विशेष

जब ‘भूलना’ घटित होता है….तो आप तक उसकी सूचना नहीं पहुंचती!

Ramakant Yadav
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क्या याद रखना है और क्या भूल जाना है! याद रखते-रखते एक दिन सब कुछ भूल जाना है। याद रखने को इच्छा चाहिए,मन्तव्य चाहिए, प्रयास चाहिए, मगर भूल जाने के लिए कुछ नहीं लगता। आप चाहने,कोशिश करने से भी भूलने की क्रिया को रोक नहीं सकते। जब ‘भूलना’ घटित होता है, तो आप तक उसकी सूचना नहीं पहुंचती। भूलने पर कोई नियंत्रण नहीं। भूलना ऐसे घटता जाता है, जैसे जीवन घटते-घटते एक दिन मृत्यु से जुड़ जाता है।\

याद रखने और भूल जाने का संघर्ष अनवरत चलता रहता है। कुछ चीजें हम याद रखना नहीं चाहते और कुछ चीजें हम चाहकर भी याद नहीं रख सकते। कभी किसी को भुला देने में सुख है तो कभी किसी को याद न रख पाने में लाचारी है। भूल जाने और भुला देने में फ़र्क है। भूल जाना पानी के बहाव की तरह घटता है। भुला देने में प्रयास है, प्रयोग है, सफलता-असफलता है, प्रयोजन है, नियोजन है, टीस है, पश्चाताप है, वेदना है। “भुला दिया जाना” भूलने-भुलाने का सबसे पीड़ादायक पक्ष है। कोई एक बोल को तरसता है और उधर तमाम लोग अपने आप में मग्न होते हैं।
~ Shail भइया 🌻