साहित्य

इसको मेहनत नहीं रिश्वत कहते हैं….इसलिए मैंनें रुपए नहीं लिए”

*रिश्वत*
डॉ० अशोक एक डिग्री कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर थे। वे स्टूडेंट्स को हिंदी में पीएचडी करवाने व पीएचडी के लिए शोध विषय चुनने में मदद करते थे। वे एक स्थानीय समाचार पत्र के भी सम्पादक थे। नितिन उनके ऑफिस में समाचार पत्र के एडिटर के तौर पर कार्य करता था। नितिन को अशोक सर अपना बेटा ही मानते थे। अशोक सर की अनुपस्थिति में, नितिन समाचार पत्र की एडिटिंग के साथ-साथ पीएचडी करने के लिए आने वाले विद्यार्थियों की समस्याओं को जानकर उनको सही राय देने व मार्गदर्शन करने का काम करता था।

एक दिन एक लड़की डॉक्टर अशोक से मिलने उनके ऑफिस पहुँची। उस समय डॉक्टर साहब कहीं बाहर गए हुए थे। उस लड़की ने नितिन से पूछा- “सर कहाँ है और कब तक आएंगे?”

अपने मोबाइल से सर का नम्बर डायल करके नितिन ने अपना मोबाइल उस लड़की को दे दिया।

“सर, मैं शगुन बोल रही हूँ। मैं पीएचडी करना चाहती हूँ। आप कब तक आएंगे?” उस लड़की ने फोन पर सर से पूछा।

“बेटा, मुझे तो अभी आने में समय लगेगा। शाम हो जाएगी। तुम एक काम करो.. मेरे ऑफिस में नितिन नाम का लड़का होगा उससे मिल लो। वह आपको पीएचडी की सारी प्रक्रिया, खर्चा आदि सब समझा देगा। जब तुम जाओ तो पीएचडी के लिए शोध विषय चुन लेना और एक एप्लीकेशन नितिन को देकर चली जाना ताकि मैं आपकी पीएचडी के लिए कॉलेज में बात कर सकूं व अनुमति ले सकूं। एप्पलीकेशन का मैटर भी नितिन बता देगा कि एप्लीकेशन किसके नाम लिखनी है और उसमें क्या-क्या लिखना है?” सर ने फोन पर ही जवाब दिया।


“ठीक है सर। मैं नितिन जी से बात करती हूँ।” शगुन बोली।

नितिन ने विस्तार से शगुन को पीएचडी की सारी प्रक्रिया, खर्चा इत्यादि बताकर… “पीएचडी के लिए शोध विषय चुनने का प्रार्थना पत्र कॉलेज के नाम” लिखकर देने को कहा। नितिन ने शगुन को प्रार्थना पत्र में लिखे जाने वाले मैटर को अच्छी तरह बताकर एवं समझाकर A4 साइज के दो पेपर.. प्रार्थना पत्र लिखने को दिए।

वैसे तो शगुन हिंदी भाषा स्नातकोत्तर में गोल्ड मेडलिस्ट थी लेकिन जब उसने प्रार्थना पत्र लिखकर नितिन को दिया तो नितिन ने उसके द्वारा लिखे प्रार्थना पत्र में शुरू से आखिर तक ढेरों गलतियां पाई। शगुन से प्रधानाचार्य भी ठीक से ना लिखा गया था। नितिन ने गलतियों को मेंशन करके पुनः प्रार्थना पत्र लिखने के लिए उसको पेपर दिए। इस बार भी शगुन ने प्रार्थना पत्र में बहुत सारी गलतियां की। मात्रायें इधर की उधर लगा रखी थीं। एक के बाद एक तीन बार भी शगुन से प्रार्थना पत्र ना लिखा गया। अतः नितिन ने परेशान होकर शगुन से पेपर ले लिए और कहा- “मैडम आप इत्मीनान से बैठ जाइए। परेशान मत होइए। मैं आपका प्रार्थना पत्र लिख देता हूँ।”

प्रार्थना पत्र लिखने के बाद नितिन ने प्रार्थना पत्र पर शगुन के साइन करवाकर, अंत में मोबाइल नंबर लिखवाया और शगुन से कहा-
“मैडम जी, अब आप चली जाइये। जैसे ही सर आएंगे मैं उनको यह प्रार्थना पत्र दे दूंगा। आपका मोबाइल नंबर प्रार्थना पत्र में लिखा हुआ है। सर आपसे खुद संपर्क कर लेंगे।”

जाते समय शगुन ने पर्स से 500 का नोट निकाल कर नितिन को देना चाहा लेकिन नितिन ने रुपए लेने से इनकार कर दिया। शगुन बोली- “सर, रख लीजिए। आपने मेरी प्रार्थना पत्र लिखवाने में बड़ी मदद की। इतना तो मेरा भी फर्ज बनता है कि मैं आपके लिए कुछ करूं। वैसे भी मैं अपना कोई भी काम बिना पैसों के नहीं करवाती। रख लीजिए, ये रुपए आपकी मेहनत के हैं।”

“मैडम जी, जिसे आप मेहनत के रुपए बता रही हैं, इसको मेहनत नहीं रिश्वत कहते हैं। वैसे भी मैं यहां लोगों की मदद के लिए ही बैठा हूँ। कृपया आप अपने रुपए अपने पास रख लीजिए। मुझे रुपए नहीं चाहिए। अगर कोई मुझसे अपने काम के… जिस काम के लिए वह रखा हुआ है… उसके रुपए मांगे तो मुझे बेहद गुस्सा आएगा और मैं उसको एक रुपया भी नहीं दूंगा। तो बताओ मैं फिर आपसे इस काम के कैसे रुपए ले सकता हूँ? अगर हर कोई अपने काम के.. जिस काम के लिए वह रखा हुआ है… रुपये मांगे तो स्थिति बड़ी खराब हो जायेगी। आपके पास रुपये हैं तो आप रुपए देकर काम करवा लोगे, लेकिन हम गरीब लोग अपना काम कैसे करवाएंगे क्योंकि रुपए तो हमारे पास हैं ही नहीं। इसलिए कृपा करके आप मुझे रुपये देने की कोशिश भी न करें। धन्यवाद!”

शगुन के जाने के बाद नितिन के साथ ऑफिस में काम करने वाले लोगों ने… जो यह नजारा अपनी आंखों से देख रहे थे… ने नितिन का खूब मजाक बनाया और कहा- “नितिन तू पागल हो गया है क्या? 500 रुपये कम नहीं होते। तेरे परिवार की तो आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। वह रुपए तेरे बहुत काम आ सकते थे। तुम्हें उस अमीर लड़की से रुपए ले लेने चाहिए थे। क्या तुम्हें नहीं लगता है कि जिस लड़की से प्रार्थना पत्र तक ना लिखा जा रहा हो वह स्नातकोत्तर में गोल्ड मेडल कैसे प्राप्त कर सकती है? ज्यादा सत्यवादी हरिश्चंद्र बनना ठीक नहीं है नितिन भाई। अगर कोई हमें रिश्वत दे तो हम तो चुपचाप रख लें। हम तेरी तरह बड़ी बड़ी बातें नहीं करेंगे, ज्ञान नहीं पेलेंगें।”

“आप ठीक कह रहे हैं लेकिन मेरी अंतरात्मा को यह सब ठीक नहीं लगा इसलिए मैंने रुपए नहीं लिए। जो मुझे ठीक लगेगा मैं वही करूँगा आपको जो सही लगे वह आप करना। मैं आपको रिश्वत लेने से नहीं रोक सकता।”

यह कहकर नितिन ने अपना पल्ला झाड़ लिया। शाम को जब डॉक्टर अशोक वापस आए तो ऑफिस में काम करने वाले लोगों ने सर को सब बातें बताई और नितिन की खूब मजाक उड़ाई। अशोक सर भी उनकी बातें सुनकर नितिन की बेवकूफी पर हंसने लगे।

कुछ समय बाद अशोक सर ने नितिन को अपने केबिन में बुलाया और पूछा- “नितिन मुझे पता चला कि वह लड़की प्रार्थना पत्र लिखने के एवज में तुम्हें ₹500 दे रही थी लेकिन तुमने नहीं लिए। आगे से अगर कोई तुम्हें इस तरह की पेशकश करें तो चूकना मत। रुपए रख लेना, मैं कुछ नहीं कहूंगा। मुझे बुरा नहीं लगेगा।”

“सर, आप यह कैसी बातें कर रहे हैं? मैं ऐसा नहीं कर सकता। जो काम मैं कर रहा हूँ उसके तो रुपए आप मुझे दे ही रहे हैं.. हैं ना? फिर मैं इस तरह के अपने काम के रुपए क्यों लूँ? इससे तो आपका ही नाम खराब होगा। समाज में आपकी एक प्रतिष्ठित छवि है। अगर समाज में यह मैसेज गया कि सर के ऑफिस में भ्रष्टाचार है। वहाँ बिन रुपए के कोई काम नहीं होता। चपरासी से लेकर सर तक सब भ्रष्ट हैं तो सोचो….? आपकी समाज में क्या इमेज रह जाएगी? आप मुझे अपने बेटे की तरह मानते हो, प्यार करते हो। मैं भी नहीं चाहता कि एक भी व्यक्ति आपकी बुराई करे। आपके काम को लेकर आपको भला बुरा कहे। सोचकर ही मुझे अच्छा महसूस नहीं हो रहा था। इसलिए मैंनें रुपए नहीं लिए।” नितिन ने अपनी बात स्पष्टता से रखी।

अशोक जी ने इस दूसरे पक्ष व इसके भयंकर परिणामों के बारे में सोचा भी नहीं था। वे नितिन का स्पष्टीकरण सुनकर बहुत प्रभावित हुए। नितिन अपनी जगह बिल्कुल सही था। भावुक होकर उन्होंने नितिन को खुशी से अपने गले लगा लिया और कहा- “मुझे तुम पर नाज़ है।

तुम सच कहते हो नितिन। इज्जत से बढ़कर कुछ नहीं होता। मुझे भी बाकी लोगों की तरह 500 रुपये ही नज़र आ रहे थे। मैं इस दूसरे पहलू की तरफ देख ही न पाया। मैं आज ही और अभी ऑफिस में काम करने वाले अपने सभी स्टॉफ को बुलाकर सख्त हिदायत दूंगा कि कोई भी यहाँ काम कराने आने वालों से मदद करने की एवज में किसी तरह की कोई रिश्वत या सुविधा शुल्क न ले। ऐसा करना गलत है। इसके परिणाम भयंकर होंगे।” सर के मुँह से ऐसी बात सुनकर नितिन मंद-मंद मुस्कुराने लगा।