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इस्राईल ने गिरफ्तार किये 3365 फ़िलिस्तीनी, ग़ज़्ज़ा की जंग, नेतन्याहू के ताबूत में आख़िरी कील साबित नहीं हो रही है : रिपोर्ट

निर्दोष फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध ज़ायोनी, विभिन्न ढंग से अत्याचार करते आ रहे हैं जिनमें से एक उनकी गिरफ़्तारी भी है।

अलअक़सा तूफान आपरेशन आरंभ होने के समय से ज़ायोनियों ने अब तक 3365 फ़िलिस्तीनियों को गिरफ़्तार किया है।

फ़िलिस्तीनियों की बंदियों से संबन्धित संस्था ने घोषणा की है कि 7 अक्तूबर के बाद से इस्राईली सैनिकों की ओर से जितने फ़िलिस्तीनी गिरफ़्तार किये गए हैं उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। इस संस्था के अनुसार ज़ायोनियों ने इस दौरा तीन हज़ार तीन सौ पैंसठ फ़िलिस्तीनियों को विभिन्न बहानों से गिरफ़्तार किया है।

फ़िलिस्तीनियों की बंदियों से संबन्धित संस्था के अनुसार पिछले 24 घण्टों के दौरान जार्डन नदी के पश्चिमी तट पर 40 फ़िलिस्तीनियों को गिरफ़्तार किया गया। गिरफ़्तार किये गए फ़िलिस्तीनियों में महिलाएं भी शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि अवैध ज़ायोनी शासन की ओर से दशकों से फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों के परिवेष्टन और लगभग दो दशकों से ग़ज़्ज़ा के घेराव के बाद हमास ने इस्राईल के विरुद्ध 7 अक्तूबर 2023 को एक अलअक़सा तूफ़ान नामक सैन्य अभियान आरंभ किया था।

इसके बाद ज़ायोनियों ने ग़ज़्ज़ा पर भीषण बमबारी की जो पूरे विश्व में विरोध के बावजूद लगभग पचास दिनों तक जारी रही। ज़ायोनियों के इन हमलों में 15000 से अधिक फ़िलिस्तीनी शहीद और हज़ारों अन्य घायल हो गए। इसके अतिरिक्त ग़ज़्ज़ा को बहुत अधिक आर्थिक क्षति भी हुई।

ग़ज़्ज़ा की जंग, नेतन्याहू के ताबूत पर आख़िरी कील तो साबित नहीं हो रही है

आख़िरकार सात दिन के युद्ध विराम की समाप्ति के बाद इस्राईल ने एक बार फिर ग़ज़्ज़ा पर भीषण हमले शुरु कर दिए जिसके दौरान दसियों फ़िलिस्तीनी शहीद और घायल हो गये।

इस्राईल और हमास के बीच पहले चार दिन की जंग बंदी का समझौता हुआ जो दो दिन के लिए बढ़ा दिया गया और फिर उस अवधि में एक दिन का और भी विस्तार किया गया ताकि क़ैदियों का आदान प्रदान हो सके। गुरुवार की रात जैसे ही युद्ध विराम समाप्त हुआ शुक्रवार की सुबह ही इस्राईल ने ग़ज़्ज़ा के कई इलाक़ों पर भीषण बमबारी की जिसमें कम से कम 29 फ़िलिस्तीनी शहीद और दर्जनों घायल हो गए हैं।

इससे पहले विश्व खाद्य संगठन “डब्ल्यूएफडी” के कार्यकारी निदेशक सिंडी मैक्केन ने चेतावनी दी है कि अगर इस्राईल और हमास के बीच संघर्ष विराम समाप्त होता है और युद्ध फिर से शुरू होता है, तो ग़ज़्ज़ा में भुखमरी शुरू हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि ग़ज़्ज़ा में जो हो रहा है वह दुखद है और हमें हर हाल में ग़ज़्ज़ा के लोगों तक खाना पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि ज़रूरत इस बात की है कि हम खुद वहां जाकर संतुष्ट हो सकें कि जरूरतमंदों तक खाना पहुंच रहा है।

इस्राईल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू को आंतरिक और बाहरी दबावों का सामना है। आंतरिक दबाव और क़ैदियों की रिहाई के समझौते की वजह से वह युद्ध विराम पर राज़ी तो हो गये क्योंकि क़ैदियों की रिहाई के लिए समझौता करने पर उन पर भारी दबाव था और इस्राईली जनमत लगातार प्रदर्शन करके क़ैदियों की रिहाई के लिए दबाव डाल रहा था जबकि दूसरी ओर उनके मंत्रीमंडल के दो कट्टरपंथी मंत्रियों ने उनसे साफ़ तौर पर कह दिया था कि अगर युद्ध विराम में विस्तार हुआ तो वह उनकी सरकार ही गिरा देंगे।

इस्राईल ने जब से ग़ज़्ज़ा पर बमबारी शुरु की है तब पूरी दुनिया ख़ासतौर पर यूरोपीय देशों में इस्राईल और नेतन्याहू के ख़िलाफ़ और फ़िलिस्तीनियों के समर्थन में प्रदर्शन हो रहे हैं।

दुनिया के ज़्यादातर लोग ग़ज़्ज़ा में युद्ध विराम की मांग कर रहे हैं लेकिन इस्राईल किसी की बात पर ध्यान देने को तैयार नहीं है। हमास के ख़ात्मे की सपना देने वाले नेतन्याहु को अब तक क्या मिला? क्या 50 से अधिक समय तक ग़ज्ज़ा को बारूद के ढेर में बदलने वाले नेतन्याहू अपने मक़सद में कामयाब हो गये और हमास के ख़तरे से उन्होंने ज़ायोनियों को सुरक्षित कर लिया।

यहां पर ध्यान देने योग्य बात यह है कि ग़ज़्ज़ा पर लगभग 53 दिन तक आग बरसाने के बावजूद इस्राईली सेना को ग़ज़्ज़ा में कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ा और अब भी युद्धविराम के बाद जब दोबारा जंग शुरु हुई तब भी उसे कई मोर्चों पर मुंहतोड़ जवाब मिल रहा है।

आज भी फ़िलिस्तीनी संगठनों ने इस्राईल के हमलों के जवाब में इस्राईल के कई शहरों और सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं जबकि सदीरूत और असक़लान जैसी इस्राईली बस्तियों के निवासियों को शरणस्थलों में चले जाने की अपील की गयी है। अब तक इस्राईली नेताओं की यह बात समझ में आ चुकी है कि हमास को ख़त्म करने का सपना, एक सपना ही है लेकिन वह इस्राईल के आम जनमत को धोखा देने के लिए ग़ज़्ज़ा को अपनी क्रूरता का निशाना बनाए हुए है।