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धर्म संसद में ‘ईसाई-मुसलमानों को मारने” का नारा देने वालों पर कोई कार्यवाही नहीं,,,ख़बर देने वाले के ख़िलाफ़ कार्यवाही : रिपोर्ट

पांच फरवरी को बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री के समर्थकों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘सनातन धर्म संसद’ का आयोजन किया था.

मुख्य वक्ता भक्त हरि महाराज के अनुसार, इस कार्यक्रम में शामिल होने वालों की तीन मुख्य मांगें हैं – रामचरितमानस को ‘हिंदू राष्ट्र’ भारत का राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाए, गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए और शास्त्री को जेड-प्लस सुरक्षा दी जाए.

हालांकि बाद में यह कार्यक्रम अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा के आह्वान में तब्दील हो गया.

आयोजन के एक पोस्टर में लिखा था, ‘सभी संतों और श्री बागेश्वर धाम के दीवानों का स्वागत है.’ इस आयोजन को प्रचारित करने वाला पहला पोस्टर 4 फरवरी को बागेश्वर धाम के ट्विटर एकाउंट द्वारा पोस्ट किया गया था. पोस्टर पर उल्लेखित मुख्य वक्ता का नाम भक्त हरि महाराज था, जिन्होंने इस कार्यक्रम में हिंसा का भी आह्वान किया.]

सनातन के समर्थन में… pic.twitter.com/wZXHRttZsJ

— Bageshwar Dham Sarkar (Official) (@bageshwardham) February 4, 2023

धीरेंद्र शास्त्री मध्य प्रदेश के छतरपुर में स्थित बागेश्वर धाम मंदिर के प्रमुख हैं. हाल ही में वह ‘चमत्कार’ करने संबंधी अपनी दावों के चलते विवादों में घिर गए थे. उनके ‘चमत्कार’ के दावे को महाराष्ट्र के नागपुर में एक कार्यक्रम में अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति से जुड़े तर्कवादी श्याम मानव ने चुनौती दी थी.

बताया जाता है कि इसके बाद शास्त्री समय से पहले ही उक्त आयोजन समाप्त करके लौट गए थे.

शास्त्री के अनुयायियों की मांगें उन मांगों के अनुरूप हैं, जो वे अपनी धार्मिक सभाओं में स्वयं करते हैं. वे अपने अनुयायियों से भारत को एक हिंदू राष्ट्र बनाने और रामचरित मानस को भारत का राष्ट्रीय ग्रंथ बनाने के लिए समर्थन मांगते हैं.

उन पर अस्पृश्यता फैलाने और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के भी आरोप लगे हैं.

मुख्य वक्ता भक्त हरि के भाषण की शुरुआत उत्तर प्रदेश के विधायक स्वामी प्रसाद मौर्य और बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर द्वारा रामचरितमानस की आलोचना के खिलाफ आक्रोश दिखाकर हुई.

उन्होंने कहा था कि यह किताब नफरत फैलाती है और दलितों एवं निचली जातियों के प्रति भेदभावपूर्ण है. ‘उन्हें सबक सिखाने’ के लिए कानूनी कार्रवाई की मांग करने के बाद भक्त हरि का आक्रोश अचानक अल्पसंख्यकों की तरफ केंद्रित हो गया.

उन्होंने कहा, ‘जो लोग हनुमान की पूजा करेंगे, उन्हें ईसाई और मुसलमान मार डालेंगे. गायों को खाने वाले तुम्हें खा जाएंगे. हमारे 36 करोड़ देवता एक गाय के अंदर रहते हैं और ये ईसाई और मुसलमान हर सूर्योदय से पहले 1.5 लाख गायों का वध कर देते हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘अखिलेश यादव (उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री) और नीतीश कुमार (बिहार के मुख्यमंत्री) ने रामचरितमानस की आलोचना करने के कृत्य की निंदा नहीं की है. वे बांटो और राज करो की राजनीति कर रहे हैं, जैसे कांग्रेस और अंग्रेज किया करते थे.’

उन्होंने कहा, ‘अंग्रेजों ने कहा था- तोड़ो, बांटो, राज करो. कांग्रेस ने कहा- तोड़ो, बांटो, राज करो. ईसाइयों ने कहा- तोड़ो, बांटो, राज करो. मुसलमानों ने कहा- काटो, मारो. ईसाइयों ने कहा- काटो, मारो.’

वे आगे बोले, ‘कब मारोगे? अरे, ईसाई-मुसलमानों को कब मारोगे?’

उन्होंने कहा, ‘आपके पास मारने के लिए कोई हथियार नहीं है. आपके पास सब्जियां काटने के लिए चाकू हैं. हथियार रखो. तलवारें रखो. बंदूकें रखो. हमारे सभी देवी-देवता अपने हाथों में शस्त्र धारण करते हैं. आपको एक हाथ में हथियार रखना चाहिए और दूसरे हाथ में धर्म ग्रंथ. हथियारों और किताबों का संतुलन बनाकर आगे बढ़ो. हमारे रामचरितमानस का अपमान करने वालों को देशद्रोही घोषित कर गोली मार देना चाहिए. जो हमारी बेटियों-बहुओं को उठा कर ले जाते हैं, उन्हें खुले में गोली मार दो, फिर चाहे ईसाई हों या मुसलमान.’

5 फरवरी को सनातन धर्म संसद के समय ही सुदर्शन टीवी के प्रमुख और हिंदुत्ववादी कार्यकर्ता सुरेश चव्हाणके के समर्थकों द्वारा एक और कार्यक्रम आयोजित किया गया था. वहां, वक्ताओं ने कहा कि भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने के लिए ‘मरने और मारने’ के चव्हाणके के 2021 के सार्वजनिक उद्बोधन पर सुप्रीम कोर्ट की आलोचनात्मक टिप्पणी ‘अनावश्यक कानूनी उत्पीड़न’ थी.

उन्होंने शीर्ष अदालत पर मुसलमानों का पक्ष लेने का भी आरोप लगाया और भारत को एक हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए फिर से शपथ ली. मंच से अल्पसंख्यकों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी और चव्हाणके का विरोध करने वालों के खिलाफ हिंसा का आह्वान किया गया.

दोनों घटनाओं में कुछ सामान्य वक्ता और दर्शक थे. दोनों घटनाओं के खिलाफ अभी तक कोई पुलिस कार्रवाई नहीं हुई है.

भक्त हरि द्वारा हिंसक कॉल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने ट्विटर हैंडल एक समाचार संस्था ‘मॉलिटिक्स’ को नोटिस दिया, जिसने इस घटना की सूचना दी थी.

दिल्ली पुलिस ने ट्विटर पर मॉलिटिक्स के पोस्ट को ‘आपत्तिजनक, दुर्भावनापूर्ण और कानून एवं व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले भड़काऊ संदेश’ पाया. गौरतलब है कि वीडियो में मौजूद सनातन धर्म संसद के वक्ताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

नोटिस के जवाब में मॉलिटिक्स के संस्थापक ने ट्वीट किया, ‘मैं अभी भी भ्रमित हूं! आप इसे हमें क्यों भेजेंगे? मुझे आशा है कि इस तरह का नोटिस इन भगवाधारी अपराधियों को भी गया होगा.’