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ऐसी है ‘पद्मश्री’ पंकज उधास के जन्म से लेकर अंत तक की कहानी!

Pankaj Singh Aajaad
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‘ खून के रिश्ते तोड़ गया तू, आंख में आंसू छोड़ गया तू’,

ऐसी है ‘पद्मश्री’ पंकज उधास के जन्म से लेकर अंत तक की कहानी

संगीत जगत के दिग्गज और पद्मश्री विजेता पंकज उधास ने, 26 फरवरी 2024 को आखिरी सांस ली. चिट्ठी आई है और चांदी जय रंग जैसी गजलों के लिए जाने जाने वाले अनुभवी गजल गायक का लंबी बीमारी के कारण निधन हो गया. वह 72 साल के थे.

पंकज उधास की जीवनी
17 मई, 1951 को जेतपुर, गुजरात में जन्मे, पंकज उधास ने गजल के अर्ध-शास्त्रीय रूप में आने से पहले बॉलीवुड में एक प्लेबैक सिंगर के रूप में अपना करियर शुरू किया. अपने करियर के दौरान, उन्होंने 60 से अधिक सोलो एल्बम जारी किए हैं और पूरी दुनिया में कॉन्सर्ट के जरिए परफॉर्म किए हैं. उन्हें 2003 में पद्म श्री सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है.

प्रारंभिक जीवन
बचपन में, पंकज उधास को संगीत का शौक था और उन्होंने शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षण लिया था. उन्होंने प्रारंभिक प्रशिक्षण अपने बड़े भाई कांतिलाल उधास और बाद में उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान से प्राप्त किया. सेंट जेवियर्स स्कूल, अहमदाबाद से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, वह संगीत में अपना करियर बनाने के लिए मुंबई चले गए. प्लेबैक सिंगर के रूप में करियर शुरू करने से पहले उन्होंने कई सालों तक शास्त्रीय संगीत का अध्ययन किया. उनके बड़े भाई, मनहर उधास, पहले से ही बॉलीवुड में एक सफल प्लेबैक सिंगर थे, जिससे पंकज के लिए संगीत की दुनिया में कदम रखने में काफी मदद मिली.

करियर
1979 में, पंकज उधास ने फिल्म ‘हम तुम और वो’ के लिए प्लेबैक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने साथ-साथ (1982), उत्सव (1984) और प्रेम प्रतिज्ञा (1989) जैसी कई अन्य फिल्मों के लिए गाना गाया. हालांकि, 1984 में उनके पहले सोलो एल्बम आहट की रिलीज के साथ ही उन्हें गजल गायक के रूप में बड़ी पहचान मिली. अपने करियर के दौरान उन्होंने 60 से अधिक एल्बम जारी किए हैं. उन्होंने जगजीत सिंह, आशा भोंसले, लता मंगेशकर और अनूप जलोटा जैसे कई अन्य कलाकारों के साथ भी काम किया है. उनके गाने कई फिल्मों और टेलीविजन शो में दिखाए गए हैं.

उधास की सुरीली आवाज, गजल कविता की गहरी समझ के साथ, श्रोताओं के बीच गहराई से गूंजती रही. वह गजलों को मुख्यधारा में लाने में अग्रणी बन गए, जिससे वे शैली के पारखी लोगों से परे व्यापक दर्शकों के लिए सुलभ हो गईं. फिल्म ‘नाम’ (1986) के ‘चिठ्ठी आई है’ और ‘आ गले लग जा’ जैसे गीतों ने उन्हें एक घरेलू नाम के रूप में स्थापित किया, जिससे भारत के प्रमुख गजल गायकों में से एक के रूप में बड़े स्तर पर उनकी पहचान बनी. अपनी संगीत प्रतिभा के अलावा, उधास अपने विनम्र और व्यावहारिक व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे. पंकज उधास की आवाज हर जगह गजल प्रेमियों के दिलों में हमेशा के लिए बस गई है.

अवॉर्ड्स:
2013 -उन्हें 2013 में ऑल इंडिया गालिब अकादमी द्वारा गालिब पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था.

2006 – पंकज उधास को गजल गायन की कला में उनके योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया, उनके गजल गायन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कैंसर रोगियों और थैलेसीमिक बच्चों के लिए उनके महान योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया.

2006 – ‘हसरत’ के लिए ‘2005 का बेस्ट गजल एल्बम’ के रूप में कोलकाता में प्रतिष्ठित ‘कलाकार’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

2004 – प्रतिष्ठित स्थल पर प्रदर्शन के 20 साल पूरे होने पर वेम्बली कॉन्फ्रेंस सेंटर, लंदन में विशेष अभिनंदन.
2003 – सफल एल्बम ‘इन सर्च ऑफ मीर’ के लिए एमटीवी इमीज अवार्ड.
2003 – दुनिया भर में गजलों को लोकप्रिय बनाने के लिए बॉलीवुड म्यूजिक अवार्ड, न्यूयॉर्क में विशेष उपलब्धि पुरस्कार.
2003 – गजल और संगीत की दुनिया में योगदान के लिए दादाभाई नौरोजी इंटरनेशनल सोसाइटी द्वारा दादाभाई नौरोजी मिलेनियम पुरस्कार प्रदान किया गया.
2002 – मुंबई में सहयोग फाउंडेशन ने संगीत के क्षेत्र में श्रेष्ठता के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया.
2002 – इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा सम्मानित.
2001 – गजल सिंगर के रूप में आउटस्टैंडिंग परफॉर्मेंस के लिए रोटरी क्लब ऑफ मुंबई डाउनटाउन ने वोकेशनल रिकॉग्निशन अवार्ड से नवाजा.
2001 – 2001 में उन्होंने गजल सिंगगिंग के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी जीता.
1999 – भारतीय संगीत, विशेष रूप से भारत और विदेशों में गजलों को बढ़ावा देने के लिए असाधारण सेवाओं के लिए भारतीय विद्या भवन, यूएसए पुरस्कार. न्यूयॉर्क में आयोजित गजल महोत्सव में प्रस्तुत किया गया.
1998 – जर्सी सिटी के मेयर द्वारा भारतीय कला पुरस्कार समारोह प्रस्तुत किया गया.
1998 – अटलांटिक सिटी में अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्टिस्ट्स द्वारा आउटस्टैंडिंग आर्टिस्टिक अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया.
1996 – संगीत में आउटस्टैंडिंग सर्विसेस, अचीवमेंट्स और योगदान के लिए इंदिरा गांधी प्रियदर्शनी पुरस्कार.
1994 – लब्बॉक टेक्सास, अमेरिका की मानद नागरिकता.
1994 – आउटस्टैंडिंग अचीवमेंट और रेडियो की आधिकारिक हिट परेड में परफॉर्म किए गए कई गानों के लिए रेडियो लोटस अवार्ड. डरबन विश्वविद्यालय में रेडियो लोटस, दक्षिण अफ्रीका द्वारा प्रस्तुत किया गया.
1993 – संगीत के क्षेत्र में एक्स्ट्राऑर्डिनरी एफर्ट्स अचीव करने के लिए जाइंट्स इंटरनेशनल अवार्ड, जिससे पूरे कम्यूनिटी को उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरणा मिली.
1990 – पॉजिटिव लीडरशिप और राष्ट्र को प्रदान की गई विशिष्ट सेवाओं के लिए आउटस्टैंडिंग यंग पर्सन्स अवॉर्ड (1989-90). इंडियन जूनियर चैंबर्स द्वारा प्रस्तुत किया गया. उन्होंने ‘नाम’ के गाने ‘चिट्ठी आई है’ के लिए बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता.
1985 – साल का बेस्ट गजल सिंगर होने के लिए के एल सहगल पुरस्कार.

पंकज उधास के 10 बेस्ट गाने
1. चिट्ठी आई है
2. और आहिस्ता किजी बातें
3. थोड़ी थोड़ी पिया करो
4. चांदी जैसा रंग है तेरा
5. मैं नशे में हूं
6. एक तरफ उसका घर
7. दिल धड़कने का सबब याद आया
8. निकलो ना बेनकाब ज़माना ख़राब है
9. दीवानों से मिलकर रोना अच्छा लगता है
10 आज जिनके करीब होते हैं।