दुनिया

ग़ज़ा में क़त्लेआम के दुष्परिणाम अवैध ज़ायोनी शासन को भुगतने ही होंगे : वीडियो रिपोर्ट

हमास और ज़ायोनी शासन के बीच बंदियों के आदान-प्रदान का क्रम जारी है।

ग़ज़्ज़ा पर ज़ायोनियों के आक्रमण के बाद आरंभ होने वाली युद्धबंदी को अब छह दिन होने को आए हैं। संघर्ष विराम के अन्तिम दिन दोनो पक्षों की ओर से अन्य बंदियों को स्तंत्र कराने की इच्छा ज़ाहिर की गई है। इस बारे में दोहा में क़तर और मिस्र की मध्यस्थता से दूसरे बंदियों को आज़ाद कराने के विषय पर चर्चा चल रही है। इससे पहले अवैध ज़ायोनी शासन और फ़िलिस्तीन के प्रतिरोध आन्दोलन हमास के बीच क़तर के माध्यम से होने वाली वार्ता में चार दिनों के संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी।

इस सहमति के साथ ही शुक्रवार से चार दिनों का संघर्ष विराम आरंभ हुआ जिसके अन्तर्गत हर ज़ायोनी बंदी की आज़ादी के बदले में तीन फ़िलिस्तीनी बंदियों को ज़ायोनी जेलों से स्वतंत्र किया गया। संघर्ष विराम की चार दिवसीय अवधि पूरी हो जाने के बाद दो दिनों के संघर्ष विराम पर फिर सहमति बनी जो बुधवार को समाप्त हो जाएगी।

इसी बीच ज़ायोनी शासन इस बात को सार्वजनिक रूप में स्वीकार कर चुका है कि ग़ज़्ज़ा युद्ध में उसको कोई भी उलब्धि हासिल नहीं हो पाई। न तो वह युद्ध के माध्यम से अपने बंदियों को ही स्वतंत्र करा पाया और न ही हमास को समाप्त करने का उसका संकल्प पूरा हुआ। फ़िलिस्तीनी बंदियों की आज़ादी ने उनके बीच एकता को अधिक मज़बूत किया है।

हालांकि फ़िलिस्तीन के विपरीत ज़ायोनी बंधकों की स्वतंत्रता से इस्राईल के भीतर एक नई चुनौती सामने आई है। यह चुनौती नेतनयाहू और उसके मंत्रीमण्डल के बीच दिखाई दे रही है। हाआरेत्स समाचारपत्र के अनुसार ज़ायोनी बंदियों के साथ हमास के व्यवहार के कारण इन बंदियों के बयान, नेतनयाहू के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं। यह इसलिए है क्योंकि नेतनयाहू, हमास को पूरी दुनिया के सामने एक बहुत की क्रूर एवं आतंकवादी संगठन दर्शाने के प्रयास कर रहे हैं किंतु आज़ाद होने वाले इस्राईली बंदियों के बयान, नेतनयाहू के दुष्प्रचारों के बिल्कुल ही विपरीत हैं।

इसी समाचारपत्र ने एक विश्वसनीय सूत्र के हवाले से बताया है कि ग़ज़्ज़ा पर युद्ध के आरंभिक दिनों में हमास के नेता यहया सिनवार ने किसी टनल में इस्राईली बंदियों से मुलाक़ात की थी। उन्होंने इस बंदियों को आश्वस्त किया था कि आपके साथ अच्छा व्यवहार किया जाएगा। आपको कोई नुक़सान नहीं पहुंचेगा और बंदियों के आदान-प्रदान में आपको वापस भेज दिया जाएगा। हालांकि ज़ायोनियों की ओर से स्वतंत्र किये जाने वाले बंदी वहां पर अपने साथ किये जाने वाले दुर्वयव्हार और यातानाओं की बातें बता रहे हैं। इन बातों से पता चलता है कि भविष्य में बंदियों के आदान-प्रदान का मामला चाहे चलता रहे या रुक जाए किंतु जो कुछ ग़ज़्ज़ा में किया गया है उसके दुष्परिणाम, अवैध ज़ायोनी शासन के अतिवादी मंत्रीमण्डल और उसके प्रधानमंत्री को भुगतने होंगे।