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राष्ट्रपति भवन में स्थित #मुगल गार्डन का नाम बदलकर ‘अमृत उद्यान’ किया गया, लोगों ने जतायी नाराज़गी!

राष्ट्रपति भवन में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदलकर ‘अमृत उद्यान’ कर दिया गया है.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक राष्ट्रपति की डिप्टी प्रेस सचिव नविका गुप्ता ने कहा कि देश के आजादी के 75 साल के मौके पर भारत के राष्ट्रपति भवन के सभी बगीचों को ‘अमृत उद्यान’ कहा जाएगा.

वहीं बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट करते हुए लिखा, “‘अमृतकाल’ में ‘गुलामी की मानसिकता’ से बाहर आने के क्रम में मोदी सरकार का एक और ऐतिहासिक फैसला…राष्ट्रपति भवन में स्थित “मुगल गार्डन” अब “अमृत उद्यान” के नाम से जाना जाएगा.”

Sambit Patra
@sambitswaraj

‘अमृतकाल’ में ‘गुलामी की मानसिकता’ से बाहर आने के क्रम में मोदी सरकार का एक और ऐतिहासिक फैसला…

राष्ट्रपति भवन में स्थित “मुगल गार्डन” अब “अमृत उद्यान” के नाम से जाना जाएगा।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी मुगल गार्डन का नाम बदले जाने पर एक वीडियो ट्वीट किया है.

वीडियो में कुछ कर्मचारी अमृत उद्यान का बोर्ड लगा रहे हैं.

कैसा है मुगल गार्डन

राष्ट्रपति भवन की वेबसाइट के अनुसार यह गार्डन 15 एकड़ में फैला हुआ है, जिसे प्रेसीडेंशियल पैलेस की आत्मा के रूप में चित्रित किया जाता है.

मुगल गार्डन को जम्मू और कश्मीर के मुगल गार्डन, ताजमहल के आस-पास के गार्डन, भारत और पेरिस की लघु पेंटिंग से प्रेरित है.

सर एडविन लुट्येन्स ने 1917 में मुगल गार्डन के डिजाइन को अंतिम रूप दिया था.


अवनीश कुमार त्रिपाठी🇮🇳🇮
@KmAvanish

@sambitswaraj
यानि 9 साल से आप लोग खुद और देश के नागरिकों को गुलामी में रखे थे, अचानक चुनाव देख आजादी याद आ गई, आगामी लोकसभा चुनाव तक यही सिलसिला चलेगा,देश और वोटर दोनो जानते हैं,

Ashok Kumar Shende
@AshokKumarShen2

@sambitswaraj
माननीय महोदय जी इस अमृत काल में २१ लाख गरीब निवेशक अभिकर्ता कर्मचारीयों को उनकी खून पसीने की कमाई आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी से वापिस दिलाने की दया करें ५ साल से सरकार से गुहार लगा रहे हैं कोई सुनवाई नहीं बेरोजगारों को रोजगार चाहिए

Ravi Kumar Jain_INC
@ravijainwin

@sambitswaraj
पर यह सच रहेगा कि तेरे पूर्वज अंग्रेजों के मुखबिर थे , कितनी भी कोशिश कर इतिहास को बदलने की

Mahadeo. A Gholve
@Agholv

@sambitswaraj

जब तक अंग्रेजी भाषा और अंग्रेजी हुकुमशाही में बनी कानून व्यवस्था बरकरार रहेगी तब तक तो गुलामी की मानसिकता बनी रहेगी चाहे माने या ना माने ‌.नौकरशाही को साहेब कहने का प्रचलन भी तो है देश में?