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असम : स्थाई डिटेंशन सेंटर में 68 बंदियों के पहले समूह को शिफ्ट किया गया!

भारत सरकार ने असम के ग्वालपाड़ा जिले में विदेशी घोषित नागरिकों को रखने के लिए बनाए गए स्थाई डिटेंशन सेंटर में 68 बंदियों के पहले समूह को शिफ्ट किया गया है.

इससे पहले ये विदेशी घोषित नागरिक ग्वालपाड़ा जेल के अंदर बने अस्थाई ट्रांजिट कैंप में बंद थे. दरअसल असम में इससे पहले विदेशी घोषित हुए इन लोगों के लिए डिटेंशन सेंटर जैसी कोई अलग स्थाई व्यवस्था नहीं थी.विदेशी घोषित इन नागरिकों को शिफ्ट करने की बात की पुष्टि करते हुए जेल महानिरीक्षक बरनाली शर्मा ने बीबीसी से कहा,”68 कैदियों को ग्वालपाड़ा के नवनिर्मित ट्रांजिट कैंप में शिफ्ट किया गया है.”

“ये नए घोषित हुए विदेशी नहीं है बल्कि ये लोग ग्वालपाड़ा जेल में बने अस्थाई ट्रांजिट कैंप में पहले से ही थे.”

उन्होंने कहा, “अब हम इनकों चरणबद्ध तरीके से माटिया गांव में बनाए गए स्थाई ट्रांजिट कैंप में शिफ्ट कर रहें है. इस पहले समूह में 45 पुरुष, 21 महिलाएं और दो बच्चे हैं.”

जेल महानिरीक्षक के अनुसार अब ये डिटेंशन सेंटर आधिकारिक तौर पर ट्रांजिट कैंप हो गए है. वे कहती है,”ग्वालपाड़ा जेल के अलावा असम में कोकराझार, तेजपुर, सिलचर, डिब्रूगढ़ और जोरहाट की जेल में कुल छह ट्रांजिट कैंप हैं जहां इस समय विदेशी घोषित करीब 230 कैदी बंद हैं.”

“अब इन कैदियों को चरणबद्ध तरीके से माटिया में बने नवनिर्मित स्थाई ट्रांजिट कैंप में शिफ्ट कर दिया जाएगा. इसे लेकर गुवाहाटी हाई कोर्ट का आदेश है और हम उसका पालन कर रहें है.”

गुवाहाटी हाई कोर्ट के एक आदेश के बाद ही असम सरकार ने केंद्र सरकार से परामर्श कर 17 जून, 2009 में राज्य में डिटेंशन सेंटर स्थापित करने के लिए एक अधिसूचना जारी की थी.

इस तरह पहला अस्थाई डिटेंशन सेंटर ग्वालपाड़ा जेल में स्थापित किया गया और बाद में पांच और खोले गए. अब ग्वालपाड़ा ज़िले के माटिया गांव की 20 बीघा ज़मीन पर सभी सुविधाओं के साथ इस स्थाई ट्रांजिट कैंप का निर्माण किया गया है.

इसे 46 करोड़ रुपये से अधिक के बजट में बनाया गया है जिसमें तीन हजार से अधिक अवैध विदेशियों को रखने की क्षमता है.