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दुनिया का मौजूदा माहौल परमाणु विनाश की आहट दे रहा है : यूएन प्रमुख

दुनिया ने कल ‘अंतरराष्ट्रीय परमाणु परीक्षण विरोधी दिवस’ मनाया लेकिन आठ सबसे बड़े परमाणु देशों ने सीटीबीटी को अब तक रेटीफाई नहीं किया है. यूएन प्रमुख ने कहा कि मौजूदा माहौल विनाश की आहट दे रहा है.

दुनिया में विभिन्न देशो के बीच जिस तरह अविश्वास बढ़ रहा है और जिस तरह महाशक्तियां अपने परमाणु हथियारों की ताकत और सटीकता बढ़ा रही हैं, वो सब मिलकर विनाश की आहट दे रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र प्रमुख अंटोनियो गुटेरेश ने ‘अंतरराष्ट्रीय परमाणु परीक्षण विरोधी दिवस’ के मौके पर यह चेतावनी देते हुए कहा कि पूरी दुनिया में करीब 13,000 परमाणु हथियार मौजूद हैं और परमाणु परीक्षणों पर रोक समय की जरूरत हो गयी है.

गुटेरेश ने कहा, “परमाणु हथियार मुक्त दुनिया का लक्ष्य हासिल करने के लिए परमाणु परीक्षणों पर कानूनी तौर पर बाध्य रोक लगाना एक आधारभूत कदम होगा.”

परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाने के लिए समग्र परमाणु परीक्षण निषेध संधि (सीटीबीटी) की गयी है. इसमें 196 सदस्य देशों में से 186 शामिल हैं और 178 ने इसे रेटीफाई भी कर दिया है. आठ देशों ने तो पिछले 18 महीने में ही इसे रेटीफाई किया है. लेकिन आठ परमाणु शक्ति संपन्न देशों ने अब तक इसे रेटीफाई नहीं किया है.

ये वे देश हैं जिनके पास 1996 में संधि के वक्त परमाणु रिएक्टर थे या उन पर शोध किया जा रहा था. यानी जब तक ये आठ देश – अमेरिका, चीन, मिस्र, ईरान, इस्राएल, उत्तर कोरिया, भारत और पाकिस्तान सीटीबीटी को रेटीफाई नहीं करते हैं, तब तक संधि निष्प्रभावी ही साबित होगी. इनमें से अमेरिका, चीन, इस्राएल, उत्तर कोरिया, भारत और पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार मौजूद हैं.

रेटीफाई भी नहीं किया
‘अंतरराष्ट्रीय परमाणु परीक्षण विरोधी दिवस’ मनाये जाने के दौरान यूएन में ईरान के दूत हैदर अली बालूजी ने कहा कि उनका देश परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाने में हो रही देरी के कारण उन देशों को हो रही परेशानी समझ सकता है, जिनके पास परमाणु हथियार नहीं हैं. हालांकि उन्होंने इस बारे में कोई संकेत नहीं दिया कि ईरान संधि को रेटीफाई करेगा या नहीं. बालूजी ने कहा, “परमाणु खतरे से दुनिया को दूर करने का दारोमदार उन देशों पर है, जिनके पास परमाणु हथियार हैं.”

संयुक्त राष्ट्र की निरस्त्रीकरण के लिए काम करने वाली संस्था की प्रमुख इजूमी नाकामित्सू ने सदस्य देशों को बताया कि परमाणु परीक्षणों पर रोक अब एक आपाताकालीन जरूरत है, क्योंकि संधि ने “परमाणु परीक्षणों पर रोक के लिए” एक आधार तो उपलब्ध करवा दिया है लेकिन चलन में दिखाई दे रहा है कि उसे नजरअंदाज किया जा रहा है.

नाकामित्सू ने कहा, “पिछले तीन दशकों में परमाणु निषेध और निरस्त्रीकरण की दिशा में जो प्रगति बहुत मेहनत से हासिल की गयी है, वह हालिया खतरों के कारण मुश्किल में पड़ गयी है. इसमें परमाणु परीक्षणों को रोकने की दिशा में की गयी तरक्की भी शामिल है.” 21वीं सदी में उत्तर कोरिया एकमात्र देश है जिसने परमाणु परीक्षण किये हैं.

रॉबर्ट फ्लोयड संयुक्त राष्ट्र की परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि संस्था के प्रमुख हैं. उन्होंने कहा कि यह वैश्विक स्तर पर एक चिंताजनक और चुनौतीपूर्ण समय है, हालांकि दक्षिणी सूडान और सोमालिया दोनों की सरकारों ने संधि पर दस्तखत करने और उसे रेटीफाई करने की प्रतिबद्धता जताई है.

रूस और उत्तर कोरिया की आलोचना
28 पश्चिमी देशों की ओर से बात करते हुए यूएन में नीदरलैंड्स के राजदूत योका ब्रैंट ने कहा कि सीटीबीटी को लागू किया जाना अब बेहद महत्वपूर्ण हो गया है. उन्होंने कहा कि रूस के यूक्रेन पर आक्रमण और “परमाणु हथियारों के इस्तेमाल और परीक्षणों की धमकियों” ने परमाणु निषेध और निरस्त्रीकरण की कोशिशों पर बहुत बुरा असर डाला है. उन्होंने उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों की भी आलोचना की. ब्रैंट ने कहा कि 2006 से अब तक उत्तर कोरिया छह परमाणु परीक्षण कर चुका है और खबर है कि सातवें की भी तैयारी में है.

यूरोपीय संघ के दूत सिल्वियो गोंजाटो ने कहा कि रूस का परमाणु परीक्षण के लिए तैयार होने का ऐलान करना परमाणु निषेध संधि का उल्लंघन है और “इस मुश्किल वक्त में संधि पर भरोसा” डगमगाने का खतरा पैदा करता है. ईयू ने उत्तर कोरिया से भी सुरक्षा परिषद द्वारा उस पर लगाये गये परमाणु परीक्षण के प्रतिबंधों का पालन करने की मांग की. गोंजाटो ने कहा कि उत्तर कोरिया को “कभी भी परमाणु शक्ति संपन्न देश का दर्जा नहीं मिल सकता.”

‘अंतरराष्ट्रीय परमाणु परीक्षण विरोधी दिवस’ 29 अगस्त को मनाया जाता है. 1991 में इसी दिन पूर्व सोवियत संघ के सेमीपलातिंस्क स्थित परमाणु परीक्षण स्थल को बंद कर दिया गया था. अब यह जगह कजाखस्तान में है. 1945 में पहला परमाणु बम गिराये जाने के बाद से कम से कम आठ देशों ने 2056 से ज्यादा परमाणु परीक्षण किये हैं.

वीके/एए (रॉयटर्स, एएफपी)