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सऊदी अरब, यूएई और अन्य अरब देशों ने अफ़ग़ानिस्तान में अपने दूतावासों को बंद क्यों कर दिया, जानिये वजह!

काबुल में सऊदी अरब के दूतावास और संयुक्त अरब अमीरात के राजनयिक मिशन के बंद होने और अफगानिस्तान में कई अन्य राजनीतिक मिशनों के बंद होने की अटकलों की वजह से अफ़ग़ानिस्तान में स्थिति एक नए चरण में पहुंच गई है।

रविवार को अफ़ग़ान मीडिया ने काबुल में सऊदी अरब के राजनयिक मिशन को बंद करने की सूचना दी थी। इस खबर के प्रकाशित होते ही काबुल में सऊदी अरब के दूतावास को बंद करने की अटकलों और कारणों के बारे में एक आधिकारिक बयान भी जारी किया गया था। हश्त सुब्ह सहित अफ़ग़ान मीडिया ने लिखा कि काबुल में सऊदी दूतावास शायद महिला कर्मचारियों की उपस्थिति पर प्रतिबंध के कारण बंद कर दिया गया है।

ऐसे में काबुल में सऊदी अरब के दूतावास के क़रीबी सूत्रों का दावा है कि इस देश में दूतावास के 19 कर्मचारियों में एक भी सऊदी महिला नहीं है और शायद इसका मकसद स्थानीय अफ़ग़ान महिलाओं को सऊदी अरब की ओर आकर्षित करना है।

अफ़ग़ान मीडिया ने काबुल में सऊदी राजनयिक मिशन को बंद करने के बारे में एक और संभावना भी प्रकट की है और कहा है कि आतंकवादी हमलों के डर से सऊदी अरब के राजनयिकों ने एक निजी हवाई जहाज़ कॉम एयर से अफ़ग़ानिस्तान छोड़ दिया।

इन अटकलों के विपरीत, सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने काबुल से अपने राजनयिकों को वापस बुलाने का कारण नहीं बताया है।

तालेबान के अंतरिम सरकार के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि सऊदी अरब के दूतावास को बंद करना अस्थायी है, सऊदी राजनयिक प्रशिक्षण के लिए काबुल से रवाना हुए हैं और जल्द ही काबुल लौटेंगे।

दूसरी ओर, सोमवार को काबुल में संयुक्त अरब इमारात के दूतावास के बंद होने की खबर भी सामने आई जिससे विश्लेषकों को उपरोक्त दोनों घटनाओं के बारे में अधिक सोचने पर मजबूर होना पड़ा।

काबुल में संयुक्त अरब इमारात के दूतावास को बंद करने का कारण इस अरब देश के विदेश मंत्रालय द्वारा अभी तक बताया नहीं गया है।