दुनिया

ग़ज़ा-इसराइल जंग के 35वे दिन की ख़बरें : ख़ून में डूबा रहा फ़लस्तीन,….”नहीं मालूम कि जब ये कहानी छपेगी, तब हम ज़िंदा होंगे या नहीं’

– अमेरिका का कहना है कि इसराइल नागरिकों को उत्तरी ग़ज़ा से दक्षिणी ग़ज़ा की ओर भागने के लिए हर दिन चार घंटे का मिलिट्री पॉज़ लागू करेगा.

– अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन भारत-अमेरिका के बीच 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता के लिए दिल्ली पहुंचे. ये उनकी पांचवा 2+2 बैठक है.

इसराइल-हमास युद्ध: क़तर से ईरान ने क्यों कहा- संघर्ष का दायरा अब और फैलेगा

ईरान के विदेश मंत्री हुसैन आमिर अब्दुलाहयन ने अपने क़तरी समकक्ष, शेख़ मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान के साथ इसराइल-हमास युद्ध को लेकर फ़ोन पर बातचीत की है.

ईरान के विदेश मंत्रालय ने ग़जा में ‘इसराइली हमलों की निंदा’ की और कहा कि ग़ज़ा में स्थितियां ‘चिंताजनक’ हैं.

बयान में कहा गया है कि दोनों देशों ने बातचीत की है कि कैसे राजनीतिक तरीकों का इस्तेमाल कर इसराइल के हमले का अंत करने, युद्ध विराम तुरंत लागू करने और घेरेबंदी और युद्ध से बेहाल ग़ज़ा के लोगों को मानवीय सहायता पहुंचाने का काम किया जा सकता है.

दोनों मंत्रियों ने युद्ध विराम को लेकर भी बात की है.

ईरान के विदेश मंत्री अब्दुलाहयन ने कहा कि ‘ग़ज़ा के नागरिकों के ख़िलाफ़ तेज़ होते युद्ध के कारण संघर्ष का दायरा बढ़ने की संभावना अब अपरिहार्य बन चुकी है.’

Foreign Ministry, Islamic Republic of Iran 🇮🇷
@IRIMFA_EN
❇️ #Iran, #Qatari FMs discuss war on #Gaza

✅Iran’s Minister of Foreign Affairs, Hossein Amirabdollahian, held a phone conversation with his Qatari counterpart, Sheikh Mohammed bin Abdulrahman Al Thani, discissing the latest developments concerning Palestine and the current crisis in Gaza.

They strongly condemned the attacks by the Zionist regime on civilians, expressed deep concern about the humanitarian situation in #Gaza, and the ongoing large-scale military assaults on civilians, particularly women and children.

The parties explored political ways to end the Israeli regime’s barbaric attacks, immediate establishment of a ceasefire, and the continuous delivery of humanitarian aid to the besieged and war-torn people of Gaza.

The top Iranian and Qatari diplomats also exchanged views on proposed initiatives for a potential ceasefire.

Amirabdollahian emphasized that due to the escalation of war against Gaza’s civilian residents, the expansion of the scope of the conflict has now become inevitable.

ग़ज़ा में मानवीय सहायता बढ़ाने पर अमेरिका और तुर्की के बीच क्या हुई बातचीत

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिकंन के साथ ग़ज़ा में भेजी जा रही मानवीय सहायता को बढ़ाने को लेकर बात की है.

अर्दोआन का कहना है कि तुर्की यात्रा पर आए विदेश मंत्री के साथ बातचीत में उन्होंने ग़ज़ा में हर रोज ट्रकों की संख्या को कम से कम 500 तक बढ़ाने पर चर्चा की है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर अमेरिकी विदेश मंत्री ने सकारात्मक रुख़ अपनाया है.

तुर्की ने कई देशों के सहयोग से एंबुलेंस, खाना, पानी और दवाएं ग़ज़ा के लोगों को उपलब्ध कराने का वादा किया है.

इसके अलावा तुर्की ने युद्ध में घायल हुए फलस्तीनी लोगों और पुरानी बीमारियों वाले मरीजों को तुर्की के अस्पतालों में शिफ्ट करने की पेशकश भी की है.

मध्य पूर्व के देशों की यात्रा के दौरान रविवार, 5 नवंबर को अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिकंन तुर्की पहुंचे थे.

इससे पहले शुक्रवार को वे इसराइल, शनिवार को जॉर्डन और रविवार को वेस्ट बैंक और इराक भी गए थे.

गुरुवार को इसराइल ने ग़ज़ा में बमबारी में हर रोज़ चार घंटे की मोहलत देने का फैसला किया है, जिसका अमेरिका ने स्वागत किया है.

ग़ज़्ज़ा के अस्पतालों को निशाना बना रहा है इस्राईल

इस्राईली सेना लगातार ग़ज़्ज़ा के अस्पतालों को निशाना बना रही है।

पिछली रात भी इस्राईल के युद्धक विमानों ने ग़ज़्ज़ा के कई अस्पतालों को निशाना बनाया।

तस्नीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ग़ज़्ज़ा के दक्षिण में स्थित खान यूनिस इलाक़े में अल-जजीरा चैनल के रिपोर्टर हानी महमूद का कहना है कि पूरे क्षेत्र पर इस्राईल की भीषण बमबारी जारी है।

हानी महमूद का कहना है कि रात में ग़ज़्ज़ा शहर और क्षेत्र के उत्तरी हिस्सों को इस्राईल की भारी बमबारी से निशाना बनाया गया था और ऐसा लग रहा था कि इन हमलों में जान बूझकर चिकित्सा केंद्रों को निशाना बनाया जा रहा है।

हानी महमूद के अनुसार ऐसा लगता है कि इस्राईल का इरादा चिकित्सा टीमों और फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों को यह संदेश देना था कि वे कहीं थी सुरक्षित नहीं हैं, चाहे अस्पताल के अंदर ही शरण क्यों न लिए हों।

ज्ञात रहे कि कल देर रात अल-शेफ़ा अस्पताल पर तोपख़ानों और युद्धक विमानों से हमला किया गया जिसके परिणामस्वरूप 6 लोग शहीद और कई अन्य घायल हो गए।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, ग़ज़्ज़ा के केंद्र में अल-नस्र और अल-रंतीसी अस्पतालों को निशाना बनाया गया। इस्राईल की बख्तरबंद गाड़ियों और टैंकों ने इन दोनों अस्पतालों को घेर लिया और सीधे टैंकों से गोलाबारी की।

एको संगठन की बैठक में ईरान, तुर्किये और उज्बेकिस्तान के राष्ट्राध्यक्षों ने क्या कहा?

 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अनवारूल हक़ ने आर्थिक सहयोग संगठन एको की बैठक में बल देकर कहा है कि ग़ज्जा में युद्ध विराम कराने के लिए सामूहिक रूप से प्रयास किये जाने की ज़रूरत है और इस्राईल ने गज्जा में जो अपराध किये हैं और कर रहा है उसे उनका जवाब देना चाहिये।

एको की बैठक में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री अनवारुल हक़ ने गज़्ज़ा में इस्राईल द्वारा किये जा रहे अपराधों की भर्त्सना की और बल देकर कहा कि एको संगठन को गज़्ज़ा में तुरंत युद्ध विराम कराने के लिए सामूहिक ढंग से प्रयास करना चाहिये।

क्षेत्रीय मामलों के एक विशेषज्ञ अली शरीफी नेजाद कहते हैं कि एको संगठन में ईरान, पाकिस्तान, तुर्किये और उज्बेकिस्तान जैसे महत्वपूर्ण देश शामिल हैं और इन देशों द्वारा ठोस दृष्टिकोण अपनाये जाने की स्थिति में गज़्ज़ा में युद्ध विराम कराने के संबंध में प्रभाव पड़ेगा। जायोनी सरकार के अपराधों की भर्त्सना और गज़्ज़ा में युद्ध विराम कराने के संबंध में तेहरान, अंकारा और इस्लामाबाद के बहुत अच्छे दृष्टिकोणों को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।

उज्बेकिस्तान की राजधानी ताश्कंद में आर्थिक सहयोग संगठन एको की बैठक में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री अनवारुल हक़ ने फिलिस्तीन के मज़लूम लोगों के प्रति समरता व सहानुभूति जताते हुए बल देकर कहा कि हज़रत ईसा का अनुसरण करने का दावा करने वालों ने खूंखार व रक्तपिपासु की प्रवृत्ति अपना ली और गज़्ज़ा में जघन्य अपराध अंजाम दे रहे हैं और इस आधार पर एको संगठन को सामूहिक रूप से गज़्ज़ा में युद्ध विराम के लिए प्रयास करना चाहिये।

रोचक बात यह है कि अब अमेरिका गज़्ज़ा में युद्ध विराम की बात करने लगा है जबकि यह वही अमेरिका है जो अभी हाल ही में गज्जा में युद्ध विराम के संबंध में पेश किये जाने वाले प्रस्ताव को वीटो कर दिया था। जानकार हल्कों का कहना है कि फिलिस्तीनी बच्चों और महिलाओं का खून बहाने का ज़िम्मेदार मात्र इस्राईल नहीं है बल्कि इसमें अमेरिका और कुछ पश्चिमी व यूरोपीय देश भी शामिल हैं। इसी प्रकार इन जानकार हल्कों का मानना है कि अवैध जायोनी सरकार ने जिस तरह से गज्जा पट्टी और फिलिस्तीन के दूसरे क्षेत्रों में अपराध किया और कर रहा है उसकी मुख्य वजह अमेरिका और उसकी हां में हां मिलाने वाले कुछ पश्चिमी व यूरोपीय देशों द्वारा इस्राईल का व्यापक समर्थन है।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के एक विशेषज्ञ मुर्तुज़ा हैदर इस बारे में कहते हैं गज़्ज़ा की स्थिति क्षेत्रीय देशों व संगठनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण परीक्षा है और ये देश व संगठन एक दूसरे के साथ मिलकर ठोस दृष्टिकोण अपना कर जायोनियों के अपराधों को समाप्त करायें वरना जायोनी अधिक दुस्साहस के साथ गज्जा में अपने अपराधों को जारी रखेंगे।

एको की बैठक में ईरान के राष्ट्रपति ने फिलिस्तीन के विषय को उठाया और फिलिस्तीन में शहीद होने वालों के सम्मान में एक मिनट का मौन रखा। इसी प्रकार एको की बैठक में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति ने एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश के गठन पर बल दिया। इसी प्रकार तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तय्यब अर्दोगान ने गज्जा के संबंध में अमेरिका और पश्चिमी दशों के दृष्टिकोणों की आलोचना करते हुए कहा कि विश्व जनमत गज्जा में अमेरिका की भागीदारी से जायोनियों के युद्धापराधों का साक्षी है।

यमन, फ़िलिस्तीनियों के लिए कुछ भी करेंगे

यमन के जनांदोलन अंसारुल्लाह के राजनीतिक कार्यालय के एक सदस्य का कहना है कि यमन के पास ऐसी क्षमताएं हैं जो उसे फ़िलिस्तीनी मुद्दे और फ़िलिस्तीनी उमंगों का समर्थन करने के लिए तैयार करती हैं।

अल-मयादीन चैनल के अनुसार, यमन के जनांदोलन अंसारुल्लाह आंदोलन के राजनीतिक कार्यालय के सदस्य अली अल-क़हूम ने ज़ोर देकर कहा कि यमन में ज़ायोनी शासन के सैन्य और महत्वपूर्ण ठिकानों को धीरे-धीरे निशाना बनाना जारी रखा जाएगा।

उनका कहना था कि हम पूरी शक्ति से साथ इस्राईल को उसके अपराध रुकवाने पर मजबूर करेंगे।

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के राजनीतिक कार्यालय के सदस्य ने कहा कि यमन ने अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन पर लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल फ़ाएर किए जिससे अमेरिकी और इस्राईली आश्चर्यचकित हो गए।

अल-कहूम ने ज़ोर दिया कि यमन के पास मिसाइलें और ड्रोन हैं जो ज़ायोनी शासन की डिफ़ेंस सिस्टम को चकमा देकर इस्राईल के रणनीतिक लक्ष्यों तक पहुंचते हैं।

इस यमनी अधिकारी ने कहा कि हम फ़िलिस्तीनी जनता का समर्थन करने के लिए और इस्राईल को उसके अपराधों को रुकवाने के लिए अपनी शक्ति के हिसाब से सब कुछ करेंगे।

उनका कहना था कि अमेरिका को पता होना चाहिए कि यमन में इस्राईली सेना और उसके महत्वपूर्ण ठिकानों को धीरे-धीरे निशाना बनाया जाता रहेगा।

इससे पहले यमन के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता यहिया सरी ने एक बयान में एलान किया कि यमनी बलों ने मिसाइल हमले से अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन के दक्षिण में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

ग़ज़ा युद्ध का 35 वां दिन भी ख़ून में डूबा रहा, नेतनयाहू-कोई संघर्षविराम नहीं

ग़ज़ा युद्ध का 35 वां दिन भी ख़ून में डूबा रहा, अलशिफ़ा अस्पताल के परिसर में इस्राईल की बमबारी ने ली 6 बेगुनाहों की जान, नेतनयाहूः कोई संघर्षविराम नहीं
ज़ायोनी सेना ने ग़ज़ा पट्टी पर बमबारी जारी रखते हुए अलशिफ़ा अस्पताल के आस पास के इलाक़ों पर बमबारी की जिसमें 6 लोग शहीद हो गए।

इससे पहले ज़ायोनी युद्धक विमानों ने रन्तीसी अस्पताल को भी निशाना बनाया।

अमरीका की ओर से दावा किया गया था कि इस्राईल सीमित संघर्ष विराम के लिए तैयार हो गया है। अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था कि इस्राईल ने संघर्ष विराम पर सहमति जताई है मगर ज़ायोनी प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू ने कहा कि कोई संघर्ष विराम नहीं किया जाएगा। नेतनयाहू ने कहा कि हमास पहले सारे क़ैदियों को आज़ाद कर दे उसके बाद ही संघर्ष विराम की बात होगी।

इस्राईल की इस बात के लिए दुनिया भर में निंदा की जा रही है कि वो हमास के ख़िलाफ़ आप्रेशन की बात कर रहा है लेकिन अंधाधुंध बेगुनाह नागरिकों को मार रहा है जबकि हमास उसके हमलों का बहादुरी से मुक़ाबला कर रहा है।

चीन ने मांग की है कि शुक्रवार को सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई जाए और अस्पतालों पर इस्राईल के हमलों के विषय पर चर्चा की जाए।

अमरीका यह ज़ाहिर करना चाहता है कि ग़ज़ा युद्ध के मामले में सारे फ़ैसले इस्राईल ख़ुद कर रहा है लेकिन ठोस जानकारियों से साबित हो गया है कि इस्राईल को अमरीका की भरपूर सामरिक मदद हासिल है जिसके सहारे इस्राईल इस युद्ध में भयानक रूप से क़त्ले आम कर रहा है।

अमरीकी सरकार पर देश के भीतर से भारी दबाव पड़ रहा है कि वो ग़ज़ा में आम नागरिकों विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं का क़त्ले आम बंद करवाए लेकिन अमरीकी सरकार जनमत को धोखा दे रही है और प्रभावी रूप से इस्राईल पर दबाव नहीं डाल रही है।

ज़ायोनी प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू ने फ़ाक्स न्यूज़ को इंटरव्यू देते हुए कहा कि संघर्ष विराम करने का मतलब हमास के सामने हार मान लेना है।

हिज़्बुल्लाह का एलान-ग़ज़ा की जनता और रेज़िस्टेंस फ़ोर्सेज़ का समर्थन जारी रखेंगे

लेबनान के हिज़्बुल्लाह आंदोलन ने सीमावर्ती इलाक़ों में ज़ायोनी सेना के ठिकानों पर अपने नए हमलों का एलान करते हुए कहा कि ग़ज़ा की जनता और रेज़िस्टेंस फ़ोर्सेज़ की मदद जारी रखेंगे।

हिज़्बुल्लाह ने अपने बयान में कहा कि अलमुतिल्ला इलाक़े में ज़ायोनी सेना के ठिकानों पर मिसाइल मारे गए जिसमें कई ज़ायोनी सैनिक हताहत और घायल हुए हैं।

लेबनान की सीमा के क़रीब मारे जाने वाले अपने सैनिकों की संख्या बताने से इस्राईली सेना गुरेज़ कर रही है लेकिन अनुमान है कि इस मोर्चे पर कम से कम 150 ज़ायोनी सैनिक मारे जा चुके हैं।

हिज़्बुल्लाह ने अलजलील के शतूला इलाक़े में भी ज़ायोनी सेना के ठिकाने को निशाना बनाया।

हिज़्बुल्लाह ने ज़ायोनी सेना की ज़रईत और मिसकाफ़ आम चेकपोस्टों पर भी हमले किए हैं। इसके बाद कई ज़ायोनी बस्तियों में सायरन की आवाज़ें गूंजने लगीं।

ज़ायोनी सेना की तरफ़ से लेबनान के भीतर कफ़र कला, अदीसा और दैर मीमास में हमले किए गए। रामिया और बैत लीफ़ के बीच के एक इलाक़े पर भी ज़ायोनी सेना ने हमले किए हैं।

अलअक़सा तूफ़ान आप्रेशन के फ़ौरन बाद से ही हिज़्बुल्लाह ने इस्राईल से होने वाली जंग में अपनी भूमिका निभानी शुरू कर दी जिसके नतीजे में लेबनान की सीमा पर इस्राईली सेना का एक बड़ा भाग इंगेज है।

हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह ने अपने भाषण में बताया था कि इस्राईली सेना की एक तिहाई संख्या, एयर डिफ़ेंस सिस्टम और लाजिस्टिक्स का एक बड़ा हिस्सा लेबनान की सीमा पर इंगेज़ है।

ग़ज़ा डायरी : ‘नहीं मालूम कि जब ये कहानी छपेगी, तब हम ज़िंदा होंगे या नहीं’

फ़रीदा
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चार लोग बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के लिए डायरी लिख रहे हैं कि बमबारी के बीच ग़ज़ा में जीवन कैसे चल रहा है. कैसे लोग पूरा दिन खाने और पानी की तलाश कर रहे हैं, हवाई बमबारी से छिपने के लिए नाइट शेल्टरों में रातें बिता रहे हैं और सुबह तक ज़िंदा बचे रहने की प्रार्थना कर रहे हैं.

सात अक्तूबर से ही इसराइली सेना ग़ज़ा पट्टी पर हवाई बमबारी कर रही है. हमास शासित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक 10 हज़ार से अधिक लोग इसराइल के हमलों में मारे जा चुके हैं.

ये हवाई हमले इसराइल पर हमास के हमले के बाद किए जा रहे हैं, जिसमें 1,400 लोग मारे गए थे और 242 लोगों को बंधक बना लिया गया था.

कमज़ोर फ़ोन नेटवर्क और संचार ब्लैकआउट के कारण संपर्क बनाए रखना ख़ासा मुश्किल काम रहा लेकिन जब भी संभव हो सका, हमारे संपर्कों ने हमें मैसेज और वीडियो संदेश भेजे.

शुक्रवार 13 अक्टूबर
इसराइली विमानों ने उत्तरी ग़ज़ा के लोगों को ‘अपने बचाव और सुरक्षा’ के लिए ज़मीनी हमलों से पहले दक्षिणी ग़ज़ा की ओर चले जाने की चेतावनी वाले पर्चे गिराए.

फरीदाः ग़ज़ा सिटी में 26 साल की फ़रीदा अंग्रेज़ी टीचर हैं. उन्होंने अपने पहले मैसेज में लिखा, “मेरे पड़ोस के तीन घर तबाह हो चुके हैं. हम सभी को यहां से निकलना है लेकिन नहीं जानते कि कहां जाएं.”

“हम बस इंतज़ार कर रहे हैं. मेरे कई दोस्त लापता हैं, हो सकता है कि वे मारे गए हों. मेरे मां पिता का भी कुछ पता नहीं है.”

वो अपने छह छोटे बच्चों और भाई बहनों के साथ पैदल ही दक्षिण की ओर निकल पड़ीं. वे लोग करीब एक हफ़्ते तक चलते रहे, सड़कों पर सोते रहे.

वो वादी ग़ज़ा के दूसरी तरफ़ उस इलाक़े की ओर जाना चाह रहे थे, जिसके बारे में इसराइल ने कहा है कि वो सुरक्षित होगा.

एडमः दक्षिण ग़ज़ा में स्थित ख़ान यूनिस सिटी में रहने वाले एक युवा वर्कर एडम एक ही दिन में पांचवीं बार बचने के लिए सुरक्षित जगह जाने की तैयारी कर रहे हैं.

वो कहते हैं, “उत्तरी ग़ज़ा से 10 लाख से अधिक लोगों को दक्षिण की ओर जाने को कहा गया, ख़ास कर ख़ान यूनिस में. लेकिन ख़ान यूनिस में भी हवाई हमले किए जा रहे हैं. एक बम तो मेरे घर के क़रीब गिरा.”

इसराइल की ओर से ग़ज़ा पट्टी की पूरी घेरेबंदी करने के बाद यहां खाना, दवाएं और पेट्रोल भंडार तेज़ी से कम हुआ है. एडम को अपने बूढ़े पिता की देखभाल के लिए ज़रूरी चीज़ें भी नहीं मिल पा रहीं, जो पर्किंसन्स बीमारी से ग्रस्त हैं.

ना ही उन्हें अस्पताल में बिस्तर तक मिल सकता है. पिछली रात उन्हें एक अस्पताल के परिसर में ज़मीन पर सोना पड़ा.

ख़ालिदः उत्तरी ग़ज़ा में जबालिया में मेडिकल उपकरण के सप्लायर हैं. चेतावनी वाले पर्चे गिराए जाने के बावजूद, ख़ालिद ने अपने परिवार के साथ वहां से निकलने से इनकार कर दिया.

एक वीडियो मैसेज में वो कहते हैं, “हम कहां जाएंगे. कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है. हर जगह एक जैसे हालात हैं. किसी भी स्थिति में हम मारे जाएंगे.” इस संदेश की पृष्ठभूमि में बमों के धमाके की आवाज़ें सुनी जा सकती हैं.

ख़ालिद अपने कज़िन के दो छोटे बच्चों की भी देखभाल कर रहे हैं, जो पड़ोस के मार्केट में हुए एक हमले से बच गए थे.

वो कहते हैं, “बड़ी संख्या में घायलों के कारण दवाओं की भारी कमी है. कुछ दवाओं को कम तापमान पर स्टोर किए जाने की ज़रूरत होती है, लेकिन बिजली न होने के कारण वो बेकार हो गई हैं. जबकि ये अर्जेंट दवाएं हैं.”

वो कहते हैं कि जबसे युद्ध शुरू हुआ है, वो मेडिकल सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं.

सोमवार, 16 अक्टूबर
सलाह अल-दिन सड़क से दक्षिण की ओर जा रहे वाहनों के एक काफ़िले पर बम गिरा. यह सड़क दो सेफ़ कॉरिडोर में से एक है.

फ़लस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इसमें सात लोग मारे गए, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं. इसराइली सेना ने इस हमले की ज़िम्मेदारी से इनकार किया है.

दक्षिण में जिस तरह हमले हो रहे हैं, अधिक से अधिक फ़लस्तीनी उत्तर में अपने घरों में ही रहने का फैसला कर रहे हैं. जिन लोगों ने दक्षिण में शरण लेने का फैसला किया, अब वे भी लौट रहे हैं.

फ़रीदाः कई दिनों तक सड़कों पर सोने के बाद फ़रीदा की हिम्मत टूट गई. वो कहती हैं, “मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती कि मैं क्या महूसस कर रही हूं या क्या हो रहा है. हमारे चारों ओर लगातार बमबारी हो रही है और सभी बच्चे रो रहे हैं. हमें नहीं पता कि हम कहां जाएं.”

वो कहती हैं, “यहां तक कि ग़ज़ा में रात में आप नहीं जानते कि आप सुबह ज़िंदा उठेंगे या नहीं. मैं अपना हिजाब पहने अभी अपने परिवार के साथ बैठी हूं. मुझे किसी भी हवाई बमबारी का सामना करने के लिए खुद को तैयार रखने की ज़रूरत है.”

मंगलवार, 17 अक्टूबर
ग़ज़ा सिटी में अल अहली अस्पताल में हुए हमले में 471 लोग मारे गए. मरने वालों में अधिकांश अस्पताल परिसर में शरण लेने वाली महिलाएं और बच्चे थे. इसराइल ने कहा कि उनका इसमें कोई हाथ नहीं है और ये धमाका फ़लस्तीनी इस्लामिक जिहाद के रॉकेट के मिसफ़ायर होने से हुआ.

अब्देलहकीमः युद्ध शुरू होने के कुछ महीने पहले ही अब्देलहकीम ने सॉफ़्टवेयर में डिग्री हासिल की थी. वो सेंट्रल ग़ज़ा में अल बुरेइज रेफ़्युज़ी कैंप में रहते हैं.

वो बताते हैं कि जिस समय अस्पताल में धमाका हुआ, उनके कई दोस्त वहीं पर थे. उनमें एक घायल हुआ, जबकि दूसरे का पूरा परिवार मारा गया.

टॉर्च की रोशनी में रिकॉर्ड किए गए वीडियो में वो बताते हैं, “मैं 23 साल का हूं और फिलहाल मैं ज़िंदा हूं. मैं नहीं जानता कि मेरी कहानी जब छपेगी, मैं ज़िंदा रहूंगा या नहीं. आसमान में उड़ रहे जंगी विमानों का मैं कभी भी शिकार हो सकता हूं.”

“हमारे पास न तो पानी है, न दवा, न बिजली और न अन्य ज़रूरत की चीज़ें. मेरे और भाई बहनों के बीच साझा किए गए ब्रेड के एक टुकड़े के अलावा मैंने तीन दिनों से कुछ खाया नहीं है. बीते 12 दिनों में मैं और मेरा परिवार बमुश्किल 10 घंटे सोया होगा. हम बहुत थके हुए हैं. चिंता की वजह से हम आराम नहीं कर सकते.”

अब्देलहकीम और अन्य वालंटियर उनके घर से मदद बांट रहे हैं.

वो कहते हैं, “हम मदद के पैकेट और कंबल तैयार कर रहे हैं. यहां तक कि बच्चे भी मदद कर रहे हैं. हमने मिस्र से मदद लेकर पहुंचने वाले ट्रकों का इंतज़ार करने की बजाय खुद ही पहल करने का फैसला किया.”

शुक्रवार, 20 अक्टूबर
एक इसराइली हवाई हमले में अब्देलहकीम का घर ज़मींदोज़ हो गया और उन्होंने अपने गिरे हुए घर का वीडियो भेजा. पृष्ठभूमि में लोगों की चीख पुकार सुनाई देती है क्योंकि मलबे से लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है.

अब्देलहकीमः “हम सब बैठे थे तभी एक रॉकेट अचानक घर पर गिरा. हम मुश्किल से घर से निकल पाए. हमारे पड़ोसी अभी भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं. हम उन्हें तलाशने गए थे, लेकिन हमें कोई नहीं मिला. हम हर मिनट और हर घंटे मौत से घिरे हुए जी रहे हैं.”

“मेरा परिवार और मैं किसी चमत्कार से ज़िंदा बचे हैं. हम घर के कुछ हिस्से को ठीक कर रहे हैं ताकि हम यहां रुक सकें और मरने का इंतज़ार कर सकें.”

बुधवार, 25 अक्टूबर
अब्देलहकीम के पड़ोस में फिर से हवाई हमला हुआ.

अभी तक ग़ज़ा में 6,972 फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं.

अब्देलहकीमः इस बार वो सिर्फ रुआंसी आवाज में वॉइस नोट और कुछ टेक्स्ट मैसेज ही भेज सके.

उन्होंने लिखा, “मैं मदद के लिए कुछ नहीं कर सका, चारों तरफ़ शरीर के टुकड़े देख कर मैं जड़ हो गया था. यहां कोई भी सुरक्षित नहीं है, हम सभी शहीद होने वाले हैं.”

मिस्र के साथ लगी रफ़ाह क्रॉसिंग से ग़ज़ा में मदद का सामान लिए ट्रकों के प्रवेश की अनुमति मिल गई है, लेकिन जो सामान आ रहा है, वो ग़ज़ा में विस्थापित हुई आबादी की ज़रूरत के मुकाबले कुछ भी नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 14 लाख से अधिक आबादी को अपने घरों को छोड़ना पड़ा है.

एडमः अपने परिवार के लिए खाना तलाशने का संघर्ष उनके दिमाग में लगातार घूमता रहता है, “बिना लाइन में लगे खाना पाने के लिए मुझे हर रोज़ तड़के उठना पड़ता है. हालात और ख़राब होते जा रहे हैं.”

“जब आप स्कूल के परिसर में सो रहे हों, आपके अंदर कुछ है जो टूटता है. और जब आप अस्पताल के परिसर में सोते हैं तो आपके अंदर की कुछ और ही चीज टूटती है. जब आप ब्रेड के लिए लाइन में खड़े होते हैं और पानी के लिए मिन्नतें करते हैं, तो आपके अंदर बहुत सारी चीजें टूट जाती हैं.”

ख़ालिदः “वे लगातार हमपर बमबारी कर रहे हैं और हमें पता नहीं कि कब ब्रेड के लिए बाहर जाएं. कोई फ़्रिज भी नहीं है कि खाना जमा कर लें. हम खराब हो चुका खाना, सड़े टमाटर खा रहे हैं. फूलगोभी से कीड़े निकल रहे हैं. हमारे पास इसे खाने के अलावा कोई चारा नहीं है क्योंकि और कुछ है ही नहीं. हमें सड़ी चीज़ों को हटाकर जो बचता है उसे ही खाना है.”

फ़रीदाः परिवार उत्तरी ग़ज़ा के अपने घर में लौटने का फैसला करता है.

वो कहती हैं, “दक्षिण में हमें रुकने की कोई जगह नहीं मिली और हमारे पास बुनियादी ज़रूरतों के सामान भी नहीं थे. जहां हम थे, वहां बहुत बड़े बड़े बम गिराए जा रहे थे. हमने कम से कम अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए लौटने का फैसला किया.”

अगर दिन में चार या पांच मिनट के लिए भी कहीं शांति से बैठकर दोस्तों और परिवार से संपर्क करने का समय मिल जाए तो भी हम बहुत खुश हो जाते हैं.

लौटने के कुछ समय बाद ही उनकी सड़क बमबारी में तबाह हो गई और उनके घर का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया.

शुक्रवार, अक्टूबर 27
इसराइल ने ज़मीनी हमले जैसे ही तेज़ किए, ग़ज़ा में इंटरनेट और फ़ोन सेवाएं पूरी तरह बंद हो गई हैं. इसकी वजह से 48 घंटे तक संचार पूरी तरह से ठप रहा. हम एडम, अब्देलहकीम, फ़रीदा और ख़ालिद से संपर्क नहीं कर सके.

जब संचार नेटवर्क फिर से बहाल हुआ, उन्होंने हालात बयान किए.

अब्देलहकीमः “पिछली रात भारी बमबारी हुई. संपर्क साधने का कोई ज़रिया नहीं है और एंबुलेंस लोगों तक नहीं पहुंच सकतीं, इसलिए जिस पर भी बम गिर रहा है, मौके पर ही मारा जा रहा है.”

एडमः “अल्लाह का शुक्र है कि मैं ठीक हूं. लेकिन जब संचार बंद था, उसी दौरान मेरे पिता की मौत हो गई. उनकी आत्मा को शांति मिले. उस समय मैं बिल्कुल सन्न रह गया, यहां तक कि अपने करीबियों को भी नहीं बता पाया. ये भी बता नहीं पाया कि उस समय क्या हुआ था.”

फ़रीदाः “दोस्त की मौत हो गई और मेरा घर तबाह हो गया. ” आंसुओं के बीच वो कहती हैं, “मेरा भाई घायल हो गया. ये दुख मेरे दिल को खा रहा है. हम ठीक नहीं है. हम पूरी तरह टूट चुके हैं.”

ख़ालिदः “दिन कुछ समान्य था लेकिन जब इंटरनेट बहाल हुआ, तब हमें ख़बरें मिलनी शुरू हुईं. पूरे घर के घर और ब्लॉक के ब्लॉक तबाह हो गए थे. पूरा परिवार मारा गया. हालात बहुत भयावह हैं. उन्होंने पहले हमें दुनिया से काट दिया और फिर जनसंहार शुरू हुआ.”

सोमवार, 30 अक्टूबर
इसराइली टैंक ग़ज़ा सिटी के क़रीब पहुंच रहे हैं और सलाह अल-दिन रोड से साफ़ दिखाई देते हैं. यह उत्तरी ग़ज़ा से दक्षिणी ग़ज़ा की ओर जाने वाली मुख्य ‘सुरक्षित रोड’ है.

खालिदः “मैं नहीं जा रहा हूं. अब हम सोच रहे हैं कि या अल्लाह अगला बम कब गिरेगा कि हम सब मर सकें और शांति पाएं.”

ये अंतिम बार था जब हमें खालिद की ओर से संदेश मिला. जबालिया में जहां वो रहते हैं, वहां 31 अक्टूबर को इसराइली हवाई हमले के बाद उनसे हमारा संपर्क टूट गया.

फ़लस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में 101 लोग मारे गए और 382 लोग घायल हुए.

इसराइल ने कहा कि वो नागरिकों की नहीं बल्कि हमास के एक वरिष्ठ कमांडर को निशाना बना रहे थे.

इसराइल का आरोप है कि इस संगठन ने अपने सदस्यों को नागरिक इलाकों में रखा हुआ है. हमास को इसराइल, अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और अन्य कई देशों ने चरमपंथी संगठन घोषित कर रखा है.

फ़रीदाः “मेरे कुछ सपने हैं. मेरे पास परिवार और दोस्तों का एक बड़ा घेरा है. बहुत अच्छी ज़िंदगी है.”

“जब हम मरेंगे, किसी को कुछ भी नहीं पता चलेगा कि क्या हो रहा है. कृपया जो कुछ मैं कहती हूं उसे लिखना. मैं दुनिया को अपनी कहानी सुनाना चाहती हूं क्योंकि मैं महज एक संख्या नहीं हूं.”

एडमः “मैं आपको यह पूरी कहानी सुनाना चाहता हूं, ताकि ये दर्ज हो सके, ताकि दुनिया को हमेशा के लिए शर्म महसूस होती रहे कि जो कुछ हम पर घटित हुआ, उसने होने दिया. “

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ग़ज़ा में एक जेनोसाइड (जनसंहार) को रोकने के लिए समय तेज़ी से ख़त्म हो रहा है.

पहले चार हफ़्तों में 10,000 से अधिक फ़लस्तीनी मारे गए, जिनमें अधिकांश नागरिक हैं. इनमें 4,000 से अधिक बच्चे शामिल हैं.

*ग़ज़ा में मरने वालों की संख्या हमास शासित स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा मुहैया कराए गए हैं.

हाया अल बादरनेह और मैरी ओ रेली की अतिरिक्त रिपोर्टिंग

Sarah Wilkinson
@swilkinsonbc

Israeli tanks have arrived at Al-Rantisi, Al-Nasr & Al-Ayoun hospitals in Gaza: who will save the patients & children? No one?

The Muslim
@TheMuslim786

Turkey has sent 500 tons of aid with all aid material including ambulances, which is the largest aid ever but it does not matter,

Turkey should take strict action against Israel

Stewie
@StewzieGriffin

🚨BREAKING🌐: Hamas leader, Osama Hamdan, asserts that Arab and Islamic nations possess the means to stand up against American pressure.

@gaza_genocide
@sherpasian

#GazaHolocaust “Israel has spent a month pounding Gaza into rubble and filling the streets with children’s blood. With European and American weapons, and European and American support. Still von der Leyen cannot even say the word: “ceasefire.” This isn’t just Israel’s genocide. I

@Misra_Amaresh
@misra_amaresh
ये video/photos देखिये। #Gaza मे उत्तर से दक्षिण, लाखों लोग पलायन कर रहे हैं। जब Yugoslavia या Rwanda मे ऐसा कत्लेआम/पलायन हुआ तब पश्चिमी देशों ने बहुत हाय-तौबा मचाई। अब सब चुप हैं। पश्चिम और इजराइल के जुल्म के खिलाफ #Hamas और #Palestinian resistance का रास्ता सही है!

 

@Misra_Amaresh
@misra_amaresh
हमने आज के posts मे बताया था कैसे #Israeli टैंक #Gaza Al-Nasr इलाके के #hospitals को घेरे हुए हैं। अब ये video देखिये। जब Al Nasr के लोगों ने शांति का सफेद झंडा दिखाते हुए, #IDF के कहे अनुसार, इलाका खाली करने कोशिश की, तो उनपे IDF के गुंडे ने (सैनिक नहीं हैं) गोली चला दी!
#GazaHolocaust

@Misra_Amaresh
@misra_amaresh
आज #Jerusalem मे विश्व ख्याति प्राप्त
#AlAqsa मस्जिद के अंदर #Israel ने फिलिस्तीनियों को जुमे की नमाज़ तक नही पढ़ने दी। जब जनता सड़क पर नमाज़ अदा करने लगी तो #IDF ने हमला कर नमाज़ियों को तितर बितर कर दिया। Jerusalem मे तो #Hamas है भी नही। तो ये सब क्यूं?

#Israeli टैंक किसी सैनिक ठिकाने को नही, बल्कि Al Nasr बच्चों का अस्पताल, Al Rantasi अस्पताल, और Al Nasr आंख का अस्पताल, जो #Gaza मे अगल-बगल हैं, को घेरो हुए हैं। दूसरे Video मे अस्पताल के अंदर असहाय बच्चें हैं। पूरी दुनिया के सामने ये ज़ुल्म हो रहा है! पर सब खामोश हैं!

@Misra_Amaresh
@misra_amaresh

IN THE LAST 12 HOURS #Israel FACED MILITARY DEFEATS BUT BOMBED 8 HOSPITALS!

The video below is of #Israeli tanks surrounding the Rantisi, Al Nasr Children, and Eye Hospital!

WHY SURROUND HOSPITALS
@netanyahu
! BLOOD OF INNOCENTS ON FAUDA STAR
@lioraz
!

9-10 नवंबर #Jenin की जंग #Palestinians कैसे जीते? ये video देखिये: एक fighter को गोली लगी। para medic मदद करने पहुंचा; fighter ने para medic से राईफिल उठाने को के लिये कहा! para medic को भी गोली लगी! फिर एक आम-आदमी वही राईफिल उठा कर #IDF से लोहा लेने लगा! मतलब fighters के साथ जनता स्वतःस्फूर्त तरीके से लड़ी!