लखनऊ: ईद के रोज़ आज जब सारे देश में शिया और सुन्नी मुसलमान अपनी-अपनी मस्जिदों में अलग-अलग नमाज़ पढ़ रहे थे, लखनऊ के आम लोगों ने शिया सुन्नी नमाज़ साथ-साथ करवाई. शिया लोगों के एक इमामबाड़े में सुन्नी मौलाना के पीछे सबने नमाज़ अदा की. यह ‘शोल्डर टु शोल्डर’ (Shoulder to Shoulder) नाम की एक तहरीक का हिस्सा है, जो अलग-अलग फिरकों और मज़हबों के लोगों को जोड़ने का काम करती है।
यह नमाज़ लखनऊ में शिया लोगों के शाहनजफ इमामबाड़े में हुई, जहां एक सुन्नी मौलाना के पीछे खड़े होकर सबने नमाज अदा की. यूं तो सभी मुसलमानों का खुदा एक है, पैगंबर भी एक है, और कुरान भी. फर्क सिर्फ इतना है कि शिया मानते हैं कि पैगंबर मोहम्मद साहब का उत्तराधिकारी उनके दामाद हज़रत अली को होना चाहिए, और सुन्नी मानते हैं कि पैगंबर के साथी हज़रत अबू बक्र ही उनके सही उत्तराधिकारी हैं. 1,500 साल पुरानी विरासत के झगड़े से पैदा हुई दूरी ये लोग मिटाना चाहते हैं।
‘शोल्डर टु शोल्डर’ तहरीक के संस्थापक सदस्य और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर डॉक्टर कौसर उस्मान कहते हैं, “चार साल पहले जब हम लोगों ने यह तहरीक शुरू की थी, तब इसका नाम ‘शोल्डर टु शोल्डर’ रखा गया था… लेकिन इन चार सालों में इससे माहौल इतना अच्छा हुआ है कि इसका नाम भले ही ‘शोल्डर टु शोल्डर’ है, लेकिन इसका काम ‘हार्ट टु हार्ट’ (Heart to Heart) है।
एक प्राइवेट कंपनी के एग्ज़ीक्यूटिव फहद महमूद कहते हैं, “लखनऊ में तमाम शिया-सुन्नी दंगे हुए हैं, जिनमें तमाम लोगों की जानें भी गई हैं, लेकिन यह तहरीक दोनों फिरकों को पास लाई है, इसने माहौल में मोहब्बत घोली है…”
वक्त के साथ शिया और सुन्नी मुसलमानों के बीच मतभेदों में तमाम राजनैतिक, भौगोलिक और धार्मिक वर्चस्व के पहलू जुड़ते गए. लेकिन भारत में हालात काफी अलग हैं और यहां ऐसी कोशिशें अच्छे नतीजे दे सकती हैं…”