साहित्य

लेखिका राजरानी_महात्मा गांधी जयंती पर विशेष। ‘बापू एक असाधारण व्यक्तित्व’

Ravi Press
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लेखिका राजरानी_ महात्मा गांधी जयंती पर विशेष । बापू एक असाधारण व्यक्तित्व’
ऐसा कभी-कभी ही होता है कि जब कोई असाधारण आत्मा सामान्य स्तर से ऊपर उठकर ईश्वर के विषय में गहराई से चिंतन करती है ऐसी महान आत्मा का आलोक अंधकार में और अस्त-व्यस्त संसार के लिए प्रखर संकेत दीप का काम करता है। गांधी जी उन पैगंबरों में से हैं, जिनमें हृदय का शौर्य ,आत्मा का शील और निर्भीक व्यक्ति की हंसी के दर्शन होते हैं।उनका जीवन और उनके उपदेश उन मूल्यों के साक्षी हैं, जो राष्ट्रीय- अंतर्राष्ट्रीय की सीमा से परे सार्वभौम हैं और जो युगों से इस देश की धरोहर रहे हैं।
अपने देशवासियों के मन में तो वह संभवतः महात्मा के रूप में अंकित रहेंगे या उन्हें प्यार से बापू राष्ट्रपिता कह कर याद रखा जाएगा, जिन्होंने रक्त हीन क्रांति के जरिए हमें दासता से मुक्त कराया था। गांधी जी के वें कौन से गुण हैं जो महानता के अवयव हैं ?
वे केवल एक महान व्यक्ति ही नहीं थे वह महापुरुष और सत्पुरुष दोनों थे, और महानता एवं सत्यता का ऐसा योग अत्यंत दुर्लभ है। इस छोटे से दिखने वाले आदमी का अपने देशवासियों के ऊपर इतना जबरदस्त प्रभाव था कि उसकी मिसाल नहीं मिलती यह आश्चर्य की ही बात है कि इस प्रभाव के पीछे कोई लौकिक शक्ति या अस्त्र-शस्त्रों का बल नहीं था। लॉर्ड हेलीफैक्स के मतानुसार “उनका श्रेष्ठ चरित्र और स्वयं को मिसाल के रूप में रखने वाला उनका श्रेष्ठ आचरण ” ही इसका एक मात्र कारण था। गांधीजी ने अपने चरित्र और आचरण की शक्ति के द्वारा ही लोगों पर इतना गहरा प्रभाव डाला। गांधीजी की महानता वास्तव में उनकी उपलब्धियों में नहीं आपितु उनके चरित्र में निहित थी,
उनके अनुसार आत्म शुद्धिकरण के बिना अहिंसा के नियम का पालन नहीं किया जा सकता, जिसका हृदय शुद्ध नहीं वह ईश्वर की प्राप्ति नहीं कर सकता।अतः आत्मशुद्धिकरण का अर्थ जीवन के सभी क्षेत्रों में शुद्धिकरण से लिया जाना चाहिए।गांधीजी के अनुसार ब्रह्मचर्य का पूरा और सही अर्थ हैं ‘ब्रह्म की खोज’ ब्रह्म प्रत्येक जीव में व्याप्त है इसलिए इसे अपनी अंतरात्मा में गोता लगाकर और सिद्धि के द्वारा खोजा जा सकता है। अंतरात्मा पर सिद्धि