दुनिया

इसराइल और हमास के बीच जंग की हर ख़बर सिर्फ़ एक क्लिक पर, यहाँ पढ़ें : Day 8 Of #Hamas_Israil War, All Updates

ग़ज़ा पर इसराइली सेना की ज़मीनी कार्रवाई की तैयारी के बीच इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक नया वीडियो शेयर किया है.

वीडियो में वो इसराइली सैनिकों से मिलते और बात करते नज़र आ रहे हैं.

वीडियो के साथ वो लिखते हैं, ”सैनिकों के साथ गज़ा की फ्रंटलाइन पर. हम सब तैयार हैं.”

प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ़ से आए एक अलग बयान में कहा गया है कि नेतन्याहू ने गज़ा पट्टी के बाहर इसराइली सैनिकों से कहा, ”क्या आप अगले चरण के लिए तैयार हैं? अगला चरण आ रहा है.”

 

आज क्या कुछ हुआ?

– संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि गज़ा में अब साफ़ पानी खत्म होने की कगार पर है. इससे करीब 20 लाख फ़लस्तीनी प्रभावित होंगे.

– लेबनान ने कहा है कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इसराइली सैनिकों द्वारा रॉयटर्स के पत्रकार इस्साम अब्दुल्लाह की ‘जानबूझकर की गई हत्या’ के संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज करा रहा है. इस्साम अब्दुल्ला लेबनान के नागरिक थे.

– इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में आज बड़े स्तर पर फ़लस्तीनी लोगों के समर्थन में रैलियां निकाली गईं.

– इसराइल की तरफ़ से उत्तरी गज़ा को खाली करने के फ़लस्तीनियों को मिली समय सीमा समाप्त हो गई है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार लाखों फ़लस्तीनी गज़ा में अपने घर छोड़ चुके हैं.

– शुक्रवार देर शाम उत्तरी गज़ा से बाहर निकल रहे एक फ़लस्तीनी काफ़िले पर हमले की ख़बर सामने आई थी. हमले से जुड़े वीडियो फुटेज सामने और उसकी पड़ताल करने के बाद अब बीबीसी वेरिफाई की टीम ने इसकी पुष्टि की है. शुक्रवार को काफ़िले पर हुए हमले के बाद मौजूद फुटेज में कम से कम 12 शव नज़र आ रहे हैं. इनमें से ज़्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं. बच्चे, जिनमें से कुछ की उम्र दो से पांच साल तक लगती है.

– इसराइल की हवाई बमबारी में अबतक 2200 से ज़्यादा फ़लस्तीनियों की मौत हो गई है और क़रीब आठ हज़ार लोग घायल हुए हैं.

– हमास के हमले के बाद अब तक इसराइल में 1300 लोगों की जान गई है.

रूस के उप विदेश मंत्री को ‘हमास के प्रतिनिधियों से मिलने की उम्मीद’

रूस ने कहा है कि उसके उप विदेश मंत्री अगले सप्ताह क़तर में हमास के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर सकते हैं. इस दौरान बीते सप्ताह हमले के बाद बंधक बनाए गए इसराइलियों की रिहाई पर चर्चा होगी. रूस की सरकारी समाचार एजेंसी रिया-नोवोस्ती ने इसकी जानकारी दी है.

बीबीसी रशिया के संपादक स्टीव रोज़नबर्द ने अपने ताज़ा विशलेषण में बताया है कि रूस फिलहाल एक संभावित शांतिदूत की भूमिका निभाने की कोशिश में है. उन्होंने ये भी बताया कि रूस के हमास और ईरान दोनों से ही संबंध हैं. ईरान पर हमास के चरमपंथियों को फंडिंग देने के आरोप भी लग रहे हैं.

रूस के उप विदेश मंत्री मिखाइल बोगदानोव ने समाचार एजेंसी से कहा कि वो अपने दौरे पर हमास के प्रतिनिधियों से मुलाकात की संभावना को खारिज नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, “अगर वो चाहेंगे तो हम हमेशा संपर्क के पक्ष में रहते हैं.”

“ख़ासतौर पर ऐसी परिस्थिति में ये मुलाकात बंधकों को छुड़ाने सहित बहुत से व्यावहारिक मुद्दों को सुलझाने में कारगर होगी.”

पत्रकार की मौत पर इसराइली सेना का बयान- ‘हमें बहुत अफ़सोस है’

इसराइली सेना ने शनिवार को कहा है कि उन्हें लेबनान पर हमले में समाचार एजेंसी रॉयटर्स के पत्रकार की मौत होने का बहुत अफ़सोस है. समाचार एजेंसी एएफ़पी ने इसकी जानकारी दी है.

हालांकि, इसराइल की सेना ने पत्रकार की मौत की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

सेना के प्रवक्ता रिचर्ड हेच ने कहा, “हम इसकी जांच कर रहे हैं.” इस हमले में एएफ़पी के दो पत्रकारों सहित कुल छह जर्नलिस्ट घायल हुए हैं.

उत्तरी ग़ज़ा छोड़कर जा रहे फ़लस्तीनी काफ़िले पर हमले की पुष्टि, मृतकों में बच्चे भी शामिल

शुक्रवार देर शाम उत्तरी गज़ा से बाहर निकल रहे एक फ़लस्तीनी काफ़िले पर हमले की ख़बर सामने आई थी. हमले से जुड़े वीडियो फुटेज सामने और उसकी पड़ताल करने के बाद अब बीबीसी वेरिफाई की टीम ने इसकी पुष्टि की है.

बीबीसी वेरिफ़ाई ने बताया है कि ये हमला सलाह-अल-दीन सड़क पर हुआ है. ये उत्तरी गाजा से दक्षिण तक जाने वाले उन दो निकासी मार्गों में से एक है, जहां से आम नागरिक गुज़र रहे हैं.

इसराइली सेना ने उत्तरी गज़ा में रह रहे आम लोगों को शाम चार बजे तक इलाका खाली करने को कहा था. जिसके बाद इन मार्गों पर भारी भीड़ है.

शुक्रवार को काफ़िले पर हुए हमले के बाद मौजूद फुटेज में कम से कम 12 शव नज़र आ रहे हैं. इनमें से ज़्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं. बच्चे, जिनमें से कुछ की उम्र दो से पांच साल तक लगती है. फुटेज में लोगों की नज़र आ रही परछाई से लगता है कि इसे स्थानीय समयानुसार शाम क़रीब 5:30 बजे रिकॉर्ड किया गया है.

इनमें से अधिकांश को फ्लैटबेड ट्रक के पीछे लेटे हुए देखा गया. अन्य सड़क पर इधर-उधर बिखरे हुए हैं. वहीं कुछ क्षतिग्रस्त वाहन भी नज़र आ रहे हैं.

फ़लस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इस घटना में 70 लोग मारे गए हैं और इसके पीछे इसराइल का हाथ है. वहीं इसराइल डिफेंस फोर्सेज का कहना है कि वह इस मामले की जांच कर रही है.

हमास के हमले का नेतृत्व करने वाले कमांडर को इसराइल ने मारने का दावा किया

इसराइल की वायु सेना ने कहा है कि उन्होंने बीते शनिवार को दक्षिण इसराइल के इलाकों में हमास के हमले की अगुवाई करने वाले कमांडर अली क़ाधी को मार दिया है.

इसराइली सेना ने कहा है कि अली क़ाधी की मौत खु़फ़िया एजेंसियों के प्रयासों के बाद हुए ड्रोन हमलों में हुई है.

इस बीच फ़लस्तीनी क्षेत्र के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि ग़ज़ा में मरने वालों का आंकड़ा 2,215 तक पहुंच गया है. वहीं घायलों की संख्या अब 8,714 हो गई है.

वेस्ट बैंक में अभी तक 54 लोग मारे गए हैं और 1,100 घायल हुए हैं.

ग़ज़ा से अमेरिकी नागरिकों को बाहर जाने की मंज़ूरी

इसराइल और मिस्र ने कहा है कि अमेरिकी नागरिक ग़ज़ा से रफ़ा बॉर्डर के रास्ते बाहर जा सकते हैं.

इसराइल और मिस्र की सरकारों ने कहा है कि रफ़ा बॉर्डर स्थानीय समयानुसार आज यानी शनिवार को दोपहर 12 बजे से शाम पाँच बजे तक खुला रहेगा.

हालांकि, अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि ग़ज़ा पर नियंत्रण रखने वाला हमास अमेरिकी नागरिकों को इस क्षेत्र से जाने देगा या नहीं.

गज़ा पर ज़मीनी हमले की तैयारी, इसराइल की रणनीति और चुनौती

जोनाथन बेल
पदनाम,बीबीसी सुरक्षा संवाददाता

=============

इसराइल की सेना ने बताया है कि उसने ग़ज़ा में ‘ग्राउंड रेड’ किए हैं और अग़वा किए गए कई लोगों के शवों को बरामद किया है.

इसराइल ने ग़ज़ा पर हमले के लिए पूरी तैयारी भी कर ली है. इसी बीच 11 लाख फ़लस्तीनी लोगों से 24 घंटों के भीतर उत्तरी इलाक़े को छोड़कर दक्षिणी ग़ज़ा की तरफ़ जाने के लिए कहा गया है.

इसराइल की सेना ने कहा है कि शनिवार सुबह दस बजे से चार बजे के बीच सड़क मार्गों पर हमले नहीं किए जाएंगे.

ग़ज़ा बॉर्डर के पास इसराइल ने लाखों सैनिक, तोपखाने और टैंक तैनात कर दिए हैं.

लेकिन घनी आबादी वाले ग़ज़ा में ज़मीन पर सेना भेजना इसराइल के लिए एक ख़तरनाक अभियान भी साबित हो सकता है.

इसराइल ज़मीनी हमला कैसे करेगा, ये अभी स्पष्ट नहीं है. अभी ये भी साफ़ नहीं है कि उसकी सेना कितनी भीतर तक घुसेगी और ये अभियान कितना लंबा चलेगा.

हालांकि इसराइल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को राष्ट्र के नाम संदेश में कहा है कि ‘ये अभियान कुछ दिनों, सप्ताह, या महीनों तक भी चल सकता है, लेकिन इसराइल हमास को नष्ट करने के अपने लक्ष्य को पूरा करके रहेगा.’

ग़ज़ा के भीतर अभियानों का अनुभव रखने वाले इसराइल के पूर्व सैन्य अधिकारी मेजर जनरल अमोस गिलाड कहते हैं, “इसराइल के लिए पहला काम ये था कि वो एक यूनिटी सरकार बनाये ताकि आगे वो जो करने जा रहा है उसके लिए देश का समर्थन हासिल हो.”

हाल के दिनों में कई शीर्ष अमेरिकी और यूरोपीय अधिकारियों ने भी इसराइल का दौरा किया है जिससे इसराइल को अपने सैन्य अभियान के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करने में मदद मिली है.

हालांकि जब युद्ध आगे बढ़ेगा और अगर हताहत होने वाले आम नागरिकों की संख्या बढ़ेगी तो ये समर्थन डांवाडोल भी हो सकता है. किसी भी सैन्य अभियान में इसराइली सैनिकों का बड़ी संख्या में मारा जाना भी इसराइल की इच्छाशक्ति की परीक्षा होगा.

जहां तक सैन्य अभियान का सवाल है, ग़ज़ा की सीमा पर अब तक तीन लाख से अधिक रिज़र्व सैनिकों को बुलाया गया है. ये इसराइल की नियमित सेना से अतिरिक्त हैं जिसमें एक लाख 60 हज़ार से अधिक सैनिक हैं.

हौसला है बुलंद
हमने इसराइल के कई रिज़र्व सैनिकों से बात की जो हाल ही में ग़ज़ा बॉर्डर पर पहुंचे हैं. इनका कहना है कि उनके हौसले ऊंचे हैं और वो लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

जब इसराइल पर हमास का हमला हुआ, नसीम श्रीलंका में थे, उन्होंने वापसी की टिकट ली और पहली फ्लाइट पकड़कर अपनी यूनिट में शामिल होने पहुंच गए.

वो कहते हैं, “ये हमारी मातृभूमि है और हम इसके लिए ही लड़ते हैं.”

चकी ने तुरंत अपनी सेल्स की नौकरी छोड़ दी. वो बताते हैं. “हम शांति चाहते हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश ये संभव नहीं है. अगर हमें शांति से रहना है तो हमें इसके लिए लड़ना ही होगा.”

इसराइल ग़ज़ा पर कार्रवाई के लिए एकजुट दिखाई देता है, समय बीत रहा है और इसराइल के सैनिक आगे बढ़ने के आदेश का इंतेज़ार कर रहे हैं. जितना अधिक सैनिकों को इंतज़ार करना पड़ेगा, उतना ही हौसले और तैयारी बनाये रखना मुश्किल होता जाएगा.

इसराइल ने फ़लस्तीनियों को शनिवार शाम तक उत्तरी इलाक़े खाली करने का आदेश दिया है जिससे संकेत मिल रहे हैं के ये ज़मीनी सैन्य अभियान कभी भी शुरू हो सकता है.

ज़मीनी हमले की तैयारियां

इसराइल का पहला मिशन ग़ज़ा के आसपास के इलाक़े को सुरक्षित करना और यहां घुसे हमास के चरमपंथियों का सफाया करना है. हमास के हमलावरों ने बीते शनिवार (सात अक्टूबर ) को हमला किया, जिसमें 1300 से अधिक इसराइली लोगों की मौत हुई है. हमलावरों ने 160 से अधिक लोगों को अग़वा कर लिया था.

इसराइल ने हमास के हमले के बाद ही ग़ज़ा पर भारी हवाई हमले शुरू कर दिए थे. इसराइल का कहना है कि वो हमास के नेताओं और इंफ़्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है.

पिछले छह दिनों में इसराइल की सेना ने गज़ा पर 6000 से अधिक बम गिराये हैं. इसकी तुलना में, 2011 में लीबिया में समूचे युद्ध के दौरान नेटो सहयोगी देशों ने कुल 7700 बम गिराये थे.

इसराइल के हवाई हमलों में अब तक 2250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.

इसराइल अपने ज़मीनी हमले की योजना को गुप्त ही रखेगा लेकिन वो लंबे समय से ऐसे अभियान की तैयारी कर रहा है.

इसराइल ने कई अरब डॉलर ख़र्च करके दक्षिणी क्षेत्र में ‘ग़ज़ा सिमुलेटर’ स्थल बनाया है, जिसे मिनी ग़ज़ा भी कहा जाता है. यहां इसारइली सैनिक ग़ज़ा जैसे हालात में लड़ाई की तैयारियां करते हैं.

सैनिकों को भीड़भाड़ वाली इमारतों, सुरंगों में लड़ने का प्रशिक्षण लेते हैं. अनुमान के मुताबिक़, हमास ने ग़ज़ा में एक हज़ार से अधिक सुरंगे बनाई हैं.

यरूशलम पोस्ट के पूर्व एडिटर और आईडीएफ़ पर कई किताबों के लेखक याकोब कात्ज़ कहते हैं कि इसराइल की सेना को इसी मक़सद के लिए विशेष ब्रिगेडों में अभियान चलाने के लिए तैयार किया गया है. सेना के इंजीनियर और बुलडोजर, ज़मीनी सैनिकों और टैंकों के साथ मिलकर अभियान चलाते हैं.

शहरी लड़ाई और सुरंगें
आईडीएफ़ के पूर्व कमांडर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मेजर जनरल याकोब अमिड्रोर मानते हैं कि हमास से लड़ना मुश्किल होगा.

वो कहते हैं कि हमास ने बूबी ट्रैप लगा दिए होंगे और दाख़िल होने के रास्ते और संकरी गलियों में आईईडी लगा दिए होंगे.

इसराइल का अनुमान है कि हमास के पास 30,000 लड़ाके हैं. उनके पास मशीन गन, रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (आरपीजी) और एंटी टैंक मिसाइलें हैं. इनमें से कुछ रूस में निर्मित हैं जैसे कॉर्नेट और वागोट रॉकेट.

हमास के पास अभी भी इसराइल पर दागे गए रॉकेट बड़ी तादाद में हैं. उसके पास स्वनिर्मित छोटे ड्रोन हैं, इनमें आत्मघाती ड्रोन भी शामिल हैं.

मेजर जनरल आमिड्रोर का अनुमान है कि हमास के पास सीमित संख्या में कंधे पर रखकर दागी जाने वाली कम दूरी की मिसाइलें भी हैं. लेकिन उनके पास इसराइल की तरह टैंक, तोपखाने और बख़्तरबंद गाड़ियां नहीं हैं.

इसराइल की सबसे बड़ी चुनौती घनी आबादी वाली शहरी गलियों में आमने सामने की लड़ाई होगी.

हालांकि इसराइल के पास ऐसी विशेष सैन्य यूनिटें हैं जिन्हें सुरंगों में लड़ने में महारथ हासिल है, जैसे कि इंजीनियरिंग यूनिट येहालोम और ऑकेत्स डॉग यूनिट.

कात्ज़ मानते हैं कि इसराइल के सैनिक तब तक सुरंगों में नहीं घुसेंगे जबतक ऐसा करना उनकी मजबूरी नहीं होगी. इसका एक कारण ये है कि हमास को इन सुरंगों की अधिक जानकारी हैं. कात्ज़ मानते हैं कि सुरंगों में घुसने के बजाये इसराइल की सेना इन्हें रॉकेटों और बमों के ज़रिये बर्बाद करने पर अधिक ध्यान केंद्रित रखेगी.

अग़वा किए गए लोगों का क्या होगा?
शनिवार को ही इसराइल की सेना ने बताया है कि उसने ग्राउंड अभियान में अग़वा किए गए कुछ लोगों के शव बरामद किए हैं. हालांकि इनकी तादाद नहीं बताई गई है.

अग़वा किए गए इसराइली लोगों का क्या होगा, ये ज़मीनी अभियान को और भी जटिल बना देता है.

जनरल गिलाड उस वार्ता का हिस्सा रहे थे जिसके बाद अग़वा किए गए इसराइली सैनिक गिलाड शालित को रिहा किया गया था. गिलाड को साल 2006 से 2011 तक हमास ने बंधक बनाये रखा था. उनके बदले एक हज़ार से अधिक फ़लस्तीनी क़ैदियों को रिहा किया गया था.

जनरल गिलाड कहते हैं कि सेना को अपने अभियान के दौरान अग़वा किए गए लोगों के अंजाम को भी ध्यान में रखना होगा. वो कहते हैं, “अगर हम कुछ ठोस नहीं करेंगे तो हमें और अधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा.”

लेकिन जनरल अमिड्रोर का मानना है कि अग़वा लोगों की वजह से अभियान नहीं रुकेगा.

“हम अंत तक हमास के ख़िलाफ़ लड़ेंगे और अभियान के दौरान ही हमें अग़वा किए गए इन लोगों को खोजना होगा.”

इसराइल का मक़सद क्या है?
30 साल तक आईडीएफ़ में सेवा देने वाले मेजर जनरल गिलाड कहते हैं कि इस अभियान का मक़सद अब तक ग़ज़ा में किए गए सभी अभियानों से बड़ा है. अब तक के अभियान हमास को सीमित करने पर केंद्रित थे, इसका मक़सद हमास को समाप्त करना है.

“इस बार हमें कुछ ऐसा करना होगा जो अधिक नाटकीय हो, निर्णायक सैन्य कार्रवाई हो जो इस क्षेत्र में इसराइल के दुश्मनों को रोके, उदाहरण के लिए हिज़बुल्लाह और ईरान.”

कात्ज़ मानते हैं कि इसराइल का मक़सद हमास को पूरी तरह से ख़त्म करना होगा ताकि वो दोबारा सैन्य ताक़त हासिल कर इसराइल पर हमला न कर सके. ‘हालांकि इसराइल ग़ज़ा पर फिर से क़ब्ज़ा करना नहीं चाहता है क्योंकि वो उन 21 लाख लोगों पर शासन नहीं करना चाहता जो उसे दुश्मन के रूप में देखते हैं.’

लेकिन हालिया इतिहास ये बताया है कि आक्रमण योजना के अनुसार नहीं चलते हैं.

यहां तक कि दुनिया की सबसे उन्नत सेनाएं भी पिछड़ सकती हैं, अमेरिका का इराक़ और अफ़गानिस्तान में जो हुआ वो इसका उदाहरण है. या हाल ही में रूस की सेना का जो यूक्रेन में हुआ.

इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्ट्रेटिजिक स्टडीज़ से जुड़े जनरल टॉम बेकेट कहते हैं, “हालांकि गज़ा सिर्फ़ 40 किलोमीटर लंबा इलाक़ा है और यहां सैन्य अभियान उतना विस्तृत नहीं होगा. लेकिन इसका नतीजा क्या होगा, ये अनुमान लगाना अभी मुश्किल है.”

जनरल बेकेट कहते हैं, “वास्तव में, इसराइल के पास ग़ज़ा में अभियान का कोई अच्छा विकल्प नहीं है. भले ही हमास के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान कितना ही कामयाब हो, सैन्य रूप से हमास को कितना ही नुक़सान हो, लेकिन उसका राजनीतिक प्रभाव और लोगों का विद्रोहियों के प्रति समर्थन बना रहेगा.”

“या तो इसराइल ग़ज़ा पर क़ब्ज़ा करेगा और इसे अपने नियंत्रण में रखेगा या फिर हमले के बाद पीछे हट जाएगा और इस इलाक़ों को उन्हीं लोगों के पास छोड़ देगा जिनके लिए विद्रोह अस्तित्व का सवाल है.”