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मालिकाये तरन्नुम बेगम नूरजहां…इस बच्ची के रोने में भी संगीत की लय है!

M. A. Khan Gandhi
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उनका जन्म 21 सितंबर 1926 को पंजाब के छोटे से शहर कसुर में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम अल्लाह वासी उर्फ नूरजहां रखा गया। कहते हैं कि जन्म के समय उनके रोने की आवाज सुन उनकी बुआ ने कहा ‘इस बच्ची के रोने में भी संगीत की लय है। यह आगे चलकर प्लेबैक सिंगर बनेगी।’ नूरजहां के माता पिता थिएटर में काम करते थे। उनकी रूचि संगीत में भी थी। घर का माहौल संगीतमय होने के कारण नूरजहां का रुझान भी संगीत की ओर हो गया और वह गायिका बनने के सपने देखने लगी। उनकी माता ने नूरजहां के मन मे संगीत के प्रति बढ़ते रुझान को पहचान लिया और उन्हें इस राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया तथा उनके लिए संगीत सीखने की व्यवस्था घर पर ही कर दी। नूरजहां ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा कज्जनबाई और शास्त्रीय संगीत की शिक्षा उस्ताद गुलाम मोहम्मद तथा उस्ताद बडे़ गुलाम अली खां से ली थी। वर्ष 1947 में भारत विभाजन के बाद नूरजहां ने पाकिस्तान जाने का निश्चय कर लिया। फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार ने जब नूरजहां से भारत में ही रहने की पेशकश की तो नूरजहां ने कहा ‘मैं जहां पैदा हुई हूं वहीं जाउंगी।’ 1963 में उन्होंने अभिनय की दुनिया को अलविदा कह दिया। वर्ष 1982 में इंडिया टॉकी के गोल्डेन जुबली समारोह में उन्हें भारत आने को न्योता मिला। तब श्रोताओं की मांग पर नूरजहां ने ‘आवाज दे कहां है दुनिया मेरी जवां है’ गीत पेश किया और उसके दर्द को हर दिल ने महसूस किया। 1992 में उन्होंने संगीत की दुनिया को भी अलविदा कह दिया। 23 दिसम्बर 2000 को दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई, उस समय वह 74 साल की थीं। महान गायिका नूरजहां को स्वरांजलि ….।