दुनिया

ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका और उसके सहयोगी इतनी गिरी हुई हरकत पर क्यों उतर आया वॉशिंग्टन?

ईरान की सीमा सुरक्षाबल के कमांडर ने बताया है कि पिछले 45 दिनों के भीतर 600 युद्ध के हथियार सीमा सुरक्षाबल के जवानों ने ज़ब्त किया है।

समाचार एजेंसी इर्ना की रिपोर्ट के मुताबिक़, इस्लामी गणराज्य ईरान की सीमा सुरक्षाबल के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अहमद अली गूदर्ज़ी ने देश के दक्षिण-पूर्व में स्थित सीस्तान-बलूचिस्तान प्रांत की सीमाओं की निरीक्षण यात्रा के दौरान पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि पिछले 45 दिनों में सीमा सुरक्षाबल के जवानों ने हथियार और गोला बारूद की तस्करी करने वाले कई गिरोह का भांडा फोडा है। इस दौरान 600 युद्धक हथियार मिले हैं जिसे सुरक्षा बलों ने ज़ब्त कर लिया है। जनरल गूदर्ज़ी ने कहा कि पिछले 45 दिनों में इतनी मात्रा में युद्धक हथियारों का मिलना अभूतपूर्व रहा है और पिछले साल की की तुलना में 26 प्रतिशत हथियारों की तस्करी करने के मामले में वृद्धि हुई है। सीमा सुरक्षाबल के कमांडर ने हालिया दिनों में ईरान में होने वाले दंगों और उपद्रवों की ओर इशारा करते हुए कहा कि इन दंगों की पीछे बच्चों का हत्यारा अवैध ज़ायोनी सासन, अमेरिका और उसके सहयोगियों की साज़िश है।

उल्लेखनीय है कि महसा अमीनी की मृत्यु के बहाने ईरान में आरंभ होने वाले उपद्रव के दौरान ईरान विरोधी शक्तियों ने इसे ईरान में हस्तक्षेप के लिए प्रयोग किया। इस दौरान अमरीकी और कुछ पश्चिमी नेताओं ने ईरानी राष्ट्र के समर्थन की आड़ में उपद्रवियों का समर्थन किया और देश में अशांति फैलाने वालों का खुलकर साथ दिया। हालिया दंगों में, अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों के राजनीतिक नेताओं, उनके द्वारा संचालित मीडिया के साथ-साथ पश्चिम एवं सऊदी अरब द्वारा चलाए जा रहे फ़ार्सी भाषा के समाचार चैनलों ने ईरान में दंगों को भड़काने के लिए एक ऐसी दुखद घटना का दुरुपयोग किया कि जिसकी जांच की जा रही है। इन्होंने ईरानी दुश्मनी की सारी हदें पार करते हुए दंगाईयों का समर्थन किया ताकि पूरे देश को अशांति की आग में झोंक सकें। वहीं इनकी साज़िशों का ईरान की जनता ने स्वयं मुंहतोड़ जवाब दिया। लाखों की संख्या में देश की जनता ने सड़कों पर उतकर जहां इस्लामी क्रांति, इस्लामी व्यवस्था और देश की सरकार का पूरा समर्थन किया वहीं ईरानी राष्ट्र के दुश्मनों की सारी साज़िशों पर पानी फेर दिया।