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मौलाना अरशद मदनी ने कहा-”ओम और #अल्लाह एक ही है” : आरएसएस के हिन्दू राष्ट्र का सपना पूरा करेंगे मौलाना अरशद मदनी? : रिपोर्ट

 

ओम और #अल्लाह एक ही है – मौलाना अरशद मदनी साहब

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अधिवेशन के आखिरी दिन मौलाना अरशद मदनी के बयान पर आचार्य लोकेश मुनि (जैन मुनि) ने सवाल उठाए हैं.

अरशद मदनी, मोहन भागवत के उस बयान का जवाब दे रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि हिंदुओं और मुसलमानों के पूर्वज एक हैं.

मदनी ने मंच से कहा, “मैंने बड़े बड़े धर्मगुरुओं से पूछा कि जब कोई नहीं था, न श्री राम थे, न ब्रह्मा थे, न शिव थे, जब कोई नहीं था, तब सवाल पैदा होता है कि मनु पूजते किसे थे?”

 

Suresh Chavhanke “Sudarshan News”
@SureshChavhanke
·
Feb 11
रामलीला मैदान क्षेत्र का नाम “उस्मानाबाद” कर दिया।
यह कारनामा तालिबान के मुल्ला के उस्ताद देवबंद के मौ. अरशद और महमूद मदनी के “जमीअत उलमा-ए-हिंद” ने किया है। इनका जलसा 12 फ़रवरी को दिल्ली में होने जा रहा है। हम इसे तत्काल रद्द करके कार्रवाई FIR करने की माँग करते हैं
@DelhiPolice

 

उन्होंने कहा, “कोई कहता है कि शिव को पूजते थे, लेकिन उनके पास इल्म नहीं है. बहुत कम लोग ये बताते हैं कि जब कुछ नहीं था दुनिया में तो मनु ओम को पूजते थे.”

“तब मैंने पूछा कि ओम कौन है? बहुत से लोगों ने कहा कि ये हवा है, जिसका कोई रूप नहीं है, कोई रंग नहीं है. वो दुनिया में हर जगह है, हवा हर जगह है. उन्होंने आसमान बनाया, उन्होंने ज़मीन बनाई.”

मदनी ने कहा, “मैंने कहा कि अरे बाबा, इन्हीं को तो हम ‘अल्लाह’ कहते हैं. इन्हीं को तो तुम ‘ईश्वर’ कहते हो. फ़ारसी बोलने वाले ‘ख़ुदा’ कहते हैं. अंग्रेज़ी बोलने वाले ‘गॉड’ कहते हैं. इसका मतलब ये है कि मनु यानी आदम, ओम यानी अल्लाह को पूजते थे. ये हमारे मुल्क की ताक़त है.”

इसके जवाब में आचार्य लोकेश मुनि (जैन मुनि) ने कहा, “जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर हुए, उससे पहले 23वें भगवान पार्श्वनाथ थे. नेमिनाथ योगीराज कृष्ण के चचेरे भाई थे, किंतु याद रखिए इससे पहले भगवान ऋषभदेव पहले तीर्थंकर थे, जिनके पुत्र भरत के नाम पर इस भारत देश का नाम पड़ा है.”

“आप ऐसे नहीं मिटा सकते. आपने जो बात कही है मैं उससे सहमत नहीं हूं और मेरे साथ सर्वधर्म के संत भी सहमत नहीं हैं. हम केवल सहमत हैं कि हम मिलजुलकर रहें, प्यार से रहें, मोहब्बत से रहें.”

महमूद मदनी हिंदू राष्ट्र, बीजेपी और आरएसएस के सवाल पर क्या-क्या बोले

दिल्ली के रामलीला मैदान में चल रहे जमीअत-उलमा-ए-हिंद के 34वें आम अधिवेशन में संस्था के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा है कि भारत उनका भी उतना ही है जितना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का है.

अपने भाषण में महमूद मदनी ने ये भी कहा है कि इस्लाम भारत में सबसे पुराना धर्म है. महमूद मदनी ने ये भी कहा कि उनका भारतीय जनता पार्टी या आरएसएस से धार्मिक नहीं बल्कि वैचारिक मतभेद है.

अपने भाषण के दौरान महमूद मदनी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को आकर बात करने का न्यौता भी दिया.

अपने भाषण में महमूद मदनी ने कहा, “आइये, आपसी भेदभाव को भूलकर एक दूसरे को गले लगाएं और देश को दुनिया का सबसे शक्तिशाली मुल्क बनाएं. हमें सनातन धर्म से कोई शिकायत नहीं है, आपको भी इस्लाम से कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए.”

अपने भाषण में महमूद मदनी ने भारत को मुसलमानों की पहली मातृभूमि भी कहा है.

शनिवार को दिया महमूद मदनी का ये भाषण चर्चा में है. महमूद मदनी को हाल ही में अंतरराष्ट्रीय संस्था रैबिट ने दुनिया के सबसे प्रभावशाली मुसलमानों की सूची में 12वें नंबर पर रखा था. रैबिट की रिपोर्ट में मौलाना महमूद मदनी के बारे में लिखा गया है कि उनका स्कूल ऑफ थॉट पारंपरिक सुन्नी है और जिस जमीअत उलमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष हैं, उसके 1.2 करोड़ अनुयायी हैं.

जमीअत उलमा-ए-हिन्द की स्थापना 1919 में हुई थी. इसे बनाने वाले देवबंद स्कॉलर के लोग थे. रैबिट के अनुसार, यह संगठन समावेशी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की बाद करता है.

रैबिट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ”1992 में देवबंद से ग्रैजुएट होने के बाद मदनी जमीअत के साथ जुड़ गए थे. मदनी भारत में मुसलमानों के हक़ को लेकर बोलते रहते हैं और साथ ही आतंकवाद के लिए जिहाद टर्म के इस्तेमाल का भी विरोध करते हैं. मदनी इस्लामोफ़ोबिया के ख़िलाफ़ भी मुखर रहे हैं. भारत में धर्म के आधार पर मुसलमानों से भेदभाव का भी विरोध करते रहे हैं.”

‘मुसलमानों को कमज़ोर करने की कोशिश मंज़ूर नहीं’

बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा ने महमूद मदनी से इन सभी मुद्दों पर बात की. पढ़िये ये बातचीत-

सवाल:आपने कहा है कि हिंदुस्तान में मुसलमान बराबर है. भारत का संविधान सभी नागरिकों को बराबरी का हक़ देता है, तो फिर बार-बार आपको ये कहना क्यों पड़ रहा है कि मुसलमान बराबर हैं?

जवाबः कई बार ऐसा होता है कि अपनी बात को और अच्छे से रखने के लिए ये बताना ही पड़ता है कि हम सब बराबर हैं, हमें आप बाहर का बताकर, नया धर्म बताकर, जो कोशिश हो रही है हमें कमज़ोर करने की, वो हमको मंज़ूर नहीं है. इसलिए ये बताना ज़रूरी होता है कि हम बराबर हैं, किसी से कम नहीं है.

सवालः बहुत से लोग ये मानते हैं और डाटा भी यही दिखाता है कि भारत की राजनीति में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व लगातार कम हो रहा है, क्या आप संसद में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने को लेकर काम कर रहे हैं?

जवाबः भारत में लोकतंत्र है, ऐसे में प्रतिनिधित्व का सवाल हमेशा उठेगा. मैं जो मानता हूं, हो सकता है उससे बहुत से लोग असहमत हो सकते हैं, मैं ये मानता हूं कि प्रतिनिधित्व संख्या के आधार पर नहीं बल्कि इंसाफ़, बराबरी और बराबर मौकों के आधार पर होना चाहिए. मान लीजिए की संख्या के मामलों में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व कम है, अगर ये संख्या बढ़े तो और अच्छा है, लेकिन अगर संख्या कम रहे और नाइंसाफ़ी ना हो, मुसलमानों के साथ मौके बराबर हों और एक ख़ास सोच को देश में लाने की कोशिश ना की जा रही हो, न्यायपालिका अपना काम ठीक से कर रहा हो, प्रशासन अपना काम ठीक से कर रहा हो और विधायिका अपना काम ठीक से कर रही हो तो अगर संख्या की वो कमी होगी भी तो खलेगी नहीं.

हिंदू राष्ट्र पर क्या बोले मदनी?
सवालः भारत में हिंदू राष्ट्र की मांग लगातार मज़बूत हो रही है, रामलीला मैदान से कई बार हिंदू राष्ट्र की मांग उठी है, अगर भारत उस दिशा में जाता है तो मुसलमान अपने आपको कहां देखते हैं?

जवाबः ये एक मुश्किल सवाल है, सभी सवालों का एक साथ जवाब देना भी मुश्किल है. हम ये मानते हैं कि जो भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की बात करते हैं वो ये परिभाषित कर दें कि भारत के हिंदू राष्ट्र बनने का मतलब क्या है, वो बता दें कि अगर भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा तो क्या-क्या होगा और क्या नहीं होगा तो हम भी ये बता सकेंगे कि हम क्या-क्या करेंगे और क्या नहीं करेंगे.

सवालः आज भारत में मुसलमानों की पहचान, शिक्षा और प्रतिनिधित्व पर कई सवाल हैं. बहुत से लोग ये मानते हैं कि मुसलमानों को किनारे किया जा रहा है, क्या आपको भी ऐसा ही लगता है?

जवाबः बहुत सारी शिकायतें हैं, अधिकतर शिकायतें जायज़ हैं, प्रशासन का रवैया या और भी बहुत सारी शिकायतें हमारी हैं, लेकिन इन शिकायतों के बावजूद हममें नाउम्मीदी नहीं हैं. हमारी संस्था में और हमारे जैसे सोचने वाले लोगों को बहुत से शिकायतें होने के बावजूद, इस देश से हमें बहुत उम्मीद भी है.

‘हम आरएसएस से बात करने के लिए तैयार’
सवालः आपने आरएसएस को अपने सम्मेलन में आमंत्रित किया है, अगर आरएसएस आपसे बात करने आगे आता है तो आप क्या बात करेंगे?

जवाबः बातचीत की एक प्रक्रिया पहले से ही चल रही है, जैसा कि एक प्रक्रिया शुरू हुई है, हम पहले भी उस प्रक्रिया की पुष्टि कर चुके हैं और कह चुके हैं कि हम उसके साथ हैं. अपने इस आम अधिवेशन के ज़रिए हमारे लिए ये कहना ज़रूरी हुआ कि जो आरएसएस से बात करने की एक प्रक्रिया शुरू हुई है, पांच लोग सर संघचालक से मिले भी हैं, हम उस प्रक्रिया का समर्थन कर रहे हैं. हमारा इशारा यही है कि हम संघ से बात करने को तैयार हैं.

सवालः दुनिया के दूसरे देशों के मुक़ाबले भारत में मुसलमानों की स्थिति को आप कैसे देखते हैं?

जवाबः भारत के मुसलमानों की स्थिति पाकिस्तान या दूसरे देशों के मुसलमानों से बेहतर है. हम ये चाहते हैं कि आज वैश्वीकरण के इस दौर में भारत नेतृत्व करे, हम ये मानते हैं कि अगर किसी भी अल्पसंख्यक को दबाया गया या उसके भीतर ये भावना आई कि उसे दबाया जा रहा है तो फिर देश दुनिया का नेतृत्व नहीं कर सकेगा. इसलिए ही हमारी बराबरी की ये लड़ाई राष्ट्रहित में है.

‘मुसलमान किसी एक पार्टी का विरोध ना करें’

सवालः अगर आरएसएस या बीजेपी से आपकी बात शुरू होती है तो क्या ये भी माना जाए कि आगे चलकर आप बीजेपी का राजनीतिक समर्थन भी कर सकते हैं?

जवाबः मैं हमेशा ये बात कहता रहा हूं कि मुसलमानों को किसी भी राजनीतिक दल के लिए अपना दरवाज़ा बंद नहीं करना चाहिए और कभी भी इस इरादे से खड़ा नहीं होना चाहिए कि किसी राजनीतिक दल को हर हाल में हराना है.

सवालः आपकी नज़र में आज मुसलमानों का सबसे बड़ा मुद्दा क्या है?

जवाबः आज के दौर में शिक्षा में पिछड़ापन मुसलमानों का सबसे बड़ा मुद्दा है, ख़ासकर बच्चियों की शिक्षा. हम जल्द ही लड़कियां के लिए शिक्षा संस्थान बनाने का प्रस्ताव लाने वाले हैं.

ANI_HindiNews
@AHindinews
 मैंने धर्म गुरु से पूछा जब कोई नहीं था,न श्री राम,न ब्रह्म,तब मनु किसे पूजते थे?कुछ लोग बताते हैं कि वे ओम को पूजते थे तब मैंने कहा कि इन्हें ही तो हम अल्लाह,आप ईश्वर,फारसी बोलने वाले खुदा और अंग्रेजी बोलने वाले गॉड कहते हैं: जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख मौलाना सैयद अरशद मदनी

ANI_HindiNews
@AHindinews

 दिल्ली: जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख मौलाना सैयद अरशद मदनी के संबोधन के बाद मंच पर उपस्थित आचार्य लोकेश मुनि (जैन मुनि) ने नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा, “हम उनके(अरशद मदनी) वक्तव्य से सहमत नहीं है। हम केवल आपस में मिलजुल कर रहने से सहमत हैं।”

ANI_HindiNews
@AHindinews

हमने सभी ने प्रेम और सद्भाव की बातें की लेकिन मदनी साहब का जो वक्तव्य आया वह बिल्कुल अलग रहा। उन्होंने अपनी ही कोई कहानी कह दी। हम सभी सर्वसम्मति से मदनी जी की बातों का विरोध करते हैं: जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख मौलाना सैयद अरशद मदनी के बयान पर आचार्य लोकेश मुनि (जैन मुनि)

Ali Sohrab
@007AliQaQa

गंगा-जुम्मनी तहज़ीब की लाश कंधे पर उठाए अपने वतनी भाईयों के साथ सद्भावना यात्रा पर निकले मदनी साहब ने आदम अलैहिस्सलाम को भारतीय जातिवाद का जनक से बराबरी करते हुए आदम अलैहिस्सलाम व मनु को एक ही बता दिए,लेकिन मदनी साहब के वतनी भाईयों ने गंगा-जुम्मनी तहज़ीब की लाश को चीड़-फाड़ दिया!

Shubhankar Mishra
@shubhankrmishra

मैंने धर्म गुरु से पूछा जब कोई नहीं था,न श्री राम,न ब्रह्म,तब मनु किसे पूजते थे? कुछ लोग बताते हैं कि वे ओम को पूजते थे तब मैंने कहा कि इन्हें ही तो हम अल्लाह, आप ईश्वर,फारसी बोलने वाले खुदा और अंग्रेजी बोलने वाले गॉड कहते हैं: जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख मौलाना सैयद अरशद मदनी\\

Shubhankar Mishra
@shubhankrmishra
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जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख मौलाना सैयद अरशद मदनी के बयान से नाराज़गी जाहिर करते हुए आचार्य लोकेश मुनि (जैन मुनि) ने कहा, हम उनके(अरशद मदनी) वक्तव्य से सहमत नहीं है। हम केवल आपस में मिलजुल कर रहने से सहमत हैं।

गोपाल सनातनी
@GopalSa22721269

‘अल्लाह और ओम एक’… अरशद मदनी के बयान पर भड़के जैन मुनि, छोड़ा जमीयत का मंच और उनके ही मंचपर खरी खरी सुनाकर भी आ गये, कई चाय पानी के इंतजार में बैठे रहे..??