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पाकिस्तान ने फैलाए तालेबान के सामने हाथ : पाकिस्तान ने तालेबान से टीटीपी के साथ वार्ता कराने के लिए मध्यस्थता की मांग की!

पाकिस्तान की सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान के तालेबान से मध्यस्थता की मांग की है।

इस्लामाबाद का कहना है कि टीटीपी के साथ वार्ता कराने के लिए अफ़ग़ानिस्तान के तालेबान को आगे आना चाहिए।

वैसे यह पहली बार नही है कि अफ़ग़ानिस्तान के तालेबान, पाकिस्तान की सरकार और टीटीपी के बीच मध्यस्थता के लिए आगे आए हैं। इससे पहले सन 2022 में भी तालेबान ने इस्लामाबाद सरकार और टीटीपी के बीच मध्यस्था की भूमिका निभाई थी। तालेबान द्वारा की जाने वाली यह मध्यस्थता इसलिए विफल हो गई क्योंकि दोनो पक्षों में से कोई भी अपने दृष्टिकोण से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं था।

टीटीपी या पाकिस्तान के तालेबान ने इस देश की सरकार के साथ संघर्ष विराम को रद्द करते हुए पाकिस्तान की सरकार और सैन्य ठिकानों के साथ ही सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों पर हमले तेज़ कर दिये थे। इन्हीं हमलों में से एक पेशावर की मस्जिद का हालिया भीषण हमला था। हालांकि टीटीपी ने इस हमले में अपनी भूमिका को रद्द कर दिया है लेकिन पाकिस्तान की सरकार इसका ज़िम्मेदारी टीटीपी को ही बता रही है।

इस्लामाबाद ने अफ़ग़ानिस्तान के तालेबान से जो मध्यस्थता कराने की मांग की है उसके संबन्ध में राजनीतिक टीकाकार अब्दुल्लतीफ का कहना है कि मेरा यह मानना है कि पाकिस्तान की सरकार अब इस निश्कर्ष पर पहुंच चुकी है कि टीटीपी का मुक़ाबला सैन्य मार्ग से संभव नहीं है। पाकिस्तान की सरकार टीटीपी की उन मांगों का विरोध कर रही है जिनपर वे बल दे रहे हैं जैसे ख़ैबरपख़्तूनखा प्रांत में क़बाएली क्षेत्रों का विलय, अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से पाकिस्तान के सैनिकों की वापसी और टीटीपी के बंदियों की जेल से आज़ादी।

टीटीपी की ओर से पाकिस्तान के भीतर एक इस्लामी सरकार के गठन के नारे ने पाकिस्तान की सरकार और सेना दोनों को परेशानी में डाल दिया है। यही कारण है कि पाकिस्तान का मानना है कि इस मामले में तालेबान की मध्यस्थता से शायद कोई काम बन जाए।

इसी संदर्भ में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के सलाहकार ने घोषणा की है कि इस देश की ओर से एक शिष्टमण्डल अफ़ग़ानिस्तान भेजा जाएगा। तालेबान, पाकिस्तान की सरकार के इस दावे को स्वीकार नहीं करते कि टीटीपी के आतंकवादी, अफ़ग़ानिस्तान से मिलने वाली पाकिस्तान की सीमा से हमले करके अफ़ग़ानिस्तान में भाग जाते हैं। तालेबान के अनुसार यह पाकिस्तान की सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वे इस समस्या का समाधान करें। एसे में लगता है कि इस्लामाबाद की ओर से मध्यस्थता की मांग के बारे में तालेबान शायद सकारात्मक उत्तर न दें।

दूसरी ओर टीटीपी अर्थात पाकिस्तान के तालेबान वर्तमान समय में स्वयं को बहुत ही मज़बूत पोज़िशन में पाते हैं एसे में उनका वार्ता में शामिल होना बहुत ही मुश्किल लग रहा है।