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यूक्रेन के अनाज से लदा पहला जहाज़ ओडेसा के पोर्ट से लेबनान रवाना

यूक्रेन के अनाज से लदा पहला जहाज ओडेसा के पोर्ट से निकल चुका है. जहाज पर 26,000 टन मक्का लदा है, जिसका लेबनान को बेसब्री से इंतजार है.

युद्ध के बीच यूक्रेन के तटीय शहर ओडेसा से पहली बार यूक्रेनी मक्के से लदा मालवाहक जहाज रवाना हुआ. राजोनी नाम का यह कार्गो शिप सिएरा लियोन की कंपनी है. तुर्की और संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच अनाज सप्लाई को लेकर हुई डील के तहत यह खेप रवाना हुई. माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर जहाज का वीडियो पोस्ट करते हुए यूक्रेन के इंफ्रास्ट्रक्चर मामलों के मंत्री ओलेक्सांद्र कुब्राकोव ने लिखा, “रूसी आक्रमण शुरू होने के बाद से अनाज से भरा पहला शिप पोर्ट से रवाना हुआ है.”

फेसबुक पर एक अलग पोस्ट में कुब्राकोव ने कहा कि “यूक्रेन दुनिया का चौथा बड़ा मक्का निर्यातक है, आज यूक्रेन अपने साझेदारों के साथ मिलकर, दुनिया को भूख से बचाने के लिए एक और कदम उठा रहा है.” रूस सरकार ने भी इसका स्वागत किया है. रूसी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने जहाज की रवानगी को “बहुत ही सकारात्मक” बताया. पेस्कोव के मुताबिक इस्तांबुल में हुई बातचीत में जिन मुद्दों को लेकर रूस और यूक्रेन के बीच सहमति बनी, अब उनके मैकेनिज्म की जांच हो सकेगी.

अनाज के निर्यात से यूक्रेन को करीब एक अरब डॉलर मिलेंगे. इस रकम से किसानों को अगली फसल की तैयारी में भी मदद मिलेगी. वहीं यूक्रेन का मक्का मध्य पूर्व के देश लेबनान को बड़ी राहत देगा. विश्व बैंक के मुताबिक 150 साल से भी ज्यादा लंबे समय के बाद लेबनान इस वक्त सबसे बुरे वित्तीय संकट का सामना कर रहा है. 2020 में बेरूत के पोर्ट पर हुए विनाशकारी धमाके में कई अनाज गोदाम भी ध्वस्त हो गए. पोर्ट पर बनी स्टोरेज फैसिलिटीज का एक हिस्सा दो साल बाद जुलाई 2022 में आग की चपेट में आकर ढह गया.

तुर्की के रक्षा मंत्री हुलुसी अकार के मुताबिक राजोनी जहाज, मंगलवार दोपहर तक इस्तांबुल में बोस्पोरस के मुहाने तक पहुंच जाएगा. वहां रूस, यूक्रेन, तुर्की और यूएन के अधिकारी जहाज पर चढ़ेंगे और इंस्पेक्शन करेंगे. तुर्की की सरकारी न्यूज एजेंसी आनादोलू से बातचीत में हुलुसी अकार ने चेतावनी दी कि दुनिया खाद्यान्न संकट का सामना कर रही है और इसके कारण “अफ्रीका से बड़े पैमाने पर लोग यूरोप और तुर्की की तरफ विस्थापित हो सकते हैं.” तुर्की के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक अनाज की सप्लाई के लिए काले सागर में बनाए गए कॉरिडोर से ही बाकी के जहाज भी निकलेंगे

यूएन और ईयू ने भी स्वागत किया

संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंटोनियो गुटेरेष ने ओडेसा से निकलने जहाज को सकारात्मक दिशा की तरफ ले जाने वाला कदम बताया है. वहीं यूरोपीय संघ ने “इसे वैश्विक खाद्य संकट से लड़ने की दिशा में पहला कदम” करार दिया. यूरोपीय संघ के प्रवक्ता पेटर स्टानो उम्मीद जताते हुए कहा कि तुर्की में हुई संधि को पूरी तरह से अमल में लाया जाएगा और दुनिया भर के ग्राहकों तक यूक्रेन का निर्यात पहुंचेगा. जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने भी ओडेसा से निकले जहाज को “उम्मीद की किरण” कहा है.

आशंकाओं के बीच उम्मीद

रूस और यूक्रेन दुनिया के सबसे बड़े अनाज निर्यातकों में शामिल हैं. अकेले यूक्रेन ही हर साल 2.2 करोड़ टन अनाज और दूसरी खाद्य सामग्री का निर्यात करता है. लेकिन रूस के हमले की वजह से यूक्रेन को काले सागर के पोर्ट्स बंद करने पड़े. यूक्रेनी अनाज का 95 फीसदी भंडार काले सागर के बंदरगाहों से ही दुनिया भर तक पहुंचाया जाता है.

22 जुलाई को तुर्की के सबसे बड़े शहर इस्तांबुल में हुई डील के तहत रूस और यूक्रेन, अनाज और खाद के निर्यात के लिए सुरक्षित कॉरिडोर मुहैया कराएंगे. इसी गलियारे के जरिए रूस रासायनिक खाद भी निर्यात करेगा. तुर्क रक्षा मंत्री अकार कहते हैं, “समस्याएं तो जगजाहिर हैं, युद्ध चल रहा है. लेकिन यही एक मुद्दा है, जिसे लेकर दोनों पक्ष साथ आ सकते हैं. उठापटक के बावजूद संवाद के लिए माहौल अच्छा है.”

अनाज के साथ ही खाद की सप्लाई

2020 के आंकड़ों के मुताबिक रूस दुनिया का सबसे बड़ा खाद निर्यातक है. भारत, ब्राजील, अमेरिका, एस्टोनिया, स्विट्जरलैंड और चीन रूसी खाद के बड़े खरीदार हैं. अफ्रीका के कई देश भी रूसी खाद पर निर्भर रहते हैं. रूसी खाद निर्यात में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी पोटाश, फॉस्फेट और नाइट्रोजन से बनी खाद की है. अगर रूसी खाद कई देशों तक नहीं पहुंची, तो आगामी पैदावार प्रभावित होगी और खाद्य आपूर्ति औंधे मुंह गिर पड़ेगी.

यूक्रेन की राजधानी कीव में राजुम्कोव सेंटर नाम के थिंक टैंक में काम करने वाले एक्सपर्ट वोलोदिमीर सिदेंको कहते हैं कि खतरा अब भी बना हुआ है. ओडेसा के इलाके ने लगातार बमबारी का सामना किया है. ऐसे लगातार होने वाली सप्लाई से ही पता चलेगा कि दस्तखत की गई संधियां कितनी कारगर हैं.

राजुम्कोव यह भी कहते हैं कि पहले जहाज के निकलने से खाद्यान्न संकट हल नहीं हो जाएगा, “यह तो सिर्फ पहला कदम है और ये भी हो सकता है कि रूस दक्षिण में हमले जारी रखे और ये आखिरी खेप साबित हो.”

ओएसजे/एसएम (एपी, डीपीए)