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इस बात के कहीं से कोई संकेत नहीं हैं कि हमास हार जायेगा : इस्राईली मीडिया – video

दोस्तो हमास और अवैध जायोनी शासन के बीच जारी युद्ध तीसरे महीने में दाखिल हो चुका है।

रोचक बात यह है कि इस असमान युद्ध में अमेरिका और पश्चिमी व यूरोपीय देश भी इस्राईल का साथ दे रहे हैं। यही नहीं अमेरिका हथियारों की कई खेप इस्राईल पहुंचा चुका है और उसके सैनिक भी इस्राईली सैनिकों के साथ हमास के खिलाफ लड़ रहे हैं परंतु आज तक अमेरिकी और इस्राईली सैनिक उन बंदियो में से एक भी बंदी को आज़ाद नहीं करा सके हैं जो हमास के नियंत्रण में हैं और मजबूर होकर उन्होंने अस्थाई युद्धविराम किया था परंतु इस्राईल ने फिर फिलिस्तीन के निर्दोष और मज़लूम लोगों के खिलाफ अपने पाश्विक हमलों को आरंभ कर दिया और उसकी बर्बरता में अब तक साढ़े 18 हज़ार से अधिक फिलिस्तीनी शहीद हो चुके हैं और शहीद होने वालों में सबसे अधिक संख्या बच्चों और महिलाओं की है।

यह उस हालत में है जब पश्चिमी व यूरोपीय देश विशेषकर अमेरिका मानवाधिकारों की रक्षा का राग अलापते हैं और स्वयं को मानवाधिकारों की रक्षा का ठिकेदार भी समझते हैं। इस्राईल के मानवता विरोधी जघन्य अपराधों में अमेरिका न केवल शामिल है बल्कि उसने गज्जा पट्टी में युद्ध विराम के प्रस्ताव का सुरक्षा परिषद में दो बार वीटो करके इस्राईल को अपने अपराधों को जारी रखने के लिए हरी झंडी दे दी है।

बहुत से जानकार हल्कों का मानना है कि अगर इस्राईल को अमेरिका, पश्चिमी व यूरोपीय देशों का समर्थन प्राप्त न होता तो इस्राईल इतनी निर्ममता व क्रूरता के साथ अपने अपराधों को जारी ही नहीं रख सकता था। यही नहीं इन हल्कों का मानना है कि इन देशों का समर्थन ही इस्राईल के बाकी रहने का आधार व असली कारण है और अगर इन देशों विशेषकर अमेरिका का व्यापक समर्थन न होता तो इस्राईल बहुत पहले घुटने टेक देता मगर आज तक जो इस्राईली अपराध जारी हैं तो उसकी मुख्य वजह अमेरिका का व्यापक समर्थन है।

इस्राईली समाचार पत्र एदीऊत अहारनूत ने एक जायोनी अफसर के हवाले से लिखा है कि जायोनी सैनिकों ने कहा था कि हमास को खत्म करने में 7 से 10 दिन का समय लगेगा परंतु इस काम के लिए 6 महीने की ज़रूरत है। इसी प्रकार इस्राईली समाचार पत्र एदीऊत अहारनूत ने लिखा है कि हवाई बमबारी से हमास को खत्म करना असंभव है।

इसी बीच एक इस्राईली सैन्य विशेषज्ञ आमूस हरील ने समाचार पत्र हारेत्ज़ से वार्ता में कहा है कि बहुत कठिन है कि इस्राईली सैनिक गज्जा पट्टी में अपने लक्ष्यों को व्यवहारिक बना सकें। इसी प्रकार इस्राईली विश्लेषक ने कहा कि सेना को बहुत अधिक जानी व माली क्षति हो चुकी है परंतु इस बात के कहीं से कोई संकेत नहीं हैं कि हमास हार जायेगा।

जानकार हल्कों का कहना व मानना है कि इस्राईल को बहुत अच्छी तरह अंदाजा हो गया है कि वह हमास को खत्म नहीं कर सकता और अब तक इस्राईल को जान व माल की जो क्षति हो चुकी है उसी से इस्राईल को हमास की ताकत का अंदाज़ा हो गया है और वह विश्व जनमत को यह समझाने के लिए अपने पाश्विक हमलों को जारी रखे हुए कि वह शक्तिशाली है मगर विश्वजनमत बहुत अच्छी तरह जान गया कि इस्राईल बहादुर नहीं बल्कि रक्तपिपासु और निर्दोष लोगों का हत्यारा है और अस्ली बहादुर और शूरवीर हमास है जो इस्राईल के अवैध कब्ज़े से अपनी मातृभूमि की आज़ादी के लिए लड़ रहा है और वह दिन अधिक दूर नहीं है जब फिलिस्तीन और मस्जिदुल अक्सा इस्राईल के अवैध कब्जे से स्वतंत्र हो जायेंगे।

 

ग़ज़ा में तत्काल युद्ध विराम का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र की महासभा में भारी बहुमत से मंज़ूर

संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में ग़ज़ा में तत्काल संघर्ष विराम का प्रस्ताव भारी बहुमत से पास हो गया है।

महासभा के 193 सदस्यों में से 153 ने इस प्रस्ताव के पक्ष में जबकि 10 मुल्कों ने इसके विरोध में मतदान किया। 23 देश वोटिंग से ग़ैर हाज़िर रहे।

प्रस्ताव के विरोध में मतदान करने वालों में अमरीका और इस्राईल सबसे आगे थे।

फ़िलिस्तीनी प्रशासन के राजदूत ने प्रस्ताव की मंज़ूरी को एतिहासिक दिन क़रार दिया, प्रस्ताव में मानवीय सहायता ग़ज़ा पहुंचाने और क़ैदियों की बिना शर्त रिहाई की मांग की गई है।

जनरल असेंबली के अध्यक्ष डेनिस फ़्रांसिज़ ने कहा कि इंसानी ज़िंदगियां बचाना सबकी की प्राथमिकता होनी चाहिए और हमें जंग के बुनियादी उसूलों और सिद्धांतों से नहीं हटना चाहिए।

जनरल असेंबली के अध्यक्ष का कहना था कि इस समय ग़ज़ा में इंसानी ज़िंदगियों का अंत होता दिखाई दे रहा है और इस्राईल लगातार अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन कर रहा है।

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में भी ग़ज़ा में तत्काल संघर्ष विराम लागू करने का प्रस्ताव अमरीका ने वीटो कर दिया था।