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गंगा जमुना ‘ के मशहूर गाने…”नैन लड़ जाहियें के बनने की कहानी….

गंगा जमुना ‘(1961) के मशहूर गाने
“नैन लड़ जाहियें के बनने की कहानी ….
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वर्तमान फ़िल्में आपको चमत्कृत करती हैं पर 50 साल बाद उसे देखने की ललक वैसी नहीं होती जैसी पुरानी हिंदी फिल्मो और गीतों को देखने, सुनने की आज भी होती है … ‘मुग़ले आज़म'(1960) के बाद जिस फ़िल्म में दिलीप कुमार ने सबसे ज़्यादा नाम कमाया वो थी ‘गंगा जमुना ‘(1961) …….. दिलीप कुमार साहेब ने ने ‘गंगा जमुना’ में एक गँवार आदमी के किरदार को जिस ख़ूबी से निभाया, उतना ही न्याय उन्होंने मुग़ले आज़म में मुग़ल शहज़ादे की भूमिका के साथ किया था दलीप साहेब की फिल्म गंगा जमुना का संगीत ‘नौशाद ‘जी ने तैयार किया था
जब वो गंगा जमुना का संगीत तैयार कर रहे थे तो उनका लखनऊ जाने का प्रोगाम बन गया लखनऊ से आगे जियारत के लिए उनका जाना हज़रत वारिस अली शाह की दरगाह पर हुआ……

दरगाह में उन्होंने देखा की एक कव्वाल पूरबिया बोली में “नातिया कलाम” गा रहा था “नातिया कलाम वो प्रशस्ति काव्य होता है जो हुज़ूर मोहम्मद साहिब की शान में गाया जाता है कव्वाल पूरबिया बोली में जिस “नातिया कलाम” को गा रहा था वो ज्यादातर उर्दू बोली में गाया जाता है नौशाद साहिब हैरान हुए इस कलाम की बंदिश नौशाद जी के दिल में उतर गई इस का असर ये हुआ की लखनऊ वापिस आते ही उन्होंने इस पर आधारित एक गाने की कम्पोजीशन बना डाली…

अब लखनऊ से बॉम्बे लौटकर उन्होंने शकील बदायूँनी को बुलाया और गाने की बंदिश सुना डाली और कहा की …” शकील अब इस पर एक गाना लिख डालो ” शकील जी इसमें नए शब्द जोड़ कर गाना लिख डाला जिसे मोहम्मद रफ़ी ने गाया इस तरह हज़रत वारिस अली शाह की दरगाह पर उस कव्वाल की गाई गई बंदिश फिल्म ‘गंगा जमुना ‘ का हिस्सा बन गई और वो गीत था “नैन लड़ जाहियें तो मनवा माँ कसक हुई बै करी” शकील बदायुनी का लिखा गीत …नौशाद जी का संगीत तो कमाल का था ही लेकिन गाने के फिल्मांकन में दलीप कुमार साहेब के भोजपुरी स्टाइल में किये डांस ने तो कहर ही बरपा दिया ‘गंगा जमुना’ का ये गाना आज तक भी देखा जाता है और पसंद किया जाता है…

महानायक अमिताभ बच्चन कहते है कि जब वह इलाहाबाद में पढ़ रहे थे, तो उन्होंने ‘गंगा जमना’ फ़िल्म बार-बार देखी थी अमिताभ देखना चाहते थे कि एक ‘पठान ‘ जिसका उत्तर प्रदेश से दूर-दूर का वास्ता नहीं था, किस तरह वहां की बोली को पूरे परफ़ेक्शन के साथ बोलता है ? अभिनय के लिहाज से ‘गंगा जमुना’ में दिलीप साहब के अनेक रूप दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर करते हैं वास्तव में दिलीप कुमार अभिनय सम्राट हैं आज के दौर का कोई अभिनेता उनेक आस पास भी कही ठहरता प्रतीत नहीं होता…
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पवन मेहरा
‘सुहानी यादे बीते सुनहरे दौर की ‘✍️
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