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मोहन भागवत ने पूछा है कि क़ुरआन के हिसाब से क़ाफ़िर और कौन है?…जवाब दे रहे हैं सरदार मेघराज सिंह!

Meghraj Singh
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मोहन भागवत के सवाल का जवाब
सवाल —मोहन भागवत ने पूछा है कि क़ुरान के हिसाब से काफ़िर और कौन है ?
जवाब — 1 —जो दिन रात झूठ बोलते हैं बेईमानी करते हैं क़ुरान के हिसाब से उनको काफ़िर कहते हैं ।
2 जो सच्चाई को और ईमानदारी को छुपा लेते हैं क़ुरान के हिसाब से उनको काफ़िर कहते हैं ।
3 जो दूसरे धर्म के लोगों से नफ़रत करते हैं छुआ छूत करते हैं क़ुरान के हिसाब से उनको काफ़िर कहते हैं ।
4 जो दूसरों का हक़ खाएं दूसरों को परेशान करें दूसरों को धोखा दे क़ुरान के हिसाब से उनको काफ़िर कहते हैं ।
5 ज़ो ज़बरदस्ती दूसरे धर्म के लोगों को अपने धर्म में शामिल करें या उनको परेशान करे क़ुरान के हिसाब से उनको काफ़िर कहते हैं ।
6 जो गरीबों के ऊपर जुलम करे और धोखा करे और बेगुनाह के ऊपर हमला करे क़ुरान के हिसाब से उनको काफ़िर कहते हैं ।
7 जो अपने आप को ख़ुश रखने के लिए दूसरे धर्म के लोगों में दंगे करवाए या उनके घर जलाए क़ुरान के हिसाब से उनको काफ़िर कहते हैं ।
8 जो दिन रात झूठ बोले बेईमानी करे और यह कहे कि मैं सच बोल रहा हूँ ईमानदारी से काम कर रहा हूँ क़ुरान के हिसाब से उनको काफ़िर कहते हैं ।
9 अगर कोई दूसरा इंसान भूखा मर रहा हूँ और प्यासा मर रहा हूँ अगर कोई इंसान उसको भूखा प्यासा देखकर भी चला जाए क़ुरान के हिसाब से उनको काफ़िर कहते हैं ।
10 अगर कोई एक रब को छोड़कर किसी अन्य की भगती करें क़ुरान के हिसाब से उनको काफ़िर कहते हैं ।
11 अगर कोई स्वर्ग और जन्नत के नाम पर लोगों को लूट कर खाए क़ुरान के हिसाब से उनको काफ़िर कहते हैं ।
12 अगर कोई नरक या जहन्नुम के नाम पर लोगों को डराए और उनका धन दौलत लूटकर खाए क़ुरान के हिसाब से उनको काफ़िर कहते हैं ।
13 अगर कोई इन्सान पूरे विश्व के लोगों को अलग अलग समझ करके उनसे नफ़रत करे क़ुरान के हिसाब से उनको काफ़िर कहते हैं ।


कुछ महत्वपूर्ण सायरी
काफिर वह नहीं होते हैं जिन्होंने इस्लाम धर्म क़बूल नहीं किया और जो रब को मानते हैं ।
काफिर उन्हें कहते हैं जो इस्लाम धर्म क़बूल करके भी एक रब को छोड़कर किसी अन्य को दिन रात सजदा करते हैं ।
असली रब के बंदे वहीं होते हैं जो सच्चाई ईमानदारी सब्र संतोष धारण करके पूरे विश्व में सच्चाई फैलाते हैं ।
असली धार्मिक इंसान वहीं होते हैं जो ख़ुद सच्चाई के रास्ते पर चलकर दूसरों को भी सच्चाई के के रास्ते पर चलना सिखाते हैं ।
नोट—क़ुरान के बारे में मैंने सुनी सुनाई बातें नहीं लिखी बल्कि मैंने क़ुरान को 38 दिनों में पड़कर उसका अध्ययन किया उसके बाद ही मैने यह बातें लिखी है अगर किसी भी मुस्लिम को यह किसी अन्य धर्म के लोगों को इन बातों पर एतराज़ है तो वह विश्व के किसी भी प्लेटफ़ॉर्म पर आकर विचार चर्चा कर सकते हैं थैंक्यू ।
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( M S Khalsa)