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दो करोड़ की डील में फंसी एसओजी वाली दिव्या की कुण्डली में महकमें के बड़े ख़ाक़ीधारियों के नाम सामने आने से खलबली सी मची : राजस्थान से धर्मेन्द्र सोनी की रिपोर्ट


कुशलगढ़ जिला बांसवाड़ा राजस्थान रिपोर्टर धर्मेन्द्र सोनी

सब खैरियत है…….मुकेश पूनिया
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चंहूओर फैली दिव्या की दिव्यता!
दो करोड़ की डील में फंसी एसओजी वाली दिव्या की कुण्डली में महकमें के बड़े खाकीधारियों के नाम सामने आने से खलबली सी मची हुई है। इनमें कई ऐसे भी खाकीधारी शामिल है जो महकमें की नयी पीढ़ी के लिये प्रेरणास्त्रोत माने जाते है। हालांकि दिव्या ने अभी तक खुलकर किसी का नाम नहीं लिया है,फिर भी उसकी कुण्डली से जुड़े नामी खाकीधारी बचावमुद्रा में घूम रहे है। इस मामले में एसओजी से जुड़े हाईप्रोफाइल मामलों की कुण्डलिया खंगालने पर पता चला है कि बड़ी डील से जुड़े ज्यादात्तर मामले दिव्या ही हैंडल कर रही थी,इससे पता चलता है कि दिव्या की दिव्यता महकमें में ऊपर तक फैली हुई थी। मजे कि बात तो यह है कि करोड़ो में खेलने वाली दिव्या की चमक खाकी के गलियारों से लेकर सत्तायी गलियारों तक दिखती झलकती थी,मगर अभी माहौल थोड़ा बदला हुआ है। इसलिये सब खैरियत है।
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कल्ला के लिये सिरदर्द बनी जाहिदा
गहलोत सरकार के शिक्षा विभाग की कमान संभाल रहे सिनियर मंत्री डॉ.बीडी कल्ला के लिये उनकी जूनियर मंत्री जाहिदा तगड़ा सिरदर्द बन गई है। मामला इसलिये बिगड़ा है कि पहले डॉ.कल्ला अकेले ही विभाग के तबादलों की फसल काट रहे थे,लेकिन अब जाहिदा उनके बराबर फसल काटने लगी है। इनके बीच तनातनी इस कदर बढ़ गई है कि दोनों एक दूसरे की फसल चौपट करने लगे है । इसका खामियाजा विभाग के दलालों को भुगतना पड़ रहा है,जो अपना धंधा चलाने के लिये अब दोनो के बीच सुलह कराने में जुटे है,मगर फिलहाल सब खैरियत है।
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भ्रष्टाचार की रिपोर्ट ने मचा रखा हडक़ंप
ऑडिट रिपोर्ट की कुण्डली से निकले भ्रष्टाचार के पुराने भूत ने हमारी पीबीएम होस्पीटल में इस कदर हडक़ंप मचा रखा है कि बस पूछो । शुरूआती आंकलन में करीब सौ करोड़ के इस भ्रष्टाचार की लपटों से बचने के लिये पीबीएम के धूंरधंरो की टीम उन तमाम फाइलों को ठिकाने लगाने में जुटी है,जो सालों से चल रहे काले कारनामों का भंडाफोड़ कर सकती है। इसके अलावा मामले को एसीबी के जयपुर मुख्यालय में ही दफन कराने के लिये सियासी घोड़े भी दौड़ाए जा रहे है । वहीं होस्पीटल के अंदरखाने से रिपोर्ट आई है कि भ्रष्टाचार के इस तुफानी मामले में इतना दम नहीं है जितना मीडिया में उछाला जा रहा है। इसलिये फिलहाल सब खैरियत है।
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विदाई के इंतजार में खाकी के फौजदार
बीकानेर की खाकी फौज में ऐसे कई फौजदार है जो यहां से अपनी विदाई का इंतजार कर रहे है। हालांकि इस बीते दिनों चली तबादलों की बयार में उनकी विदाई के आसार बने थे,लेकिन मंत्रियों और विधायकों की सिफारिशों में देरी के कारण तबादलों की लिस्टे अधूरी रह गई। अब तो विधानसभा सत्र खत्म होने के बाद ही लिस्टे जारी होने की उम्मीद है। फिलहाल विदाई के इंतजार में बैठे फौजदारों में कई तो मंत्रियों और नेताओं के रवैये से आहत होकर अपनी स्वैच्छा विदाई ले रहे है,कुछ ऐसे भी है जिनकी मंत्रियों के साथ बिगड़ी टयूनिंग की वजह से विदाई होने वाली है । ऐसे में चर्चा है कि आने वाले महिने में बीकानेर पुलिस का चेहरा पूरी तरह बदल जायेगा मगर फिलहाल सब खैरियत है।
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पार्षद बन गये नगर निगम के भोमिये
बीकानेर नगर निगम के भोमियों में अब ऐसे कई पार्षदों का भी नाम जुड़ गया है जो बिना कोई काम ही सुबह से शाम तक निगम में ही परिक्रमा करते रहते है। इनसे निगम अधिकारी और कार्मिक भी खासे परेशान रहने लगे है। इनमें से कई भोमिये तो एक-दो चाटूकारों को अपने साथ लेकर आते है। मजे कि बात तो यह सामने आई है कि इन भोमियों ने निगम अफसरों और कार्मिकों की चाय का बजट बिगाड़ दिया है । इनकी रोकथाम के लिये पिछले दिनों एक एडवाइजरी भी जारी की गई थी। लेकिन भोमिये इस एडवाइजरी को नहीं मान रहे,उनका मानना है कि हम तो जनप्रतिनिधि है,हम पर ऐसी कोई एडवाइजरी लागू नहीं होती। पता चला है कि निगम में भोमियों की रोकथाम के लिये कोई नया फंडा आजमाने की तैयारी चल रही है,मगर फिलहाल सब खैरियत है।
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फायर ब्रांड की वापसी के शुभ संकेत
बीकानेर शहर भाजपा से निष्कासित फायर ब्रांड नेता अब अपनी मंडली के साथ वापसी की तैयारी में है। इसे लेकर शहर के भाजपाई हल्कों में हलचल सी मची हुई है। पार्टी में वापसी के संकेत मिलने के साथ ही फायर ब्रांड की विरोधी मंडली भी जोशीले अंदाज के साथ एक्टिव मोड़ में आ गई है। पता चला है कि यह वहीं फायर ब्रांड नेता है जो दशकभर पहले पाला बदल कर हाथ वाली पार्टी में शामिल हो गये थे। हालांकि भाजपा का दामन छोड़े इन नेताजी को दो चुनावों का समय बीत चुका है,लेकिन इस बार सत्ता में आ रही भाजपा का फीडबैक मिलने के बाद जयपुर में भाजपाई महारानी के दरबार में लगातार हाजरी लगा रहे नेताजी को अभी पिछले दिनों अपनी वापसी के शुभ संकेत मिले है । अब देखने वाली बात तो यह है कि शहर के भाजपाई इनकी वापसी को हजम कर पाते है या नहीं। मगर फिलहाल सब खैरियत है।