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भारत में एक ही समुदाय को निशाना क्यों बना रहा है प्रशासन?, विशेष रिपोर्ट

भारत में एक विशेष समुदाय को निशाना बनाए जाने का सिलसिला यथावत जारी है जिस पर इस देश के मुस्लिम धर्मगुरुओं की कड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

जमीअते ओलमाए हिन्द के प्रमुख महमूद असद मदनी ने उत्तर प्रदेश के ज़िले सुल्तानपुर की हालिया घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सरकार से मुसलमानों के विरुद्ध एकपक्षीय कार्यवाही रोकने की मांग की है।

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर ज़िले में बल्दीराय क्षेत्र के इब्राहीमपुर में पिछले 10 अक्तूबर को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन यात्रा के समय हुई हिंसा के मामले में 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

बल्दीराय थाना क्षेत्र में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा के दौरान दो समुदायों के लोग डीजे को लेकर आपस में भिड़ गए थे।

बल्दीराय के पुलिस क्षेत्राधिकारी राजाराम चौधरी ने बताया था कि इब्राहीमपुर में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा जब एक मस्जिद के पास पहुंची थी जब तब अजान का समय होने पर एक समुदाय के लोगों ने डीजे की आवाज को कम करने की अपील की जिस पर दोनों समुदायों के बीच विवाद हो गया और पथराव शुरू हो गया था।

इस मामले में जिला मजिस्ट्रेट की ओर से 12 अक्तूबर को पांच लोगों के विरुद्ध नोटिस जारी किया गया है। उन्हें अवैध अतिक्रमण हटाने एवं नुकसान की भरपाई के लिए नोटिस जारी हुआ है।

इस मामले को लेकर ओलमा के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को ज़िलाधिकारी रवीश गुप्ता से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने ज़िलाधिकारी से कहा कि कार्रवाई एकतरफ़ा हो रही है, जो सही नहीं है।

मामले में बल्दीराय थाने में भारतीय दंड संहिता आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें दंगा, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना, हत्या का प्रयास और सार्वजनिक संपत्ति अधिनियम, 1984 की कुछ धाराएं शामिल हैं.

यह एफ़आईआर 52 लोगों के ख़िलाफ दर्ज की गई है, इसमें सिर्फ़ एक अज्ञात व्यक्ति और बाकी सब मुसलमान हैं। एफआईआर में कहा गया है कि जुलूस को रोक दिया गया था और मुसलमानों ने लाठी और अवैध हथियारों और पत्थरों के साथ उन लोगों पर हमला किया, जो विसर्जन समारोह में भाग लेने आए थे।

निवासियों ने आरोप लगाया कि दंगे बवाल के बाद उनके घरों पर हमला किया गया और उनमें से कुछ ने दावा किया कि जुलूस में शामिल लोगों ने उन पर हमला किया।

इस बीच निवासियों ने जिलाधिकारी रवीश गुप्ता को एक ज्ञापन सौंपकर स्थिति का संज्ञान लेने का आग्रह किया है। निवासियों का दावा है कि वीडियो में उक्त पुलिस अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

भारत में जब से केन्द्र में भाजपा की सरकार बनी है तब से ही मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसाओं और हमलों की नई लहर शुरु गयी है और हिंसा की यह लहर किसी एक शहर या क्षेत्र से विशेष नहीं है। बात यहीं पर नहीं रुकती बल्कि भारतीय जनता पार्टी के सांसद और विधायक एक विशेष समुदाय के जनसंहार और बहिष्कार तक की बातें करने लगे हैं लेकिन केन्द्र सरकार की ओर से इन लोगों से सवाल तक नहीं किया जाता जिसकी वजह से इन कट्टरपंथियों के हौसले बढ़ गये हैं।