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उसके बाद रसूल (स०) ने किसी अच्छे ज़माने का ज़िक्र नहीं किया!

Farooque Rasheed Farooquee
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सबसे अच्छा ज़माना
हमारे पैग़म्बर सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि सबसे अच्छा ज़माना मेरा ज़माना है, फिर वह ज़माना जो मेरे बाद आए, फिर वह ज़माना जो उसके बाद आए। उसके बाद रसूल (स०) ने किसी अच्छे ज़माने का ज़िक्र नहीं किया।

यहां ज़माने की अच्छाई को Standard Of Living और High Status Of Life से नहीं जोड़ा गया। इस हदीस से यह भी वाज़ेह है कि दुनिया के सबसे अच्छे लोग जिन्हें अल्लाह और अल्लाह के रसूल (स०) ने सबसे अच्छा बताया वह Scientific Age में नहीं आए। अल्लाह ने सहाबा-ए-कराम, ताबिईन और तबे-ताबिईन पर खोज और ईजादात की ज़िम्मेदारी नहीं डाली। यह बात भी साफ़ हो गई कि दीन की तब्लीग़ के लिए बुनियादी तौर पर इन मशीनों की और एशो-आराम की ज़रूरत नहीं थी। रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ने लोगों की तरबियत करके, उन्हें मिसाली किरदार बनाकर बहुत से इलाक़ों में भेजा। सहाबा (रज़ि०) और उनके बाद आने वाली नस्लों ने दुनिया में इस्लाम फैलाया। जिस पैग़म्बर (स०) और जिन सहाबा के लिए अल्लाह की जन्नत इंतज़ार कर रही थी और वही उनका मक़सद और उनका हमेशा का ठिकाना थी उनके लिए खोज और ईजादात को मंज़िल नहीं बनाया गया। उनकी सारी सलाहियतें, सारा इल्म, अक़्ल और ताक़त अल्लाह और अल्लाह के रसूल(स०) की फ़रमांबरदारी में लग गई। यह इसी तरह होना था, यही अल्लाह की हिकमत और मर्ज़ी थी। तब दुनिया को यह ख़तरा नहीं था कि वह एक Nuclear Bomb से तबाह हो सकती है। हर ईमान वाले का यह लाज़िमी अक़ीदा है कि दुनिया के सबसे अच्छे इंसान और सारे नबियों के इमाम हमारे पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद सललल्लाहु अलैहि वसल्लम थे और उनका ज़माना सबसे अच्छा ज़माना था। उन पर करोड़ों दुरूदो-सलाम–

तेरे तज़किरे के क़ाबिल मेरी आजिज़ी कहां है
तेरा नाम है मुहम्मद (स०) तेरी बज़्म आसमां है

नोट – आज के दौर के मुसलमानों को नई खोज और ईजादात करना चाहिए। मुसलमानों में बहुत अच्छे Scientists, Inventors और Discoverers होना चाहिए और उन्हें अच्छा मुसलमान भी होना चाहिए। क़ुरआन शरीफ़ में फ़रमाया गया है कि इस कायनात पर ग़ौर करो और इसे समझो। सारी खोजें और आविष्कार ग़ौर और फ़िक्र का नतीजा हैं। मुसलमानों में अच्छे साइंटिस्ट्स की सख़्त ज़रूरत है।

(फ़ारूक़ रशीद फ़ारुक़ी)