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ग़ज़ा की जंग में थक गया इस्राईल, हमास से समझौते की चोरी-छिपे की कोशिशें तेज़ : रिपोर्ट

ग़ज़्ज़ा दलदल में समाते जा रहे हैं इस्राईली सैनिक

ज़ायोनी सेना ने एलान किया है कि ग़ज़्ज़ा युद्ध में उसके तीन और सैनिक मारे गए हैं।

ज़ायोनी सेना ने अपने बयान में कहा कि उसकी सार मेगोलन बटालियन के 22 वर्षीय सैनिक को दक्षिणी ग़ज़्ज़ा में मार दिया गया जबकि 24 वर्षीय सैनिक नेरिया ज़िसेक को मध्य ग़ज़्ज़ा में मार दिया गया। ये दोनों सैनिक रिजर्व सेना के थे।

ज़ायोनी सेना ने मारे गए तीसरे सैनिक के बारे में अपने बयान में कहा कि 32 वर्षीय डोवर डेविड फेमा मध्य ग़ज़्ज़ा में मारा गया और 180वीं बटालियन का डिप्टी कमांडर था। ज़ायोनी सेना ने अपने बयान में कहा कि ग़ज़्ज़ा युद्ध के दौरान उसके तीन और सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

ग़ज़्ज़ा पर ज़ायोनी शासन के आधिकारिक बयान के अनुसार, ज़मीनी हमले की शुरुआत के बाद से 173 ज़ायोनी सैनिक मारे गए हैं जबकि तूफ़ान अल-अक्सा ऑपरेशन के बाद से मारे गये ज़ायोनी सैनिकों की संख्या 500 तक पहुंच गई है।

जानकार हलक़ों का कहना है कि ज़ायोनी सेना मृत सैनिकों की सही संख्या छिपाती है

ग़ज़्ज़ा में इस्राईली सेना फंसी, ग़लत रणनीति की बात स्वीकार की

ज़ायोनी मीडिया का कहना है कि इस्राईली सैन्य अधिकारियों ने ग़ज़्ज़ा युद्ध में ग़लत रणनीति अपनाने की बात स्वीकार की है।

ज़ायोनी समाचार पत्र येदीयेत अहारनोत ने ग़ज़्ज़ा युद्ध में सेना द्वारा ग़लत रणनीति की बात स्वीकार करने की ओर इशारा करते हुए हिज़्बुल्लाह और ज़ायोनी शासन के बीच एक बड़े युद्ध की संभावना की सूचना दी है।

इस्राईली अख़बार येदियेत अहारनोत ने लिखा है कि ज़ायोनी शासन की सैन्य कमान ने राजनीतिक अधिकारियों को सूचित किया है कि वर्ष 2024 युद्ध का वर्ष होगा।

ज़ायोनी सेना के सेनाध्यक्ष हर्टज़ी हलेवी ने दावा किया है कि उनके पास कूट्टरपंथी गुटों को ख़त्म करने के लिए कोई जादू की छड़ी नहीं है, लड़ाई कठिन और निर्णायक है और हम हमास के नेताओं को पकड़ लेंगे, इसमें एक सप्ताह या इसमें कई महीने लग सकते हैं।

इस ज़ायोनी अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ युद्ध जारी रखने को लेकर इस्राईल के भीतर ही आलोचना हो रही है।

थक गया इस्राईल, हमास से समझौते की उम्मीद

ज़ायोनी शासन को क़ैदियों के आदान प्रदान के लिए हमास के साथ एक समझौते पर पहुंचने की उम्मीद है।

ज़ायोनी अखबार येदीयेत अहारनोत ने बताया कि आने वाले दिनों में क़तर की मदद से क़ैदियों के आदान-प्रदान के समझौते के संबंध में इस्राईल, फ़िलिस्तीन के इस्लामी आंदोलन हमास के जवाब का इंतजार कर रहा है।

इस अखबार ने लिखा है कि इस्राईल में ऐसे किसी समझौते को लेकर फ़िलीस्तीन के इस्लामी आंदोलन हमास से कोई सकारात्मक जवाब की उम्मीद नहीं है जबकि तेल अवीव का मानना ​​है कि हमास आंदोलन पर सैन्य दबाव डालकर ही इसका सकारात्मक जवाब पाया जा सकता है।

ऐसी स्थिति में हमास आंदोलन ने बारम्बार इस बात पर ज़ोर दिया है कि ग़ज़्ज़ा के नागरिकों के ख़िलाफ़ बर्बर हमलों को रोके बिना ज़ायोनी शासन के साथ क़ैदियों की अदला-बदली पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।