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मालदीव में नए राष्ट्रपति ने शपथ ग्रहण के साथ ही दशकों पुराना रिवाज तोड़ दिया, वे अपनी पहली राजकीय यात्रा पर भारत नहीं तुर्की चले गए!

मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने शपथ ग्रहण करने के बाद अपनी नीतियों में काफी बदलाव करना शुरू कर दिया है।

इसका सीधा असर भारत और मालदीव के संबंधों पर भी पड़ रहा है। मालदीव में नए राष्ट्रपति ने शपथ ग्रहण के साथ ही दशकों पुराना रिवाज तोड़ दिया है। वे अपनी पहली राजकीय यात्रा पर भारत नहीं जाकर तुर्की चले गए हैं। इससे पहले मालदीव के राष्ट्रपति शपथ ग्रहण के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा पर भारत का दौरा करते रहे हैं। यह उनकी ‘इंडिया फर्स्ट’ नीति का हिस्सा भी रहा है।

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू को चीन समर्थक नेता माना जाता है। उन्होंने चुनाव के दौरान भी अपना भारत विरोधी रुख जाहिर किया था। वे मालदीव में मौजूद भारतीय सैनिकों की टुकड़ी की वापसी भी चाहते हैं।

चुनाव के दौरान और राष्ट्रपति की शपथ लेने के फौरन बाद उन्होंने इस पर अमल करना शुरू कर दिया है। मुइज्जू सरकार भारत के साथ 100 से ज्यादा संबंधों की समीक्षा भी कर रही है। अब सवाल यह है कि उन्होंने पहली विदेश यात्रा के लिए तुर्की को ही क्यों चुना? तुर्की से भारत के बेहतर रिश्ते नहीं रहे हैं।

तुर्की पाकिस्तान का करीबी है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तुर्की पाकिस्तान का समर्थन और भारत का विरोध करता रहा है। मोहम्मद मुइज्जू का प्लान स्पष्ट नजर आ रहा है कि वह मालदीव की भारत पर निर्भरता को खत्म करना चाहते हैं