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क्या लड़कियां भी लड़कों के गुप्तांग के उभार को देखना पसंद करती हैं?अश्लील मूवी देखने से जीवन में क्या प्रभाव पड़ता है?

अश्लील मूवी देखने से हमारे जीवन में इसका क्या प्रभाव पड़ता है?

आज कल हर किसी को अश्लील फिल्म देखने की लत लगी हुई है।अपने आनन्द के लिए हर कोई अश्लील फिल्मों का सहारा लेता है।आज कल बच्चो और युवाओं में पोर्न मूवी देखने का क्रेज इतना बढ़ता जा रहा है कि इस अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता।

यदि आप पोर्न देखने के शौकीन है तो आप किस मुसीबत को गले लगा रहे हैं इसका ख्याल है आपको ।चलिए मैं बताता हूं कि पोर्न मूवी देखने से क्या क्या नुकसान होते हैं। यह नुकसान शारीरिक और मानसिक दोनों पर होते हैं।

१ लिंग में तनाव को कमी

अधिकतर लोग पोर्न मूवी देखकर हस्थमैथुन करते है।शायद वह यह नहीं जानते कि आगे चलकर इसका सीधा असर उनके लिंग के तनाव पर पड़ता है। और लिंग में तनाव की कमी आ जाती है।

 

२ दिमाग का सिकुड़ना

शोध के हिसाब से जो लोग अधिक अश्लील फिल्म देखते है या इं फिल्मों को देखने के आदी हो जाते है।उनका दिमाग सिकुड़ जाता है और उनमें यौन इच्छा भी कम हो जाती है । और छोटी छोटी बातों को लेकर अधिक टेंशन होने लगता है। गुस्सा अधिक आने लगता है किसी कि कहीं हुई बात भी बुरी लगती है। ऐसे खतरनाक रोग हो जाते है ।

३ मस्तिष्क पर प्रभाव

पोर्न देखना सबसे ज्यादा हमारे दिमाग के विकास पर पड़ता है।और इससे मानसिक तनाव की स्थिति पैदा हो जाती है जिसे हम अवशाद (डिप्रेशन) कहते है।

४ अवैध सम्बन्ध

शोध के मुताबिक अवैध संबंध के पीछे का कारण अधिक पोर्न है है। पहले इंसान पोर्न देखता है और जब उतेजित हो जाता है तो वह किसी से भी किसी भी तरह अवैध संबंध बना लेता है जो कि बिलकुल गलत है।सामाजिक तौर पर तो बिलकुल गलत है। अवैध संबंध से रिश्तों में खटास आ जाती है और फिर लड़ाई झगडे और कोर्ट वकील के चक्कर और फिर तलाक जिसे मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।

५ लव हार्मोन्स में कमी आना

ऑक्सीटोसिन नमक हार्मोन हमारे शरीर में पाया जाता है जोकि यौन इच्छाओं में सहायक होता है। यह हार्मोन स्त्री और पुरुष दोनों में पाया जाता है जिसकी मदद से दोनों आपस में यौन संबंध स्थापित कर पाते है। और यह हार्मोन यौन संबंधी को मजबूत बनाता है।लेकिन अधिक पोर्न फिल्म देखने से यह अधिक मात्रा में रिलीज होता है और कुछ समय बाद इसकी शरीर में कमी हो जाती है जिसकी वजह से लोग अपने पार्टनर के साथ यौन संबंध बनाने में असमर्थ रहते है ।

तो दोस्तो यह थे वह प्रभाव जो पोर्न देखने से हमारे जीवन में पड़ते है।


जिस प्रकार लड़कों को लड़कियों के वक्ष और नितंब देखने में मजा आता है, क्या उसी प्रकार लड़कियां भी लड़कों के गुप्तांग के उभार को देखना पसंद करती हैं?

राजू मुंडा
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पूर्व फ्रिलांसर हिंदी कंटेंट राइटर
कोशी पावर पॉइंट प्राइवेट लिमिटेड (2021–2023)29 जन॰

लोग बाथरूम में नहाने के अलावा और निम्नलिखित काम करते हैं जो इस प्रकार है

जिसका बाथरूम नहाने के अलावा मल त्याग करने की सुविधा होती है तो नहाने के पेशाब करना बहुत जरूरी है जिससे कि नहाने का मजा दुगुना होता है!

और आपको विश्वास नहीं होता है तो आजमाकर देखने से कुछ नहीं बिगड़ जाता है और इसीलिए इसको आजमा कर देखना बहुत जरूरी है!

ठंठ के दिनों में पानी गर्म करने की सुविधा नहीं है तो ठंड पानी से नहाने में ठंड का एहसास बहुत ही ज्यादा होता उस समय बाथरूम में लोग गाने को गुनगुनाते है!

ठंडे ठंडे पानी से नहाना चाहिए और गाना आए एवं न आए फिर भी गाना चाहिए, एवं आम लोग इसी तरह के गाने गुनगुनाते रहते हैं!

जिस प्रकार लड़कों को लड़कियों के वक्ष और नितंब देखने में मजा आता है, क्या उसी प्रकार लड़कियां भी लड़कों के गुप्तांग के उभार को देखना पसंद करती हैं?

GALIB KI GALIYA FIRST LOVE LETTER
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बच्चों को खिलोना देखने में ज्यादा मजा आता है या

खिलोने को बच्चों को देखकर।।

बात कल्पना की है।।

लडकियां ज्यादा कल्पना करती है क्या लडकों के बारे में।

यदि हाँ तो।

लडकियां कल्पना करेंगी कि।

लड़के का परिवार कैसा होना चाहिए। वह कमाता है या नहीं। सास ननद कैसी होंगी। वह निभा पाएगी या नहीं।।।

जबकि लड़के कल्पना करते हैं सेक्स की। लड़की के शरीर की और ज्यादा से ज्यादा वो ये सोचते हैं कि सुहागरात पर कैसे और क्या क्या करेंगे।

जबकि लडकियां सिर्फ एडजस्टमेंट के लिए सोचती है।

इसलिए बेसिक अंतर होने के कारण।

लड़के ही वक्ष व नितंबों को देखकर आनंदित होते हैं।

लडकियों का ध्यान मर्द के उभार पर नहीं जाता है।।।

Vaishali
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वैसे हमारी सोच आप लड़को की तरह नहीं होती हम लोगो का ध्यान सामने वाले चेहरे की नजरों और उसकी बातो पर ज्यादा होता है। वैसे तो हम सब चलते समय सामाजिक कायदे के चलते लड़को पर उतना ध्यान नहीं दे पाती और देती भी हूँ तो उस लड़के के चलने की स्टाईल पर ही ध्यान होता है।

बाकि कुछ लड़कियों की नजरे सीधे पैंट की चेन पर भी जाती हैं वैसे वो भी उसके उभार देखने को नहीं बस सामने वाले की लापरवाही या कमी देखने को जाती है और वो नजरे बस पेट की चेन पर ही नहीं रुकती बल्कि जूते की डोरियों पर भी जाती हैं।

पर सभी का नहीं कह सकते क्योंकि सभी लड़किया अलग दिमाग अलग इंटरेस्ट लेके पैदा होती हैं और अपवाद भी हर जगह होते हैं।

देवऋषि
पूर्व मेडिकल प्रैक्टिशनर्स

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नहीं लड़कियां लड़कों के गुप्त अंग नहीं देखना पसंद करती,,,,,,,

यह बुरी बीमारी तो लड़कों को ही होती है।

लड़कियों तो लड़कों की लंबाई चौड़े कंधे और चौड़ी छाती पर मरती है,,,।

जो गुप्तांग दिखाने की कोशिश करते हैं वह बेवकूफ होते हैं और लड़कियां उनको सच में बेवकूफ समझती है।।।

इसकी जीती जागती हमारे पास एक उदाहरण है हमारे लंबू अमिताभ बच्चन जी,,

और चौड़ी छाती के लिए तो धर्मेंद्र साहब है ही थे। दारा सिंह की बात छोड़ो वह तो पहलवान थे।

फिल्मी गाने का मुखड़ा हो जाए,,

हमको तुमसे,,,, हो गया है प्यार क्या करें,

बोलो तो जीए बोलो तो मर जाए,,,,

अब तक छुपाए रखा शोला दबाए रखा,,,

अनुराधा

Gwalior
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((( प्रश्न करता जी आप की बात सही है )))

लड़कों को तो लड़कियों के सारे शरीर को देखकर ही आनन्द आता है क्योंकि उनकी सोच बस वही तक है वह लड़कियों को बस कामवासना की कोई वस्तु समझते है । पर क्या कर सकते है भगवान ने स्त्री निर्माण ही कुछ अलग सा किया है उसके वक्ष, नितम्ब, कमर,मुख ,होंठ, हाथ, पैर, हर चीज को बड़े फुर्सत से बनाया है ।

ओर जहां तक लड़कियों की बात है कि वह भी पुरुषों के निजी अंग देखकर प्रशन होती है तो यह कुछ हद तक सही भी है क्योंकि आजकल समाज बहुत बदल गया है ।

टी काफी हद तक मे आपकी बात से सहमत हूं।

धन्यवाद।।


Deep Pyaar
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यह समझना महत्वपूर्ण है कि जब शारीरिक आकर्षण की बात आती है तो व्यक्ति अलग होते हैं और उनकी अलग-अलग प्राथमिकताएँ होती हैं। कुछ लड़कियां लड़कों के जननांगों की शारीरिक बनावट की ओर आकर्षित हो सकती हैं जबकि अन्य नहीं। इसी तरह, कुछ लड़के लड़कियों के स्तनों और नितंबों की शारीरिक बनावट के प्रति आकर्षित हो सकते हैं, जबकि अन्य नहीं। लोगों की व्यक्तिगत प्राथमिकताओं और सीमाओं का सम्मान करना और उन्हें स्वीकार करना महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि किसी को अपने शरीर के अंगों को देखने के लिए मजबूर करना या उन्हें असहज महसूस कराना उचित नहीं है।

व्यक्तियों या लोगों के समूहों को क्या आकर्षक लग सकता है या नहीं, इस बारे में धारणा बनाना उचित या सम्मानजनक नहीं है। लोगों की प्राथमिकताएँ और इच्छाएँ व्यापक रूप से भिन्न हो सकती हैं, और उन भिन्नताओं का सम्मान और सम्मान करना महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, किसी को उसकी शारीरिक विशेषताओं के आधार पर वस्तुकृत करना या कम करना सम्मानजनक या स्वस्थ नहीं है। अपनी इच्छाओं और सीमाओं के बारे में एक साथी के साथ खुला और ईमानदार संचार होना और हमेशा सहमतिपूर्ण व्यवहार में संलग्न होना महत्वपूर्ण है।

मनोहर पुजारी
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प्रेम ही पूजा है – मानवता ही धर्म है16 अक्तू॰
नारी पुरुष का एक दूसरे के प्रति सदियों से ही आकर्षण रहा है और रहेगा

क्योकि यह ईश्वर का दिया हुआ अनमोल उपहार है

जो कि हम एक दूसरे को देखकर प्रसन्नता पुर्ण अपना जीवन बिताते हैं

अगर देखा जाए तो हर पुरुष नारी के बिना अधुरा है

जिसके जीवन में किसी नारी का सानिध्य नहीं मिला

वो कुंठित जीवन जीने के लिए बाध्य हो जाता है

अत: नारी इस सृष्टि की सर्वोत्तम रचना है

जिसकी सुन्दरता को देखकर मन प्रसन्न हो जाता है

जिसके बनावट को देखकर जी चाहता है कि काश मैं भी नारी का रुप होता

जिसके चुचीयों को देखकर मन ललच जाता है कि काश छूने को और चखने को मिल जाता

और जिसके रुप और माधुर्य को देखकर जी मचल जाता है और हम ईश्वर से गुहार लगाते हैं कि

काश ये मेरे आंगन की शोभा बन जाती


अब रह गयी बात नारी का पुरुष के प्रति आकर्षण की

तो लड़कियां भी लड़को के मर्दानगी पर एवम् शरीर के सुडौल बनावट पर फिदा हो जाती है

लड़कियों का भी जी चाहता है कि

जिस औजार से मुझे यौन सुख मिलने वाला है

काश उस मोटे लम्बे और सख्त बनावट को एकबार देख लेती और मुंह में लेकर प्यार करती


Ramesh Kumar
Jaipur
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ये सब हर किसी के अपने पर्सनल विचार का हिस्सा है. अगर किसी लड़की को इन सब बातो का पता ही नहीं है तो उसे किसी लड़के के गुप्तांग को देखने में कोई रूचि नहीं होगी.

हो सकता है उसे पहली बार इस तरह का कुछ देखने को मिल रहा है तो वो उत्सुक होकर देखने की कोशिश करे.

आज इन्टरनेट और मोबाइल आपको सबकुछ सिखा देता है तो में अपना अनुभव आपको बता देना चाहूँगा.

अक्सर स्कूल टाइम में जब प्रेयर में कुछ लड़के स्टेज पर प्राथना के बाद मोरल थॉट शेयर करते थे उनमे से एक लड़का था जो देखने में खास नहीं था लेकिन उसकी पेंट पर बना उभार किसी को भी उसकी तरफ देखने के लिए मजबूर कर देता था.

चलते फिरते जब उसकी पेंट थोड़ी भी इधर उधर होती तो उसका पेंट उभार बना देता था.

इस मामले में वो थोड़ा शर्मीला था और कोशिश करता था की उसे ठीक कर वो दुसरे कामो में बिजी हो जाता था.

प्रेयर के दौरान हम सबसे पीछे खड़े होते तो साइड की लाइन में खड़ी लडकियों की लाइन में उनकी हरकते आसानी से नोटिस कर लेते थे.

उनमे से कुछ लड़कियां उस लड़के को जब भी देखती थी स्माइल करने लगती थी. ये उस टाइम की बात है जब मोबाइल नहीं था. लड़कियां भी हॉस्टल में जरुर रहती थी लेकिन बहुत कम चांस थे की उन्हें इसके बारे बहुत ज्यदा जानकारी हो जो आज की जनरेशन में होती है.

तो महाशय ये व्यक्ति विशेष पर निर्भर है. कुछ लड़कियां इसे इग्नोर करती हैं, कुछ उत्सुकता दिखाती है तो कुछ ऐसे मौको का फायदा भी उठाने की कोशिश करती है.

pics not related to the story, just for fun

pic source : FB