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ईरान और क़तर ने व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर बल दिया : रिपोर्ट

9वें ईरान-कतर संयुक्त आर्थिक सहयोग आयोग ने शनिवार को ईरान के ऊर्जामंत्री अली अकबर मेहराबियान और क़तरी उद्योग और व्यापार मंत्री शैख मोहम्मद बिन हमद बिन क़ासिम अल अब्दुल्लाह आले-सानी की अध्यक्षता में अपना काम शुरू कर दिया।

ईरान और कतर के बीच आर्थिक सहयोग और रचनात्मक बातचीत को बढ़ाने के उद्देश्य से ईरान-कतर संयुक्त आर्थिक सहयोग आयोग का आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता है।

यह आयोग चार विशेषज्ञ समितियों के रूप में आयोजित किया जाता है जिनमें व्यापार समिति, बुनियादी ढांचा समिति, सामाजिक और सांस्कृतिक समिति और ऊर्जा समिति शामिल हैं। ईरान और क़तर के बीच संयुक्त आर्थिक सहयोग का 9वां आयोग सोमवार तक जारी रहेगा।

ईरान-क़तर संयुक्त आर्थिक सहयोग आयोग के 9वें सत्र की पूर्व संध्या पर, क़तर के उद्योग और व्यापार मंत्री और इस आयोग के क़तरी अध्यक्ष ने ईरान के ऊर्जामंत्री और संयुक्त आर्थिक सहयोग आयोग के ईरान ने अपनी टेलीफोन पर बातचीत के दौरान संबंधों के विकास के लिए एक व्यापार संबंध परिषद की स्थापना के मुद्दे पर ज़ोर दिया।

ईरान की वर्तमान रईसी सरकार, विदेश नीति की परिधि में अपने पड़ोसी देशों और मुस्लिम और गठबंधन देशों पर विशेष रूप से ध्यान देती है और इस संदर्भ में हमेशा से ही इन देशों के साथ राजनीतिक परामर्श बढ़ाने और आर्थिक संबंधों के विस्तार को प्राथमिकता दी गई है।

ईरान में राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी के सत्ता संभालने के बाद लगभग 2 साल पहले राष्ट्रपति ने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए क़तर को चुना और नरेश से मुलाक़ात की थी। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच विमानन, वाणिज्यिक, शिपिंग, मीडिया, बिजली, साथ ही सांस्कृतिक और शैक्षिक मुद्दों पर 14 सहयोग दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए। कतर नरेश ने भी लगभग 1 साल बाद उच्चाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान की यात्रा की थी।

क़तर और ईरान के बीच संबंध हमेशा सम्मान और अच्छे पड़ोसी जैसे सिद्धांतों पर आधारित रहे हैं और पड़ोसी और संयुक्त धर्म दोनों पक्षों के बीच संबंधों के गठन में महत्वपूर्ण कारक रहे हैं।

दो मुस्लिम देशों के रूप में, ईरान और कतर फ़ार्स की खाड़ी के महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र में स्थित देश हैं और दोनों के क्षेत्र के महत्वपूर्ण मुद्दों में निकट दृष्टिकोण रहे हैं।

फ़ार्स की खाड़ी के उत्तर और दक्षिण में दोनों देशों को अलग करने वाली 250 किलोमीटर की समुद्री सीमाओं की वजह से आर्थिक संबंधों के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण क्षमता प्रशस्त होती है।

चूंकि ईरान और क़तर क्षेत्र और दुनिया में ईंधन संसाधनों के उत्पादकों और निर्यातकों में से हैं इसलिए दोनों देशों के बीच व्यापार का प्रमुख हिस्सा ग़ैर-पेट्रोलियम व्यापार है।