साहित्य

मछली अपने तालाब की सबसे होशियार लड़की थी…पढ़ने में तेज घर के सभी कामो में एकदम चतुर..,By-Dr.vijayasingh

Dr.vijayasingh
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समय निकालकर पूरा अवश्य बढ़े…..
एक तालाब था उसमें एक मछली रहती थी और पास में ही एक बगुला..
मछली अपने तालाब की सबसे होशियार लड़की थी.. पढ़ने में तेज घर के सभी कामो में एकदम चतुर..
बगुले की उसपर काफी समय से नजर थी.. उसने एक दिन उससे बात करने की कोशिश की.. मछली ने अपने घर वालों से बताया तो घर वालों ने समझाया बेटा बगुले से दूर रहना खा लेगा तुम्हे.. लड़की बोली ठीक है… घर वाले भी इतना समझाकर सोचे हो गया हमारा कर्तव्य..
लेकिन बगुले को पता था कैसे फांसना है मछली को… उसकी ट्रेनिंग थी उसके पास.. उसने पढा था इन सबके बारे में.. वो जानबूझकर उसके आसपास घूमता.. कभी आम खाता कभी जामुन कभी अमरूद.. मछली सोचने लगी घर वाले तो बोलते हैं ये बगुले तो मछली कीड़े सब खाते हैं.. ये तो नही खा रहा.. कुछ दिनों बाद मछली से उसने फिर बात की.. मछली धीरे धीरे उससे बात करने लगी.. उसे घरवालों की तमाम बातें झूठी लगने लगी जो उसने बगुले के बारे में सुन रखी थी..
वो प्यार से उसे बगदुल कहने लगी..
कोई समझाता तो कहती मेरा वाला बगदुल वैसा नही है..
वो मछली नही खाता.. मेरे परिवार और मेरी इज्जत करता है.. स्मार्ट गोरा भी है.. मेरा बगदुल अलग है..
एक दिन वो अपने बगदुल के पास जाती है.. बगदुल उसे बिना नमक मिर्ची के खा जाता है..
एक मराठी कहावत है जिसका अर्थ है कि “भेड़ तो स्वभाववश सब्जबाग के लालच में भेड़िये के पीछे चली ही जाती है”।
लेकिन जब भेड़िया उसे फाड़ खाता है तो क्या गडरिया ओर उसका परिवार, भेड़ के ही दोष निकालते हैं? या अपनी किस्मत को दोष देने लग जाते हैं? क्या वे इसको लेकर चर्चा, बैठक करके भूल जाते हैं?
जी नहीं, वे भेड़िये को मारने के लिए शिकारी कुत्तों को तैयार करते हैं, उसके आने के संभावित रास्तों में फंदे बिछाते हैं और स्वयं भी उसे मारने के लिए योग्य शस्त्र चलाना सीख लेते हैं। लेकिन भेड़ियों को जीवित नहीं छोड़ते।
तभी उनकी भेड़ें सुरक्षित रहती हैं। भेडिये दब कर रहते हैं। अन्यथा भेड़ियों को भेड़ के खून का स्वाद लग जाता है।
पहले, गांव के लोगों के लिए यह सामान्य ज्ञान था। दुनिया ग्लोबल विलेज बन जाने पर लोग ये सरल बातें भूल रहे है तो परिणामस्वरूप बेटियां कभी फ्रिज में पाई जा रही हैं तो कभी सुटकेसों में ….बेटियां और समाज दोनों को जागरूक होने की आवश्यकता है…चलो आगे बढ़ो चुन चुन कर ऐसे भेड़ियों को मारते हैं जिनसे हमे अपनी भेड़े बचानी है ….जरूरी नहीं ये भेड़िया धर्म विशेष के हो ये मस्तिष्क के आधार पर पाये जाते हैं
इनकी सोच और मानसिकता के आधार पर हम इनको पकड़ सकते हैं सम्पूर्ण मानवता को आगे बढ़ना होगा तभी इन भेड़ियोंका संहार संभव है…..
सादर राधे राधे डॉ.विजया सिंह