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टीवी पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या मामले के चार दोषियों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनायी गयी!

टीवी पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या मामले के चार दोषियों को उम्र क़ैद और एक को तीन साल की सज़ा सुनाए जाने के बाद सौम्या विश्वनाथन की मां ने कहा है कि एक तरह से उनका परिवार भी उम्र क़ैद की सज़ा भुगत रहा है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, दिवंगत सौम्या विश्वनाथन की मां माधवी विश्वनाथन ने कहा, “एक तरह से, हम भी आजीवन कारावास भोग रहे हैं.”

वहीं एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, ”संतुष्ट नहीं कह सकते, कह सकते हैं कि हां अच्छा हुआ, जो भी हुआ.”

माधवी विश्वनाथन ने कहा, ”बाक़ी लोगों को पता चलेगा कि ऐसे भी होता है, जो ऐसा करेंगे, उन्हें अपना करम भुगतना पड़ेगा… इससे समाज को एक मैसेज गया है और जाना चाहिए.”

उन्होंने न्याय मिलने में होने वाली देरी पर अपनी नाख़ुशी भी जताई.

घटना की रात क्या हुआ?

घटना की रात सौम्या स्वामीनाथन दफ़्तर में काम कर रही थीं, मालेगाँव और मोडेसा के धमाकों पर रिपोर्ट तैयार करते-करते उन्हें काफ़ी देर हो गई थी. वे सेंट्रल दिल्ली के अपने दफ़्तर से अपने घर वसंत कुंज जा रही थीं, जो दक्षिण दिल्ली में है.

सौम्या ने हत्या से कुछ पहले सवा तीन बजे अपने पिता से फ़ोन पर बात की और उनसे कहा था कि वे जल्द ही घर पहुँचने वाली हैं.

पुलिस को ड्राइवर वाली सीट पर सौम्या अचेत अवस्था में मिलीं, उनके सिर में गोली लगी थी और अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया, लेकिन उस समय तक हत्या की वजह या हत्यारे के बारे में कुछ पता नहीं चल सका.

उनकी गाड़ी में संघर्ष के निशान दिखाई पड़ रहे थे और उनकी कार का एक टायर भी पंचर हो गया था, कार की ट्यूब में से पुलिस ने एक गोली बरामद की.

तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बयान पर हुआ था विवाद

सौम्या विश्वनाथन की हत्या के मामले में दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बयान पर विवाद खड़ा हो गया था.

दीक्षित ने सौम्या की हत्या पर दुख प्रकट करते हुए कहा था कि “बहुत ज़्यादा साहस दिखाना अच्छा नहीं है.”

उन्होंने कहा था, “लोगों को इतना एडवेंचरस नहीं होना चाहिए, मुझे उनके परिवार के बारे में सोचकर बहुत बुरा लग रहा है, जाँच अभी चल रही है. वो एक ऐसे शहर में सुबह के तीन बजे अकेले गाड़ी चलाकर जा रही थी जहाँ रात के अंधेरे में महिलाओं का निकलना बहुत सुरक्षित नहीं माना जाता, मुझे लगता है कि हमें थोड़ा एहतियात बरतना चाहिए. मैं सचमुच बहुत दुखी हूँ.”

सौम्या विश्वनाथन मालेगांव और माडेसा के धमाकों पर काम कर रही थीं.

सौम्या विश्वनाथन की हत्या 30 सितंबर, 2008 को वसंत कुंज इलाक़े के नेल्सन मंडेला रोड पर कर दी गई थी.

दोषी करार दिए गए बदमाशों पर लूट के इरादे से उनकी हत्या करने का आरोप सिद्ध हुआ है. उनकी हत्या तब की गई जब वो एक चैनल की अपनी ड्यूटी पूरा करके घर लौट रही थीं.

अदालत ने इससे पहले 18 अक्टूबर को सभी पांच अभियुक्तों को दोषी क़रार दिया था.