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तुम्हारी हिम्मत कैसे हिम्मत कैसे हुई नेल्सन मंडेला को गांधीवादी कहने की?

Kranti Kumar
@KraantiKumar
तुम्हारी हिम्मत कैसे हिम्मत कैसे हुई नेल्सन मंडेला को गांधीवादी कहने की?

नेल्सन मंडेला और गांधी का कोई दूर दूर तक संबंध नज़र नही आता, नेल्सन मंडेला तो डॉ आंबेडकर से प्रभावित इंसान मालूम पड़ते हैं.

गांधी का दक्षिण अफ्रीका में संघर्ष अस्वेत या भारतीय मजदूरों के लिए नही केवल अमीर भारतीय व्यापारी वर्ग के लिए था जिन्हें दक्षिण अफ्रीका में पैसेंजर इंडियन कहा जाता था.

डॉ बाबा साहेब आंबेडकर छुआ छुत जातिवाद वर्ण व्यवस्था के खिलाफ डट कर संघर्ष करते हैं और भारत में लोकतंत्र स्थापित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

कुछ इसी प्रकार का संघर्ष नेल्सन मंडेला का दक्षिण अफ्रीका में रहा है. नस्लवाद गरीबी असमानता अन्याय और अपरथेड के विरुद्ध उनका संघर्ष दक्षिण अफ्रीका में लोकतंत्र और समानता की नींव रखने में सफल रहा.

फिर क्यों मंडेला को गांधीवादी कहकर प्रचार होता है ? दोनों में कोई समानता नही है, क्या सिर्फ अहिंसा के मार्ग पर चलना गांधीवाद है ? डॉ आंबेडकर भी अहिंसा के मार्ग पर चले तो क्या वे भी गांधीवादी हुए नही न ?

फिर नेल्सन मंडेला कैसे गांधीवादी हुए ? नेल्सन मंडेला पूरी तरह अम्बेडकरवादि हैं.

6 दिसंबर को बाबा साहेब की पुण्यतिथि थी और 5 दिसंबर को नेल्सन मंडेला की पुण्यतिथि थी. उन्हें नमन करना भूल गया, अम्बेडकरवादि नेल्सन मंडेला को कोटि कोटि नमन.

Dayashankar Mishra
@DayashankarMi
‘राहुल गांधी : सांप्रदायिकता, दुष्प्रचार, तानाशाही से ऐतिहासिक संघर्ष’ अमेजॉन पर मुश्किलों के बीच आज से फ्लिपकार्ट पर भी उपलब्ध है। किताब की कीमत 650 रुपए है। समय निकाल कर किताब ऑर्डर कीजिए।पढ़िए,दोस्तों,परिजनों तक पहुंचाइए।आप पढ़ कर बेहतर बता सकते हैं,आखिर क्यों मुझे किताब से पहले इस्तीफ़ा देने के लिए कहा गया। कारपोरेट मीडिया और सांप्रदायिक शक्तियां किन आवाज़ों को चुप करना चाहती हैं। आप पढ़कर ख़ुद समझें तो बेहतर होगा।भारतीय लोकतंत्र और संविधान पर सांप्रदायिकता के प्रतिवाद का हिस्सा बनिए। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के कचरे, हमले से अपने महान देश की रक्षा कीजिए।

Kranti Kumar
@KraantiKumar
मुझे परवाह नही महुआ मोइत्रा की सदस्यता चली गयी.

महुआ मोइत्रा ने संसद भवन में OBC SC ST समाज से जुड़े मुद्दों की कभी परवाह नही की. और ना ही कभी सामाजिक न्याय के मुद्दे पर बोला.

भद्रलोक बंगालियों की पार्टी TMC जाति जनगणना के खिलाफ है.

मीडिया को विपक्षी खेमे से एक एंटरटेनिंग चेहरे की जरूरत थी, महुआ मोइत्रा BJP के खिलाफ एक एंटरटेनिंग फेस थीं बस और कुछ नही.

अब आप लोगों को मीडिया अब नया चेहरा प्रस्तुत करेगा. कौन हो सकता है वो चेहरा ?

 

डिस्क्लेमर : लेखकों ने निजी विचार हैं, तीसरी जंग हिंदी का कोई सरोकार नहीं है