उत्तर प्रदेश राज्य

मथुरा : ”यहां सब मुसलमान लोग रहते है, हमें हटाया जा रहा है, हम कहां जाएंगे” : रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के मथुरा में रेलवे प्रशासन ने रेलवे लाइन के पास रहने वाले कई परिवारों को 21 दिन के भीतर घर खाली करने का नोटिस दिया है.

रेलवे का दावा है कि ये घर रेलवे की ज़मीन पर अवैध अतिक्रमण करके बनाए गए हैं जबकि स्थानीय निवासियों का कहना है कि वो और उनके परिवार दशकों से इस ज़मीन पर रह रहे हैं.

बीबीसी से बात करते हुए आगरा मंडल की रेलवे प्रवक्ता प्रशस्ति श्रीवास्तव ने कहा, “अभी कोई तोड़फोड़ नहीं की जा रही है. मथुरा से वृंदावन की रेलवे लाइन का चौड़ीकरण हो रहा है. ये 11 किलोमीटर का इलाक़ा है. इसमें रेलवे लाइन के क़रीब 500 मीटर की जगह पर अतिक्रमण है, उन लोगों को अतिक्रमण हटाने के लिए शुरुआती नोटिस दिया गया है.”

प्रशस्ति कहती हैं, “अभी प्रभावित लोगों को सूचना देने के लिए 21 दिन में जगह खाली करने का नोटिस दिया गया है. रेलवे इन लोगों के पुनर्वास के लिए मथुरा ज़िला प्रशासन से बात कर रहा है. ज़िला प्रशासन ने हमें भरोसा दिया है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए जगह चिह्नित की जा रही है.”

प्रशस्ति कहती हैं, “इस ट्रैक से वंदे भारत ट्रेन भी गुजरेगी. इसलिए भी चौड़ीकरण ज़रूरी है. अतिक्रमण करने वाले लोगों को हमारा पहला नोटिस है, हमारी तरफ से कोई क़ानूनी कार्रवाई अभी नहीं की गई है.”

जिस बस्ती को रेलवे लाइन चौड़ीकरण के लिए हटाया जा रहा है उसमें अधिकतर मुसलमान परिवार रहते हैं.

स्थानीय संवाददाता सुरेश सैनी के मुताबिक यूं तो इस इलाक़े का नाम नई बस्ती है लेकिन ये काफ़ी पुरानी बस्ती है जिसमें 1970 के दशक से लोग रहते हैं.

6 फरवरी को प्रशासन यहां नोटिस चिपकाने पहुंचा था. एक दर्जन से अधिक घरों पर नोटिस भी लगाए गए हैं लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के बाद टीम वापस लौट गई थी.

स्थानीय संवाददाता सुरेश सैनी के मुताबिक नोटिस चिपकाए जाने के बाद से ही यहां रह रहे लोगों में डर और बेचैनी का माहौल है. यहां कई मकान पक्के हैं और काफ़ी पुराने बने हुए हैं.

बीबीसी से बात करते हुए एक स्थानीय महिला लतीफ़न ने कहा, “हमें यहां रहते हुए 70 साल हो गए हैं. रेलवे ने हमें कुछ नहीं बताया है बस इतना कहा है कि यहां से हटना होगा. कितने परिवारों को हटना है, ये भी नहीं बताया गया है. उन्हें जितनी जगह चाहिए हम छोड़ देंगे, हमें कुछ नहीं चाहिए सिर्फ़ सर छुपाने को जगह चाहिए.”

एक अन्य महिला ने कहा, “ये हमारा घर मकान तोड़ने का नोटिस है, रेलवे के लोग देकर गए हैं, कहा है कि 21 तारीख़ तक मकान खाली नहीं किया तो हम तोड़ देंगे, हमें यहां रहते हुए 60 साल से अधिक हो गए हैं. यहां सब मुसलमान लोग रहते हैं. हमें हटाया जा रहा है, हम कहां जाएंगे.”

सज्जो नाम की एक महिला कहती हैं, “यहां सब मुसलमान रहते हैं, वो हमें यहां से हटा रहे हैं. हमारा सरकार से ये कहना है कि अगर हमें यहां से हटा रहे हैं तो हमें कहीं रहने के लिए ज़मीन दें. हमारे बुज़ुर्ग यहां 70-80 साल से रह रहे हैं. अगर हमारे पास पैसा होता तो हम यहां पड़े रहते. हमने ये ज़मीनें ख़रीदी थीं, बेचने वाले ही नहीं रहे अब.”

इस बस्ती के बीच से नैरो गेज रेलवे लाइन गुज़रती है. इसे अब ब्रॉड गेज करने की योजना है.

स्थानीय सांसद हेमा मालिनी ने इस रेलवे लाइन के चौड़ीकरण की मांग की थी.

अब इस चौड़ीकरण के रास्ते में बस्तियां हैं जिन्हें रेलवे को हटाना होगा. रेलवे का कहना है कि ये ज़मीन रेलवे की है जिस पर अतिक्रमण कर लिया गया था.

स्थानीय निवासी याक़ूब क़ुरैशी ने रेलवे से आरटीआई ज़रिए कथित अतिक्रमित ज़मीन के बारे में जानकारी मांगी थी, जिस पर कोई जवाब नहीं दिया गया.

उन्होंने रेलवे और स्थानीय प्रशासन को क़ानूनी नोटिस भेजकर भी ज़मीन की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी हैं. वहीं इस ज़मीन के विवाद को लेकर साल 2005 में स्थानीय अदालत में मुक़दमा भी दायर किया गया था, जो अभी विचाराधीन है.

क़ानूनी कार्रवाई को लेकर रेलवे प्रवक्ता का कहना है कि रेलवे की तरफ़ से अभी कोई वाद इस भूमि को लेकर दायर नहीं किया गया है

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दिलनवाज़ पाशा

बीबीसी संवाददाता