धर्म

क़ुरआन : अल्लाह का संदेश….By-Farooque Rasheed Farooquee

Farooque Rasheed Farooquee
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क़ुरआन : अल्लाह का संदेश (जीवन संदेश)
तुझसे लफ़्ज़ों का नहीं रूह का रिश्ता है मेरा
तू ही फैला है मेरी रूह में ‌ख़ुशबू की तरह‌

क़ुरआन मानव जाति के लिए अल्लाह का संदेश है। क़ुरआन को अल्लाह ने हमारे समक्ष व्याख्यान अर्थात बयान के रूप में प्रस्तुत किया है। यह पवित्र पुस्तक किसी काल विशेष, क्षेत्र विशेष, अथवा संप्रदाय विशेष के लिए नहीं भेजी गई थी। यह मानव जाति के लिए मार्गदर्शन का अंतिम संदेश है‌ और हर युग के लिए है। क़ुरआन में 6236 आयतें, 558 रुकू‌, 114 अध्याय और 30 पारे हैं। प्रथम अध्याय सूरै फ़ातिहा है। यह क़ुरआन की अत्यंत महत्वपूर्ण सूरत है। इस सूरत के बग़ैर नमाज़ अदा नहीं हो सकती। यह प्रथम अध्याय क़ुरआन के किसी भी पारे का हिस्सा नहीं है।

क़ुरआन हमें एक आदर्श आचार संहिता देता है। यह हमें जीवन-मार्ग दिखाता है। यह हमें बताता है कि जीवन में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। जो क़ुरआन का संदेश मानते हैं और उनका अनुपालन करते हैं , मुस्लिम कहलाते हैं। मुस्लिम शब्द का अर्थ है–ऐसा व्यक्ति जिसने अपनी इच्छा से स्वयं को अल्लाह के प्रति समर्पित कर दिया हो। मुस्लिम शब्द की व्याख्या इस प्रकार भी की जा सकती है कि ऐसा व्यक्ति जिसने क़ुरआन का संदेश मान लिया और पैग़म्बर मुहम्मद सललल्लाहु अलैहि वसल्लम को अपना आदर्श मान लिया तथा उनके निर्देशों के अनुसार कर्म किए। क़ुरआन अल्लाह के द्वारा एक फ़रिश्ते जिब्रील अलैहिस्स सलाम के माध्यम से पैग़म्बर मोहम्मद सललल्लाहु अलैहि वसल्लम पर उतारा गया। क़ुरआन हमारे पैग़म्बर के पास छोटे-छोटे अंशों में आवश्यकतानुसार,‌ परिस्थिति के अनुसार विभिन्न अवसरों पर और विभिन्न स्थानों में भेजा गया। क़ुरआन की सभी आयतें हमारे पैग़म्बर सलललल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास 23 वर्ष की अवधि में पहुॅंचीं। क़ुरआन रमज़ान के महीने में उतरना शुरू हुआ। रमज़ान के पवित्र महीने का महत्व इसलिए है कि इस महीने में क़ुरआन उतरा। क़ुरआन आवश्यकतानुसार अन्य महीनों में भी उतरा है। किंतु इसका उतरना माह-ए-रमज़ान में शुरू हुआ। क़ुरआन गद्य (Prose) के स्वरूप में है किंतु इसकी भाषा काव्यात्मक (Poetic) है। इसमें एक काव्य का प्रवाह है। इसे एक महाकाव्य बिल्कुल नहीं कह सकते। हाॅं इसे काव्यात्मक भाषा कहा जा सकता है।

जीवन के हर क्षेत्र में दिशा-निर्देश देने के लिए क़ुरआन एक संपूर्ण पुस्तक है। इसका आधुनिक,‌ मध्यकालीन अथवा प्राचीन युग से कोई विशेष संबंध नहीं है। यह अपने संदर्भ एवं प्रसंग में पूरे संसार में हर समाज के लिए एक जैसा महत्व रखता है। यह बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए कि क़ुरआन हर युग के लिए है। हर समाज के लिए है। हर क्षेत्र के लिए है और हर व्यक्ति के लिए है। वह अल्लाह जो इस ब्रह्मांड का रचयिता है, पालनहार है वही मानव स्वभाव को बनाने वाला तथा मनुष्य की हर आवश्यकता पूरी करने वाला है। इसीलिए यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि अल्लाह के संदेश और आदेश बदले नहीं जा सकते। मनुष्य विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न परिवर्तनों से गुज़रता है। मनुष्य आज एक बात का समर्थन करता है समय बीतने के साथ-साथ वह उसी तथ्य का विरोध कर सकता है, और करता है। मनुष्य परिवर्तित होता रहता है। मनुष्य को कभी संपूर्ण और आदर्श नहीं कहा गया। इसीलिए मनुष्य द्वारा बनाए गए संविधान को बदलने की आवश्यकता होती है। अल्लाह के साथ ऐसा नहीं है। अल्लाह के विधान की तुलना मनुष्य द्वारा निर्मित विधान से नहीं की जा सकती।

जब क़ुरआन उतर चुका था और केवल एक आयत का एक भाग क़ुरआन के अंतिम स्वरूप और दीन के अंतिम स्वरूप के प्रमाण पत्र के रूप में उतरना शेष था और हमारे पैग़म्बर सललल्लाहु अलैहि वसल्लम जीवन के अंतिम दौर में थे, तभी 9 ज़ुल हिज्जा को अरफ़ात के मैदान में हज के अवसर पर अल्लाह ने अपने पैग़म्बर सललल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास यह पैग़ाम भेजा——

“आज के दिन मैंने तुम्हारा दीन मुकम्मल कर दिया और तुम पर अपनी नेमत पूरी कर दी और अल्लाह तुमसे इस दिन के साथ राज़ी हुआ।”

क़ुरआन का प्रथम अध्याय यानी फ़ातिहा बहुत सुंदर प्रार्थना है। इस सूरत के एक भाग में अल्लाह की तारीफ़ है और दूसरे भाग में अल्लाह से दुआ की गई है। इस सूरत को अल्लाह ने अपने और अपने बंदों के बीच बांट दिया है । सूरत की एक आयत में अल्लाह से दुआ की गई है “हमको सीधा रास्ता दिखा।” जीवन का वह सीधा रास्ता क्या है,‌अर्थात वह रास्ता कैसा है जिस पर चलकर जीवन में और जीवन के बाद आख़िरत में सफलता मिले। इसी की व्याख्या में अध्याय 2 से अध्याय 114 तक अल्लाह ने सीधे रास्ते को स्पष्ट किया है। और उसी की व्याख्या की है।

क़ुरआन अरबी भाषा का शाहकार है। इस पुस्तक में अरबी अपने सुंदरतम‌ रूप में है। यह अरबी भाषा की समृद्धि एवं सौंदर्य का सर्वोत्तम उदाहरण है। क़ुरआन जीवन के हर क्षेत्र और हर परिस्थिति को समझते हुए मानव जाति को स्पष्ट दिशा-निर्देश देता है। एक सच्चे मुस्लिम को क़ुरआन समझना चाहिए और उसका पूर्ण अनुपालन करना चाहिए।हम सभी मुसलमानों को क़ुरआन के संदेश, उसके आदेश और उसकी भविष्यवाणियों में पूर्ण विश्वास होना चाहिए। यह हर मुस्लिम का कर्तव्य है की वह कुरान को समझे और पूरे संसार को स्पष्ट रूप से समझाए, उसकी व्यापक व्याख्या करे। यह तथ्य स्पष्ट होना चाहिए कि क़ुरआन मात्र मुस्लिम संप्रदाय की एक धार्मिक पुस्तक नहीं है। यह संदेश पूरे संसार के लिए है। यह मानव जाति के लिए है। यह संदेश हर युग के लिए है। यह अनंत शक्ति का अंतिम और संपूर्ण संदेश है। प्रत्येक व्यक्ति को यह संदेश पढ़ना चाहिए। अल्लाह के समक्ष प्रत्येक व्यक्ति को इस पुस्तक के अनुसार कर्म करने अथवा न करने का ज़िम्मेदार होना पड़ेगा।

क़ुरआन के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं—–
१-यह अल्लाह का कलाम (यानी किताब) है।
२-यह हमें जीवन की सीधी राह दिखाता है।
३-यह समानता एवं न्याय पर आधारित एक आदर्श सामाजिक व्यवस्था है।
४-यह सादा जीवन एवं उच्च विचार का आधार है।
५- यह एक ऐसी आचार संहिता है जो हर संप्रदाय, स्थान एवं क्षेत्र आदि के लिए उपयुक्त है।
६-यह घनघोर अंधेरे में प्रकाश का दीप है।
७-यह मन एवं मस्तिष्क हेतु शांति का संदेश है।
८-यह जीवन की सारी नैतिकताओं एवं मूल्यों को एक स्पष्ट दिशा -निर्देश एवं आधार देता है।

क़ुरआन की आधार भूत शिक्षा इस प्रकार है—-
१-अल्लाह के एक होने का विश्वास करना।
२-मुहम्मद सललल्लाहु अलैहि वसल्लम को अल्लाह का आख़िरी पैग़म्बर मानना।
३- इस बात का विश्वास होना कि हम सभी अपने अच्छे- बुरे कर्मों के लिए ज़िम्मेदार होंगे और आख़िरत के दिन उन्हीं कर्मों के साथ अल्लाह के सामने पेश किए जाएंगे। उन्हीं कर्मों के अनुसार हमें पुरस्कार अथवा दंड मिलेगा।अच्छे कर्मों का पुरस्कार जन्नत है और बुरे कर्मों का दंड जहन्नम है।

उपरोक्त शिक्षा में आस्था रखे बिना कोई व्यक्ति मुसलमान नहीं हो सकता।
क़ुरआन सर्वत्र फैले अंधकार में प्रकाश का महान स्रोत है। हमें निष्पक्ष होकर क़ुरआन का अध्ययन करना चाहिए और गंभीरता पूर्वक उस जीवन पर विचार करना चाहिए जो मृत्यु के बाद हमें मिलेगा। हमारा जीवन वास्तव में आत्मा का जीवन है। आत्मा एक ऊर्जा है। ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न उसे नष्ट किया जा सकता है। वह एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती है। इस प्रकार यह तो स्पष्ट है कि शरीर नष्ट होने के बाद भी हमारी आत्मा अर्थात हमारा अस्तित्व कभी नष्ट नहीं होगा। जिस अल्लाह ने हमें पैदा किया है उसके सामने हमें अपने कर्मों के साथ उपस्थित होना है। वहां कर्मों के अलावा कोई और शक्ति हमारा साथ नहीं देगी। सिर्फ अल्लाह की रहमत ही हम पर अपना साया कर सकेगी। हमें अपने उस जीवन पर विचार करना चाहिए जो मृत्यु के बाद है। वास्तव में वह नए जीवन की शुरुआत है। एक ऐसा जीवन जो कभी समाप्त नहीं होगा। मेरी शुभकामना है कि आप सभी वह हमेशा रहने वाला जीवन जन्नत में बिताएं। ऐसा करने के लिए आप एक बार क़ुरआन का गहन अध्ययन अवश्य करें यह मेरी आप सबसे विनम्र प्रार्थना है। क़ुरआन इस संसार का सबसे बड़ा चमत्कार है—

रुमूज़े गर्दिश-ए-दरिया-ए -फ़ानी खुलते जाएंगे
वो तहरीरों की सूरत या ज़ुबानी खुलते जाएंगे
सफ़र में है अभी क़ुरआन का एक-एक गुल बूटा
गुज़रती जाएंगी सदियां मानी खुलते ‌ जाएंगे

(फ़ारूक़ रशीद फ़ारूक़ी)