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भरतपुर शहर बना कचराघर, नहीं थम रहा निजी कंपनी का विवाद

भरतपुर. शहर की 40 वार्डों की सफाई व्यवस्था की कमान नगर निगम ने निजी कंपनी को सौंप दी है, लेकिन शहर में सफाई व्यवस्था सुधर पा रही है न विवाद। पिछले 14 दिन से शहर की गली-मोहल्लों में लगे कचरे के ढेरों से आमजन का जीना मुहाल है। कचरा परिवहन व्यवस्था में कार्यरत अस्थायी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से शहर की हालत खराब है, लेकिन अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार हालात सुधारने के बजाय कुछ बोलने से भी कतरा रहे हैं। इससे न केवल 40 वार्डों की सफाई व्यवस्था खराब है, बल्कि अन्य 25 वार्डों में भी सफाई व्यवस्था अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गई है।

शहर को साफ सुथरा बनाने के लिए नगर निगम ने निजी कंपनी को तीन वर्ष के अनुबंध का करीब 60 करोड़ रुपए का ठेका दिया है, ताकि वार्डों से रोजाना कूड़ा उठ सके और लोगों को गंदगी व बदबू से परेशानी नहीं झेलनी पड़े, लेकिन लोगों की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। वार्डोंं में कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। लोग गंदगी और बदबू से परेशान हो रहे हैं। गंदगी के कारण लोगों को बीमारियां फैलने का डर भी सता रहा है, वहीं नगर निगम के अधिकारी निजी कंपनी को ठेका देकर वार्डों की तरफ देखना भूल गए हैं। इसके कारण अब वार्डों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर के सूरजपोल गेट के पास, गोपालगढ़, कमला रोड, वासन रोड मोरी चारबाग सहित करीब तीन दर्जन के अधिक मोहल्लों में लोगों के लिए कूड़े का ढेर परेशानी का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। कूड़े के ढेर के पास बदबू के कारण लोगों को सड़को के पास से निकलना भी मुश्किल हो रहा है। सफाई व्यवस्था की समस्या निजी कंपनी व अस्थायी सफाई कर्मचारियों के बीच उलझी हुई है।