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मणिपुर से मेवात तक,,,,आरएसएस के भगवा आतंकियों के हाथों में तलवार, बंदूकें, राइफ़ल, तमंचे,,,,और वर्दीधारी ”चेतन सिंह” : रिपोर्ट

नूंह हिंसा के वो चार घंटे: कोई पीटा गया तो कोई लूटा, मदद मांगते रहे लोग…पर नहीं उठे फोन

सोमवार को हरियाणा के नूंह में हुए उपद्रव के चार घंटे लोगों ने दहशत के साये में काटे। बेबस व लाचार लोग पुलिस-फोर्स के आने की बांट जोहते रहे, लेकिन पुलिस ने आते-आते तीन से चार घंटे लगा दिए। इस दौरान उपद्रवी बेखौफ होकर एक के बाद एक वारदात को अंजाम देते रहे। किसी को पीटा गया तो किसी को लूटा गया। जगह-जगह फूंकते हुए वाहनों के धुएं के गुबार को देखकर शहर में रह रहे लोगों ने अपने-अपने घर के खिड़की दरवाजे तक बंद कर लिए।

हर किसी की जबान पर एक ही वाक्य था कि अब आएगी पुलिस। इतना ही नहीं शहर के कुछ लोग पुलिस को और प्रशासनिक अधिकारियों को फोन करने में लगे रहे, लेकिन अधिकांश फोन उठे ही नहीं। फोन से लोग एक-दूसरे को जल्द पुलिस-फोर्स आने की बात कहकर ढांढस बंधा रहे थे। तरह-तरह की अफवाह लोगों को और बैचेन कर रही थी। उपद्रवियों के सामने मुट्ठी भर पुलिस बेबस व लाचार नजर आ रही थी। उपद्रवियों ने एक इंस्पेक्टर के पेट में गोली मार दी तो कइयों को बुरी तरह से चोटिल कर दिया गया।
लोगों का सवाल था कि गुरुग्राम, पलवल से नूंह की दूरी 32 से 40 किलोमीटर है, लेकिन पुलिस को आने में चार घंटे कैसे लग गए। रेवाड़ी, फरीदाबाद की दूरी ज्यादा है तो वहां से दो घंटे लगते हैं, लेकिन चार घंटे में पुलिस पहुंची, यह सबकी समझ से बाहर है। शहर के लोगों का कहना है कि चार घंटे उनके लिए इतने भारी रहे हैं कि जिसे बयां नहीं किया जा सकता। उन्हें परिवारों की सुरक्षा को लेकर ज्यादा चिंता रही। इसमें कहीं न कहीं सरकार व प्रशासन की ढील रही है। जिससे लोगों में रोष है।

ऐसे नूंह में हिंसा को दी गई हवा
हरियाणा के नूंह में सोमवार को विश्व हिंदू परिषद, मातृ शक्ति दुर्गा वाहिनी और बजरंग दल द्वारा घातक हथियारों के साथ निकाली गई, ब्रजमंडल 84 कोस शोभा यात्रा के दौरान दो पक्षों के बीच बवाल हो गया था। जैसे ही नूंह के नल्हड़ स्थित नलहेश्वर महादेव मंदिर से यात्रा शुरू हुई, वैसे ही वहां बजरंगदल, विहिप के हथियारबंद लोगों ने पहले पथराव और नारेबाजी की और बाद में फ़ायरिंग की गई । यात्रा में शामिल लोगों ने पुलिसकर्मियों पर भी पथराव किया गया था। इस बीच भगवा बलवाइयों ने आगजनी कर दी थी। कई वाहनों में तोड़फोड़ कर उन्हें आग के हवाले कर दिया था। दोपहर से लेकर शाम तक चले बवाल में करीब 24 लोग घायल हुए थे। सभी को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया था।

भगवा दंगाइयों के पास तलवार, बंदूकें, राइफ़ल, तमंचे थे, सोशल मीडिया पर तमाम वीडियो वायरल हैं उनमे विहिप, बजरंग दल के आतंकियों के हाथों में हथियार देखे जा सकते हैं

Shyam Meera Singh
@ShyamMeeraSingh

मेवात रैली से पहले बिट्टू बजरंगी ने वीडियो में कहा कि तुम्हारे जीजा आ रहे हैं। रैली से पहले जुनैद-नासिर के हत्यारोपी- मोनू मानेसर ने भी वीडियो बनाकर लोगों को भड़काया। उनके बच्चों को ज़िंदा जलाओ फिर जीजा वाले बयान देकर भड़काओ। हथियार ले जाओ। फिर कहो- मुस्लिम दंगा कर रहे हैं।

 

Shyam Meera Singh
@ShyamMeeraSingh

बजरंग दल के मोनू मानेसर पर, मेवात में जुनैद और नासिर को ज़िंदा जलाने का आरोप है। पीड़ितों को न्याय नहीं मिला। उसी मेवात से बजरंग दल रैली निकालने का ऐलान करता है। मोनू मानेसर भी आने का ऐलान करता है। बिट्टू बजरंगी कहता है- मुसलमानों के जीजा आ रहे हैं। क्या ये दंगे भड़काना नहीं है?

 

@Misra_Amaresh
@misra_amaresh

#Haryanaviolence और पेचीदा मामला होता जा रहा है। आप ही सोचिये: दो होम गार्ड मारे गये! कहा गया मुस्लिम पक्ष से गोली चली। लेकिन होमगार्ड नरहल मंदिर के पास मारे गये जहां sophisticated हथियार केवल VHP के पास थे! यह वीडीयो कुछ और ही कहानी कह रह है!

Swati Maliwal
@SwatiJaiHind
नांगलोई पुलिस स्टेशन के ठीक बाहर खड़े होकर “सड़कों पर खून बहाने” का भाषण दिया जा रहा है। अब तक मणिपुर और हरियाणा हिंसा का शिकार हुआ है अब क्या दिल्ली को भी शिकार बनने दिया जाएगा? एक तरफ़ पुलिस कह रही है की किसी ने गड़बड़ की तो एक्शन लेंगे ? ये वीडियो कल से वायरल है? क्या पुलिस ने इस वीडियो की जाँच की? यदि वीडियो सही है तो इसको अरेस्ट क्यों नहीं किया?

Asaduddin Owaisi
@asadowaisi
मोदी के मंत्री कह रहे हैं कि मेवात, हरियाणा में जुलूस निकालने वालों के पास हथियार थे, पुलिस बंदोबस्त नाकाफी था। हरियाणा में सरकार की नाकामी साफ-साफ दिख रही है, लेकिन हम जानते हैं कि कार्रवाई एकतरफा होगी।जो लोग बंदूक लेकर घूम रहे हैं, मासूम लोगों की जान और माल को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जो मस्जिदों का अपमान कर रहे हैं, उन्हें ‘हृदय सम्राट’ बुलाया जाएगा और उनका महापंचायतों में सम्मान किया जाएगा

Zakir Ali Tyagi
@ZakirAliTyagi
आपने मौहब्बत की दुकान खोली मुस्लिमों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और आपकी दुकान का ख़ूब सामान बेचा,लेकिन आप मौहब्बत के विक्रेताओं के समर्थन में एक लफ़्ज़ भी बोलने के लिए तैयार नही है,पहले इंसाफ़ दिलाइये माननीय उसके बाद अपनी मौहब्बत की दुकान चलाइये, यदि
@ashokgehlot51
सरकार मोनू मानेसर के सामने नतमस्तक होने की बजाय उसे गिरफ्तार के जेल में डाल देती आज हरियाणा में मुस्लिमों के गौदाम,दुकान और मकानों में लूटपाट,तोड़फोड़ आगजनी नही होती,सेक्टर 66 में इस बुज़ुर्ग कंबल,तकियों की दुकान राख में तब्दील नही होती!
आपसे इंसाफ़ और समर्थन की उम्मीद करना भी अब समुंदर किनारे रेत का घर बनाने जैसा हो गया है!

हमको उनसे वफ़ा की है उम्मीद,
जो नही जानते वफ़ा क्या है!

News24
@news24tvchannel
“नूंह में हुई हिंसा सुनियोजित थी, 2024 चुनाव से पहले इस तरह की और भी घटनाएं होने की संभावना है”

◆ सत्यपाल मलिक का बयान

News24
@news24tvchannel
“यात्रा में हथियार लेकर कौन चलता है”

◆ भाजपा सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने नूंह हिंसा पर हिंदूवादी संगठनों पर ही सवाल खड़ा कर दिया

Shyam Meera Singh
@ShyamMeeraSingh
ये अखिलेश त्रिपाठी हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकील हैं। और हत्यारे चेतन चौधरी का सपोर्ट कर रहे हैं जिसने ASI टीकाराम मीना और 3 मुस्लिमों की हत्या की। त्रिपाठी लिख रहे हैं- “चेतन सिंह के समर्थन में खड़ा होने के लिए ब्राह्मणवादी मीडिया का धन्यवाद। चेतन का आर्थिक सहयोग करना चाहिए”

M.M. Dhera(Advocate)
@AdvocateDhera
हर बार बालकोट नहीं किया जा सकता तो इस बार स्क्रिप्ट चेंज की गई है।

पूरे देश में आग लगाने की तैयारी है छोटे-छोटे दंगे करवाकर माहौल खराब करने की कोशिश है।

कल तीन बीजेपी शासित राज्यों में दंगा भड़काने की कोशिश हुई हरियाणा के मेवात में सफलता मिली और अब यह दंगे की आग हरियाणा से सटे राजस्थान तक पहुँच गयी है।

चुनाव तक यह हर हफ्ते देखने को मिलेगा। जो पुलिस अधिकारी दंगा नहीं होने दे रहा उसका तबादला कर दिया जाता है।

आपसे निवेदन है कि बेहद सतर्क और सावधान रहें वीडियो इत्यादि शेयर करने से बचें जैसा की सत्यपाल मलिक दो महीने से कह रहे हैं ये लोग किसी भी हद तक जा सकते हैं दंगे करवाने हों या किसी बड़े नेता की हत्या ये कुछ भी कर सकते हैं।

हिन्दू बहुल हिमाचल और कर्नाटक में करारी हार के बाद इन्हें समझ आ गया है कि इनका हिन्दू कार्ड अब काम नहीं कर रहा है तो इसे पुश करने के लिए इन्हें 10-12 दंगों की जरूरत है।

अगर आपको लगता है मणिपुर आपके घर से बहुत दूर है तो दुआ करिए, यह सच हो।

Aafrin
@Aafrin7866
I.N.D.I.A अगर सच में भाजपा को 2024 में हराना चाहती है तो सबसे पहले अपने-अपने प्रवक्ताओ को सभी गोदी मीडिया पर भेजना तुरंत बंद कर दे।
देश को नफरत की आग में झोकना की इजाजत किसी को कैसे दे सकते है!

बरेली

➡️दलित युवक की पीट-पीटकर निर्मम हत्या से सनसनी

➡️लड्डू नहीं खिलाने पर दलित युवक की निर्मम हत्या

➡️बेटा पैदा होने पर दलित युवक से मांगे थे लड्डू

➡️लड्डू नहीं खिलाने पर पेड़ से बांधकर युवक को पीटा

➡️दबंगों ने युवक की पत्नी के साथ किया गैंगरेप

➡️परिजनों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज, 3 आरोपी गिरफ्तार

➡️फरीदपुर थाना क्षेत्र के पीपरथरा गांव की घटना.

Rajesh Sahu
@askrajeshsahu
कासगंज के चंदन गुप्ता को पहचानते होंगे! सीएम योगी के कट्टर समर्थक थे। कट्टर इतने की उनके सीएम बनने पर भंडारा किया था। 26 जनवरी 2018 को विहिप ने तिरंगा यात्रा के लिए प्रशासन से इजाजत मांगी। प्रशासन ने मना कर दिया। क्योंकि हालात बेहतर नहीं थे। इसके बाद भी करीब 100 की संख्या में बाइक से तिरंगा यात्रा निकाली गई। मुस्लिम गलियों में जमकर नारेबाजी हुई। इस दौरान झड़प हो गई। गोलियां चली। एक गोली चंदन को आकर लगी और मौके पर ही मौत हो गई।

इसके बाद जमकर हंगामा हुआ। मुस्लिमों की दुकानें जलाई गई। प्रशासन को तीन दिन तक इंटरनेट बंद करना पड़ा। कई दिग्गज नेता चंदन की अंतिम यात्रा में पहुंचे। परिवार को आर्थिक मदद, बहन को नौकरी, चौक पर मूर्ति लगवाने का वादा किया। बहन को नौकरी मिली लेकिन 6 महीने बाद ही निकाल दिया। चौक पर मूर्ति लगी लेकिन आज भी ढकी हुई है। किसी नेता को फुर्सत नहीं कि उसका उद्धाटन कर सके। परिवार कोर्ट-कचेहरी के चक्कर में फंसा हुआ है। जो उस वक्त चंदन गुप्ता अमर रहे कर रहे थे अब वह भूल गए।

यह सब बातें इसलिए बता रहा हूं क्योंकि हर 6 महीने में दंगो की भेंट ऐसे ही मामूली परिवारों के लोग चढ़ते हैं। इनकी लाशों पर सियासत होती है। खूब वादे होते हैं लेकिन हकीकत में कुछ नहीं बदलता। सलाह सिर्फ इतनी है कि जब आप नहीं थे तब भी धर्म था, जब आप नहीं रहेंगे तब भी धर्म रहेगा। आपके बचाने से बचेगा नहीं, किसी के चाहने से खत्म नहीं होगा। आप बस अपना ख्याल रखिए। उग्रता और कट्टरता से दूर रहिए। सोशल मीडिया पर जो आपको भड़का रहे हैं इनके पास अच्छी नौकरी है। इनके बच्चे सेट हैं। आपको अपना देखना है।

Randeep Singh Surjewala
@rssurjewala
मणिपुर से लेकर हरियाणा तक..

नफरत और हिंसा की आग को देखते और सब कुछ जानते हुए भी प्रधानमंत्री मौन रहते हैं !

और उनके मुख्यमंत्री “दंगाई टुलकिट” की साजिशों को ‘मौन समर्थन’ देते हैं !

‘न्यू इंडिया’ के ‘कर्त्तव्यकाल इवेंट’ में न प्रधानमंत्री अपना ‘कर्तव्य’ निभाते हैं, न भाजपाई मुख्यमंत्री अपना ‘राजधर्म’ निभाते हैं !

जब सूबे के मुखिया मान चुके हैं कि 2.70 करोड़ हरियाणावासियों को सुरक्षा देने में असमर्थ हैं !

तो पुलिस-प्रशासन के पीछे छुपने की बजाय, राजनीतिक नेतृत्व के दिवालियापन को स्वीकार करते हुए..

खट्टर-दुष्यंत की जोड़ी वाली भाजपा-जजपा सरकार को अब तुरंत कुर्सी छोड़ देनी चाहिए !

Surya Pratap Singh IAS Rtd.
@suryapsingh_IAS
देश का 77वाँ स्वतंत्रता दिवस आ रहा है, मिट्टी हाथ में लेकर सेल्फ़ी लेनी है, ऐसा फ़रमान आया है।

पहले ये तो बताओ आज देश में स्वतंत्र है,कौन ?

•हिंदू ख़ुद अपने को ख़तरे में बता रहे हैं।
•मुस्लिम को अपनी जान की पड़ी है।
•दलित/आदिवासियों के सिर पर मूता जा रहा है,नंगी परेड कराई जा रहीं हैं।
• क्रिस्टियंस के चर्च फूंके जा रहे हैं,पादरियों को मारा पीटा जा रहा है।
•सिख किसानों को आतंकवादी कहा जा रहा है।

इस देश में हर कोई राजतंत्र के तले डर की ग़ुलामी में जी रहा है।

तो क्या सभी ग़ुलाम मुट्ठी में मिट्टी लेकर खींचे सेल्फ़ी, मनाएँ ग़ुलामियत का उत्सव?

Nuh Clashes Well-Coordinated, More Such Violence Likely Ahead of 2024 Polls: Satyapal Malik

‘The whole country will burn like Manipur if these people are not contained,’ the former J&K governor said, in an apparent reference to the Modi government.

New Delhi: Former Jammu and Kashmir governor Satyapal Malik said the violence that began in Haryana’s Nuh and spread to different parts of the state was not spontaneous. According to him, the attacks in seven to eight different places were well-coordinated with the aim of creating a communal divide.

“The whole country will burn like Manipur if these people are not contained,” he said. “Jats by culture or tradition believe in the Arya Samaj way of life and are not very religious in the traditional sense of the term. Neither are the Muslims of this area very traditional in their outlook. Therefore one has never heard of the two communities clashing in this manner ever since Independence. And these attacks will only increase in the run-up to 2024 as is evident in Manipur,” he said addressing a packed hall at the Constitution Club.

The convention on “national security affairs”, organised by six groups of social activists, also passed two resolutions on the Pulwama and the Balakot attacks.

They demanded the government to make the Pulwama attack report public along with an action-taken report, including a white paper on the lapses and action taken against those involved. They also said a Supreme Court-monitored committee should probe the Pulwama tragedy.

Those assembled also demanded an increase in security at various pilgrim sites. They feared that ahead of the Lok Sabha polls an attack could be carried out on the under-construction Ram Mandir at Ayodhya or any of the other prominent temples in India.

“This could be done by the ruling dispensation to polarise the public and win the elections,” Malik said. An alleged threat by Al-Qaeda that the Ram Mandir would be blown up should be taken seriously, they said.

The gathering was addressed by Members of Parliament, Digvijay Singh, Danish Ali, Kumar Ketkar, John Brittas, and lawyer Prashant Bhushan.

Interestingly, going by the audience’s response to Satyapal Malik’s speech, it was clear that interest in what happened at Pulwama or Balakot has not waned. While in the past, the allegations that the Pulwama attack was done by the Indian establishment were discussed in whispers, now all prominent speakers openly voiced their apprehension that the attack was not from Pakistan.

“After Pulwama, Modi milked the tragedy and told crowds to remember Pulwama when they vote. I tell the crowds once again, remember Pulwama when you vote this time,” said Malik. “There are several unanswered questions. Where did the RDX come from? Why was the route not sanitised or manned by anyone for 10 kilometres either side? Why was the aircraft refused?” he asked.

Contradicting Prashant Bhushan who said there were 11 intelligence reports ahead of the attack, Malik said, “As governor, I used to get three intelligence reports a day, each detailing a terror attack that could happen to me or to the establishment. I was warned by the Army not to travel by road but take a chopper and so on. There was not a single intelligence report that an Army convoy could be attacked,” he said.

Malik said something similar could be planned in 2024. “They could kill a prominent BJP leader or throw a bomb at the Ram Mandir. Why is Ajit Doval (National Security Advisor) frequenting the UAE now a days? He is drumming up support from the rulers there that they should put pressure on the Pakistanis not to retaliate when our troops enter Pakistan Occupied Kashmir. They will stay there for a few days and come back and hope to win the election. People should know what they are up to,” he said.

 

डिस्क्लेमर : ट्वीट्स में व्यक्त विचार लोगों के अपने निजी विचार और जानकारियां हैं, तीसरी जंग हिंदी का कोई सरोकार नहीं है