेंच फ्राइज

तेजी से वजन बढ़ना, लेकिन ग्लानी वाली खुशी, पक्का ऐसा ही होता है। यह सुनिश्चित करने के लिए है। फ्रेंच फ्राइज़ आमतौर पर हाइड्रोजनीकृत वनस्पति तेलों में तले हुए होते हैं, जिन्हें अक्सर गर्म करके उनके पॉलीअनसेचुरेटेड वसा को नुकसान पहुँचाया जाता है। डीप-फ्राई खाद्य पदार्थ हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है, क्योंकि इनमें बहुत अधिक मात्रा में ट्रांसफैट होता है, जो हमारे हैल्थ के लिए बिल्कुल भी अच्छा नही है। इसलिए पलभर के स्वाद के चक्कर में अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न करें।

13/15 – डिब्बाबंद उत्पाद

जब हम व्यस्त होते है या हमारे पास समय नहींं होता है तो हम अपने भोजन के विकल्प के रूप में डिब्बाबंद प्रोडक्ट के चुनते हैं यानी बाजार बिकने वाले केन-गुड्स। हालांकि डिब्बाबंद प्रोडक्ट खाने से किसी की मौत नहीं होती है, लेकिन इसे अपनी कमजोरी न बनाएं और ऐसे खाने की आदत से बचने में ही भलाई है। क्या आपको पता कैनिंग एक प्रक्रिया है जिससे गुजरने के बाद प्रोडक्ट को तैयार किया जाता है ताकि लंबे समय तक उन्हे खराब होने से बचाया जा सके ( ये अवधि एक साल से पांच साल तक या उससे भी ज्यादा हो सकती है)। वहीं कुछ अन्य पोषक तत्व जैसे कि पानी में घुलनशील विटामिन, सामान को डिब्बाबंद करने में उपयोग किए जाने वाले उच्च ताप से खराब या नष्ट हो सकते हैं। इसके अलावा, कई इंडस्ट्रीज के डिब्बाबंद उत्पादों में चीनी और नमक बहुत अधिक मात्रा में होते हैं।

14/15 – स्टॉक क्यूब

दुकान से खरीदे गए स्टॉक क्यूब्स में कृत्रिम तत्व और उच्च स्तर के नमक दोनों होते हैं। खासकर, मधुमेह से पीड़ित लोगोों में हाईब्लड प्रेशर की समस्या होती है, जिससे उन्हे हार्ट या किडनी से संबंधित रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है और वो इस बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील बन जाते हैं। घर का बना स्टॉक त्वरित और आसान होता है, और वे आपके व्यंजनों को अधिक स्वादिष्ट और लाभप्रद बनाएगा।

15/15 – नमक

नमकीन का मतलब स्वादिष्ट होता है, हम ये जानते हैं। भोजन में नमक की अधिक मात्रा से रक्तचाप बढ़ सकता है जिससे हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ाता है। हमें क्या करना चाहिए, हमें अपने डाइट में यह ध्यान रखना चाहिए कि हम कितना नमक ले रहे हैं और यदि की नमक की मात्रा ज्यादा तो उसे कम करें और भोजन को स्वास्थ्यवर्धक बनाएं। अगर हम मुट्ठी भर नमक की जगह चुटकी भर नमक डालें तो बुरा नहीं होगाहोगा?