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तमिलनाडु : यौन उत्पीड़न के मामले में 215 लोगों को कसूरवार ठहराने के निचली अदालत के फ़ैसले को मद्रास हाई कोर्ट ने बरकरार रखा!

तमिलनाडु के वचाती गांव में महिलाओं के यौन उत्पीड़न और जनजातीय लोगों पर अत्याचार के मामले में 215 लोगों को कसूरवार ठहराने के निचली अदालत के फ़ैसले को मद्रास हाई कोर्ट ने बरकरार रखा है.

इस केस में दोषी ठहराए गए लोगों में वन विभाग और पुलिस महकमे के कर्मचारी भी शामिल हैं.

दोषी ठहराए गए लोगों पर आरोप है कि चंदन तस्करी के ख़िलाफ़ डाली गई रेड के दौरान उन्होंने गांव के लोगों के साथ बुरा बर्ताव किया था.

मद्रास हाई कोर्ट ने धर्मपुरी की निचली अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर की गई अपील को शुक्रवार को खारिज कर दिया.

इस फ़ैसले में कसूरवार ठहराए गए 215 लोगों को एक साल से दस साल तक की जेल की सज़ा सुनाई गई थी.

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को जस्टिस पी वेलमुरुगन ने यौन उत्पीड़न का सामना करने वाली 18 पीड़ित महिलाओं को दस लाख रुपये का मुआवजा फौरन दिए जाने का भी निर्देश दिया.


धर्मपुरी की इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था.

जस्टिस पी वेलमुरुगन ने अपने फ़ैसले में ये भी कहा है कि अगर किसी पीड़ित की मौत हो गई हो तो मुआवजे की रकम उसके परिजनों को दी जाए.

“ज़िलाधिकारी, ज़िले के एसपी और ज़िला वन अधिकारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जानी चाहिए और सरकार को पीड़ित परिवारों को मुआवजा देना चाहिए.”

पीड़ितों के वकील ने बताया कि अदालत ने बलात्कार के अभियुक्तों से पांच लाख रुपये वसूल करने का भी आदेश दिया है.

इस केस में धर्मपुरी की अदालत ने साल 2011 में वन विभाग के 126 कर्मचारियों को दोषी ठहराया था.

इसमें चार अधिकारी भारतीय वन सेवा के थे, 84 लोग पुलिस के कर्मचारी थे, पांच राजस्व विभाग के लोग थे.

साल 1992 की इस घटना की जांच में बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपी गई थी.

इस केस के 269 अभियुक्तों में से 54 की मौत ट्रायल के दौरान हो गई थी.

केस के 12 अभियुक्तों को दस साल, पांच लोगों को सात साल और बाक़ी लोगों को एक साल से तीन साल जेल की सज़ा सुनाई गई थी.