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दोषारोपण का खेल शैतान की ओर से…

दोषारोपण का खेल शैतान की ओर से
लूका 6:37, “दोष मत लगाओ; तो तुम पर भी दोष नहीं लगाया जाएगाः दोषी न ठहराओ, तो तुम भी दोषी नहीं ठहराए जाओगेः क्षमा करो, तो तुम्हारी भी क्षमा की जाएगी।”

यह एक बहुत ही सामान्य बात है जो हम सभी के जीवन में देखते हैं। जब कोई गलती हो जाती है तो हम उस से बचने के लिए दूसरों पर दोष मढ़ देते हैं। इसने ऐसा किया इसलिए ऐसा हुआ। उसने ऐसा कहा इसलिए ऐसा हुआ। तुमने ऐसा किया इसलिए इसका ऐसा परिणाम निकला।

बाइबल में हम आदम और हव्वा के बारे में पढ़ते हैं, जो इस दुनिया में रहने वाले पहले इंसान थे। हम पढ़ते है कि परमेश्वर ने उनसे कहा कि वे इस वृक्ष का फल न खायें अन्यथा वे मर जायेंगे। एक दिन साँप आया और उसने हव्वा से कहा कि यदि तुम उस विशेष पेड़ का फल खाओगी तो तुम परमेश्वर के समान बन जाओगी। हव्वा ने देखा कि वह फल सुन्दर है, इसलिये उसने लेकर खा लिया। उसने वह फल आदम को भी दिया। तब परमेश्वर ने उनसे पूछा कि क्या तुमने वह फल खाया जिसे मैंने न खाने को कहा था। देखिए उन्होंने क्या जवाब दिया?

हव्वा ने कहा, सर्प ने मुझे बहका दिया, इसलिये मैं ने खाया। आदम ने कहा, जिस स्त्री को तूने मेरे संग रहने को दिया उसी ने मुझ को दिया और मेने उसे खा लिया। यहां हम देखते हैं कि कैसे वे दूसरों पर दोष मढ़ रहे थे। उन्होंने खुद होकर फल खाया लेकिन वे मानने को तैयार नहीं थे कि ये उनकी ही गलती थी और उन्होंने ही ऐसा किया और वो ही इसके लिए जिम्मेदार हैं.

उत्पत्ति 3:13, तब यहोवा परमेश्वर ने स्त्राी से कहा, तू ने यह क्या किया है? स्त्राी ने कहा, सर्प ने मुझे बहका दिया तब मै ने खाया।

उत्पत्ति 3:12, आदम ने कहा जिस स्त्राी को तू ने मेरे संग रहने को दिया है उसी ने उस वृक्ष का फल मुझे दिया, और मै ने खाया।

यहाँ हम देखते है, कैसे ये दोनों अपने किये का दोष दूसरे पर लगाते हैं. वे फल खाना चाहते थे इसलिए उन्होंने खा लिया अन्यथा कोई भी उन्हें मजबूर नहीं कर सकता था या उनके मुंह में फल डालकर उन्हें खाने के लिए मजबूर नहीं कर सकता था।

शैतान आपको हमेशा यह सोचने पर मजबूर करेगा कि आप ही सही हैं लेकिन बाकि दूसरे गलत हैं। इसीलिए आप, लोगों को यह कहते हुए सुनते हैं कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों ने क्या किया है या वे कैसे गलत हैं, लेकिन वे आपको कभी नहीं बताएंगे, “मैं गलत हूं”।

जब तक आप सोचते हैं कि आप में कोई पाप नहीं है और आपको पापों की क्षमा की आवश्यकता नहीं है। तब तक आप पापों की क्षमा प्राप्त नहीं कर सकते . पापों की क्षमा पाने के लिए आपको सबसे पहले यह स्वीकार करना होगा कि आप स्वयं पापी हैं और आपको पश्चाताप करके अपने जीवन को सुधारने की आवश्यकता है।
नीतिवचन 28:13, जो अपने अपराध छिपा रखता है, उसका कार्य सुफल नहीं होता, परन्तु जो उनको मान लेता और छोड़ भी देता है, उस पर दया की जायेगी।

मुझे याद है कई साल पहले मेरे परिवार में हम एक-दूसरे के साथ मेल मिलाप के साथ नहीं रह पाते थे। हमारे विचार अलग-अलग थे और हर एक बातचीत बहस में बदल जाती थी। हमें नहीं पता था कि उस स्थिति को कैसे ठीक किया जाए। हमें नहीं पता था कि हमारे घर में शांति कैसे आए। मेरे पापा इंजीनियर थे। हमारे जीवन में शांति के अलावा सब कुछ था। फिर कुछ साल बाद मेरे परिवार में हममें से हर एक ने उद्धार के अनुभव को प्राप्त किया, और प्रभु यीशु से पाप की क्षमा प्राप्त की। धीरे-धीरे कुछ महीनों और सालों में हमारा घर एक शांतिपूर्ण स्थान बन गया।

एक दिन हम हमेशा की तरह बातें कर रहे थे और हमारे बीच कुछ असहमति हो गई और फिर यह एक बड़ी बहस में बदल गई। उस दिन मेरा मन बहुत दुःख से भर गया. उस रात मैंने सोचा, “हमारे घर में कई महीनों से शांति थी, अब यह अप्रत्याशित घटना घट गई”। उस रात मैंने प्रार्थना की और प्रभु यीशु से कहा, “आपने मुझे बुरे लोगों के साथ एक बुरे घर में रखा है, इसलिए हमें कोई शांति नहीं है। कृपया उन्हें बदल दीजिये ताकि हमारे घर में शांति आ सके।”

प्रभु यीशु ने जो मुझसे कहा वह मेरे लिए बहुत चौंकाने वाला था। मुझे उस तरह के उत्तर की उम्मीद नहीं थी. प्रभु यीशु ने कहा, “अपने आप को बदलो और सब कुछ ठीक हो जाएगा।” मैंने सोचा क्या? मुझे अपने जीवन में बदलाव की आवश्यकता है? उस दिन के बाद से मेरे सोच विचार बदल गये. यह देखने के बदले कि मेरे परिवार में कौन गलत है, मैंने खुद को देखना शुरू कर दिया। दूसरों में बदलाव के लिए प्रार्थना करने के बजाय मैंने प्रार्थना करना शुरू कर दिया, “प्रभु, कृपया मेरे जीवन को बदल दें।”

मुझे विश्वास है कि मेरे परिवार के अन्य सदस्यों ने भी इसी तरह की प्रार्थना की होगी। और हमारा जीवन ख़ुशी और शांति से परिपूर्ण हो गया। हम अपने परिवार में एक-दूसरे का साथ बहुत पसंद करते है और जो समय हम साथ में गुजारते है वह बहुत आनंद से भरा हुआ होता है। आज हम एक-दूसरे से घंटों बातें करते है और कोई बहस नहीं होती। जब मैंने अपनी स्वयं की गलती देखना और उसे सुधारना शुरू किया, तब मुझे पता चला कि परमेश्वर ने मुझे बहुत अच्छे, दयालु और बहुत ख्याल रखने वाले लोगों के साथ एक बहुत अच्छे घर में रखा है।

प्रभु यीशु आपके लिए यह कर सकते हैं। एक व्यक्ति जब प्रभु यीशु से पापों की क्षमा पा लेता है तो उसके जीवन में शांति और ख़ुशी आ जाती है। जब एक परिवार प्रभु यीशु से पापों की क्षमा पा लेते है तो उस परिवार में शांति और ख़ुशी आ जाती है। शैतान आपको बताएगा, की आप परिपूर्ण है और अच्छे है और आपमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन केवल प्रभु यीशु ही आपको बताएंगे की आपको अपने जीवन में सुधार की आवश्यकता है।
जब आप प्रभु यीशु के चरणों में आते हैं। अपने पापों से पश्चाताप करते है और अपने जीवन को सुधारते है तब आपके जीवन में शांति होगी और इतना ही नहीं बल्कि आप देखेंगे कि आपका घर एक खुशहाल और शांतिपूर्ण स्थान बन गया है।

कृपया स्वर्ग में स्थान पाने के लिए और अपने जीवन में परिवर्तन के लिए सच्चे दिल से यह प्रार्थना करें:
प्रभु यीशु, मुझे स्वर्ग में जगह चाहिए। मुझे एक शांतिपूर्ण जीवन चाहिये. मैं चाहती/चाहता हूं कि मेरा परिवार शांति से रहे. मैं चाहती/चाहता हूं कि मेरा घर एक खुशहाल जगह हो। कृपया मेरे पापों को क्षमा करें और मुझे अनन्त जीवन दें। कृपया मेरा जीवन बदल दें। आपने मुझे अनन्त जीवन देने के लिए क्रूस पर अपना प्राण दे दिया। कृपया मुझे क्षमा करें और मेरे पापों को भूल जाएं और मुझे अनन्त जीवन दें। मैं प्रभु यीशु के नाम पर प्रार्थना करती/करता हूँ।

तथास्तु।