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सच में औरंगज़ेब कितना न्यायप्रिय शासक था, उस समय हिन्दू-मुस्लिम या सांप्रदायिकता जैसी कोई बात नही थी!

Kranti Kumar
@KraantiKumar
1669 में मुग़ल बादशाह औरंगजेब का कारवां दिल्ली से कलकत्ता जा रहा था. उनके काफिले में देश के कुल 44 राजा और उनकी रानियां भी थीं.

जब बादशाह का काफिला बनारस के पास पहुंचा तो हिन्दू रानियों से काशी भगवान का दर्शन करने की इच्छा जाहिर की. मंदिर से 5 किलोमीटर दूर सेना की छावनी बनी. रानियों को पालकी में बिठाकर मंदिर तक पहुंचाया गया.

रानियों ने पवित्र गंगा नदी में स्नान किया और काशी देवता के दर्शन किए. वापसी में 43 रानियां छावनी में पहुंच गई. केवल एक रानी, कच्छ की महारानी लापता पाई गईं.

खोजबीन के बाद महारानी ली लैश अर्धनग्न अव्यवस्था में मंदिर के तहखाने में मिला. हिन्दू राजाओं ने बादशाह औरंगजेब से न्याय की गुहार लगाई.

जांच पड़ताल में पाया गया मंदिर एक महंत ने रानी से व्यभिचार किया था. औरंगजेब के आदेश पर महंत को पेड़ पर लटका दिया गया. हिन्दू राजाओं ने बादशाह ज़िंदाबाद के नारे लगाए.

यह घटना का उल्लेख Feathers And Stone नाम की पुस्तक में मिलता है जिसके लेखक इतिहासकार Pattabhi Sitaramayya हैं.

सच में औरंगजेब कितना न्यायप्रिय शासक था जो हिन्दू राजाओं के साथ मिलजुलकर शासन चला रहा था. उस समय हिन्दू – मुस्लिम या सांप्रदायिकता जैसी कोई बात नही थी.


🥀 Shazeb Ali Khan ✨🥀
@khanshazebali

औरंगजेब बहुत ही नियाय प्रिय बादशाह था,

वो कहानी भी लिख दो जिस में इक हिंदू लड़की औरंगजेब से न्याय मांगने दिल्ली पहुंची
और उसके बाद ऑनरांगजेब से कसम खाई की जब तक इस लड़की को न्याय न दिला दूं तब का मेरा पानी पीना भी हराम है,
और फिर औरंगजेब ने अपने वजीर हो हाथी में बांध कर चीर दिया