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आध्यात्मिक संगीत की परम्परा, जिसे सहारा अफ़्रीका के ग़ुलाम लोगों के वंशजों ने विकसित किया था, आसमा हमज़ोई ‘ग्नावा म्यूजिक’ की स्टार हैं!

ग्नावा संगीत मोरक्को के आध्यात्मिक संगीत की परम्परा है जिसे सब सहारा अफ़्रीका के ग़ुलाम लोगों के वंशजों ने विकसित किया था.

शास्त्रीय कविता को पारंपरिक म्यूजिक और नृत्य में पिरोकर गाया जाता है और इसके केंद्र में ‘ग्नावा मास्टर’ मुख्य किरदार होते हैं जो गिटार जैसे वाद्ययंत्र घेम्बरी बजाते हैं.

पुरुषों के दबदबे वाले यहां के समाज में पहले ‘ग्वाना मास्टर’ पुरुष ही होता था लेकिन जब आसमा हमज़ोई आईं तो इस रिवाज़ में बड़ा उलटफेर हो गया.

उनके पिता एक ‘ग्वाना मास्टर’ थे और घाम्बरी बजाने की विरासत अपने बेटे को सौंपना चाहते थे. लेकिन संयोग से राचिद अल हमज़ोई के केवल बेटियां थीं जिनमें एक बेटी बहुत प्रतिभावान थी.

और इस तरह आसमा हमज़ोई ने बने बनाए सांचे को तोड़ दिया. आज वो ‘ग्नावा म्यूजिक’ की स्टार हैं, जो कि लंबे समय तक स्ट्रीट म्यूज़ीशियन और बेघर लोगों के लिए एक हाशिये की संस्कृति थी लेकिन अब ये मोरक्को और पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो रही है.

आसमा हमजोई ने अपना पहला डेब्यू 2012 में दक्षिणी तटीय शहर स्वेयरा में एक सालाना ग्नावा म्यूजिक फ़ेस्टिवल के दौरान किया था. ये शहर ग्नावा लोगों का सांस्कृतिक केंद्र है.

हमज़ोई ने कहा, “ये बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी थी. वाद्य यंत्र मेरे पिता का था. उन्होंने जो सिखाया था, मुझे उतना ही बढ़िया बजाना आने की ज़रूरत थी. मुझे उन्हें सही से बजाने की चुनौती थी.”

आसमा लाईं बदलाव

ये फ़ेस्टिवल इस साल फिर से होने जा रहा है और आसमा हमज़ोई सुर्खियों में हैं.

वो कहती हैं, “पहली बार स्टेज पर ग्नावा म्यूजिक बजाने के लिए स्टेज पर किसी महिला का खड़ा होना, थोड़ा डरावना था.”

मोरक्को में ग्नावा लोगों की जनसंख्या के बारे में कोई रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन उनका इतिहास 16वीं शताब्दी के ग़ुलामों के व्यापार के ज़माने जितना पुराना है.

साल 2019 में संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक संस्था यूनेस्को ने उनके संगीत और संस्कृति को ‘मानवता की अतुलनीय सांस्कृतिक विरासत’ क़रार दिया था.

यूनेस्को के अनुसार, “ग्नावा सूफ़ी भाईचारे का संगीत है. इसमें आम तौर पर धार्मिक सामग्रियों को गीतों में सजाया जाता है, जिसमें पूर्वजों और आत्माओं को संबोधित किया जाता है.”

इसमें कहा गया है कि ग्नावा संस्कृति को अब मोरक्को के बहुआयामी संस्कृति और पहचान का हिस्सा माना जाता है.

यूनेस्को के मुताबिक, “शहरों में ख़ासकर, चिकित्सकीय लाभ के रूप में ग्नावा के रात रात भर चलने वाले रस्मी कार्यक्रम होते हैं जिसमें अफ़्रीका के पूर्वजों के रिवाज़, अरब मुस्लिम के प्रभाव और अफ़्रीकी की मूल जनजाति बेर्बेर के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मिला जुला प्रभाव होता है.”


संगीत में बदलाव का दौर
हालांकि ग्नावा संगीत में महिलाओं की अधिक से अधिक मौजूदगी को चारो ओर से सराहना मिलती है, यहां तक इसकी तारीफ़ बुज़ुर्ग लोग भी करते हैं लेकिन उनकी मुख्य चिंता ये है कि ग्नावा म्यूजिक की बढ़ती लोकप्रियता के कारण बहुत से युवा कलाकार पैसे और प्रसिद्धि के पीछे भाग रहे हैं और समुदाय के रीति रिवाज़ों, जिसके केंद्र में आध्यात्मिकता होती है, उससे वे दूर भाग रहे हैं.

नाजी अल-सुडानी एक बुज़ुर्ग हैं और अपनी दुकान में ड्रम और घेम्बरी बनाते हैं. उनकी प्रतिष्ठा बहुत है. कई कलाकार अपने कार्यक्रम से पहले उनकी छोटी सी दुकान में उनका आशीर्वाद लेने आते हैं.

जैसा कि उनके नाम से ही पता चलता है उनके पूर्वज सूडान से थे. एक और लीजेंड्री ग्नावा मास्टर का नाम है महमूद गिनी, उनके नाम से भी पता चलता है कि उनके अतीत का संबंध आज के गिनी से है.

सुडानी कहते हैं, “महिला कलाकारों का आना बहुत अच्छी बात है लेकिन अहम बात ये है कि विनम्रता, शराफ़त और बुज़र्गों से संस्कृति को लेने की समझदारी और उसकी इज़्ज़त करना नौजवानों को आना चाहिए.”

सूडानी को मालेम यानी मास्टर म्यूजीशियन का तमगा हासिल है.

वो कहते हैं, “असल मुद्दा है कि सिर्फ तमगे की वजह से ही आप खुद को मालेम नहीं कह सकते. सालों की मेहनत और उस्तादों की संगत में रहने के बाद मालेम बनते हैं.”

लेकिन मोरक्को की मौजूदा आर्थिक सच्चाई के मद्देनज़र आसमा हमाज़ोई समेत बहुत से लोग ये सोचते हैं कि यह संगीत केवल आध्यात्मिक उत्थान के लिए ही नहीं बल्कि आर्थिक मुश्किलों से निजात पाने के लिए भी है.

हमज़ोई ने कहा, “केवल मैं और मेरी बहन ही पूरे घर का खर्च चलाते हैं. अपने माता पिता को भी देखना है, उनके खर्चे और खुद के खर्चे चलाने हैं.”

फ्यूज़न का बढ़ता चलन
हाल के सालों में स्वेयरा में ग्नावा पर केंद्रित समारोहों में अब अन्य संगीत के साथ फ्यूज़न का भी चलन बढ़ा है.

1998 में जब से ये फ़ेस्टिवल शुरू हुए मशहूर अफ़्रीकी अमेरिकी संगीतकार सुलेमान हकीम यहां आते रहे हैं.

वो कहते हैं, “ग्नावा ध्वनियों और अफ़्रीका की ध्वनियों के बीच कुछ साम्यता है जो फ्यूज़न का आधार बनता है. और ये साझी विरासत और इतिहास के बारे में हमें बताता है.”

इन फ़ेस्टिवल में ग्नावा आध्यात्मिक संगीत पसंद करने वालों से लेकर टूरिस्ट तक आते हैं.

इस साल मोरक्को के लोकप्रिय अभिनेता और गायक फ़हद बेंचेम्सी ने अपने बैंड लालास के साथ परफ़ार्म किया.

उन्होंने कहा, “इतने सालों में काफ़ी कुछ बदल चुका है लेकिन हल लोग यहां ग्नावा मास्टर से मिलने आते हैं क्योंकि स्वेयरा ग्नेवा संस्कृति का केंद्र है.”

वो कहते हैं, “यहां आना तीर्थस्थल से कम नहीं है. कुछ के लिए ये बहुत आध्यात्मिक होता है, अन्य के लिए संगीत और नृत्य का पहलू अधिक होता है.”

लेकिन वो अकेले नहीं हैं, मोरक्को के कई युवा जो ग्नावा संस्कृति में पैदा नहीं हुए, वो इसे सराहते हैं, इसके उत्सव वाले पहलू के साथ साथ आध्यात्मिकता के पक्ष को भी मानते हैं.

असल में ग्नावा संगीत की लोकप्रियता सब सहारा अफ़्रीका और मोरक्को के बीच संबंधों को सम्मान देना और अरब लोगों के प्रभाव वाले समाज में हाशिए पर रहे लोगों की संस्कृति को मान्यता देने जैसा है.

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मरियम फ़्रैंकोइस
पदनाम,स्वेयरा